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मशरूम की खेती पर किसान को 28 लाख का अनुदान, केंद्र की इन योजनाओं से आप भी बढ़ा सकते हैं आमदनी

newz@gmail.com | Sep 23, 2026, 23:35 IST

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के किसान जगदीश वर्मा ने मशरूम खेती को कारोबार बनाया। उन्हें दो सरकारी योजनाओं से कुल 28 लाख रुपए का अनुदान मिला। 2017-18 में करीब 8 लाख और 2021-22 में करीब 20 लाख रुपए मिले। जानिए कौन सी हैं ये योजनाएं...

मशरूम की खेती

ये बिलासपुर जिले के किसान जगदीश वर्मा की कहानी है। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग मशरूम उत्पादन चुना। इसकी शुरुआत उन्होंने 2009 में बटन मशरूम से की थी। बाद में उन्होंने उत्पादन का दायरा बढ़ाया।

इस विस्तार में सरकारी योजनाओं से मिली मदद अहम रही। किसान को दो चरणों में कुल करीब 28 लाख रुपए का अनुदान मिला। पहली मदद वर्ष 2017-18 में मिली थी। दूसरी सहायता वर्ष 2021-22 में मिली।

पहले चरण में करीब 8 लाख रुपए मिले। यह सहायता एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत मिली। दूसरे चरण में करीब 20 लाख रुपए मिले। यह राशि आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के तहत मिली।

पहली योजना कौन सी थी

पहले चरण में किसान को एकीकृत बागवानी विकास मिशन से मदद मिली। इसका अंग्रेजी नाम Mission for Integrated Development of Horticulture है। यह केंद्र सरकार की बागवानी विकास योजना है। इसे राज्यों के माध्यम से लागू किया जाता है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड भी इसके तहत योजनाएं चलाता है।

मशरूम उत्पादन इसके दायरे में शामिल है। मौजूदा दिशा-निर्देशों में उत्पादन इकाई के लिए सहायता का प्रावधान है। निजी क्षेत्र के लिए सामान्य क्षेत्रों में 40 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। कुछ विशेष क्षेत्रों में सहायता की दर 50 प्रतिशत है।

जगदीश को 2017-18 में करीब 8 लाख रुपए मिले थे। इस राशि से उन्होंने उत्पादन इकाई का बुनियादी ढांचा तैयार किया। इससे उनके मशरूम कारोबार को आगे बढ़ाने का आधार बना।

दूसरी योजना से मिली बड़ी मदद

दूसरे चरण में जगदीश को आरकेवीवाई-रफ्तार योजना से मदद मिली। आरकेवीवाई का पूरा नाम Rashtriya Krishi Vikas Yojana है। रफ्तार का अर्थ Remunerative Approaches for Agriculture and Allied Sector Rejuvenation है।

यह केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत राज्यों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए सहायता मिलती है। हिमाचल प्रदेश को भी इसके तहत केंद्र से राशि जारी हुई है। सरकारी दस्तावेजों में राज्यों के जरिए परियोजनाएं लागू होने का उल्लेख है।

जगदीश को वर्ष 2021-22 में करीब 20 लाख रुपए मिले। इस सहायता से उन्होंने अपना उत्पादन ढांचा मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने शिटाके मशरूम का उत्पादन भी शुरू किया।

शिटाके ने बढ़ाया कारोबार

जगदीश पहले बटन मशरूम का उत्पादन करते थे। बाद में उन्होंने शिटाके मशरूम को भी कारोबार में जोड़ा। उपलब्ध खबर के अनुसार इसकी बाजार मांग और कीमत ज्यादा बताई गई है।

सरकारी मदद से बने ढांचे ने उन्हें उत्पादन बढ़ाने में मदद की। इससे उन्होंने मशरूम की अलग प्रजाति पर काम शुरू किया। उनका मॉडल अब आसपास के किसानों का ध्यान खींच रहा है।

हालांकि किसी किसान की आमदनी केवल अनुदान से तय नहीं होती। उत्पादन, लागत और बाजार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। उपलब्ध खबर में सालाना शुद्ध मुनाफे का आंकड़ा नहीं दिया गया है।

कम जगह में शुरू हो सकता है काम

मशरूम खेती की एक खास बात कम जगह की जरूरत है। किसान इसे कमरे या शेड में भी शुरू कर सकते हैं। इससे छोटी जोत वाले किसानों को विकल्प मिल सकता है।

जगदीश के अनुसार मशरूम खेती में पारंपरिक फसलों से कम जगह लगती है। वह हर साल कई क्विंटल मशरूम का उत्पादन करते हैं। इसे बाजार में बेचकर आय हासिल करते हैं।

बिलासपुर जैसे पहाड़ी क्षेत्र में यह पहल खास महत्व रखती है। यहां समतल खेती योग्य जमीन सीमित होने की बात खबर में कही गई है। ऐसे क्षेत्रों में कम जगह वाला उत्पादन मॉडल उपयोगी हो सकता है।

दूसरे किसानों के लिए क्या मौका

बिलासपुर जिले में किसान बागवानी विभाग की योजनाओं से मदद ले सकते हैं। मशरूम इकाई शुरू करने के लिए अनुदान का प्रावधान है। पात्रता और सहायता की शर्तें संबंधित योजना पर निर्भर करती हैं।

मौजूदा एमआईडीएच दिशा-निर्देशों में मशरूम उत्पादन इकाई शामिल है। उत्पादन इकाई के लिए लागत मानक 30 लाख रुपए तक बताए गए हैं। सामान्य क्षेत्रों में निजी इकाइयों के लिए 40 प्रतिशत सहायता है।

कम लागत वाली छोटी मशरूम इकाई के लिए भी प्रावधान है। 200 वर्गफुट ढांचे के लिए 2 लाख रुपए का मानक है। इसमें 50 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। एक लाभार्थी अधिकतम पांच इकाइयों का लाभ ले सकता है। योजना का लाभ लेने से पहले किसान को पात्रता देखनी होगी। स्थानीय बागवानी विभाग से योजना की वर्तमान शर्तें जानना जरूरी है।

जगदीश को मिली पहचान

मशरूम खेती में काम के लिए जगदीश को स्थानीय सम्मान भी मिला। उन्हें जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार मिला है। उन्हें प्रगतिशील मशरूम उत्पादक सम्मान भी मिला है।

इसके अलावा उन्हें कृषि शोधकर्ता एवं किसान मंच सम्मान मिला है। उनकी सफलता का असर आसपास के किसानों पर भी पड़ा है। कुछ किसान मशरूम उत्पादन की तकनीक समझने में रुचि ले रहे हैं।

इस कहानी का अहम पहलू केवल 28 लाख का अनुदान नहीं है। असली बदलाव चरणबद्ध तरीके से कारोबार बढ़ाने में दिखता है। पहले बटन मशरूम से शुरुआत हुई। फिर सरकारी मदद से उत्पादन ढांचा मजबूत हुआ। इसके बाद शिटाके मशरूम को भी जोड़ा गया।

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