मध्य प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। तीन परियोजनाओं के लिए कुल 4,967.44 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। इनमें जावद-नीमच परियोजना सबसे बड़ी है। इसके अलावा पार्वती रिन्सी और सुठालिया परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी मिली है। अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक रहेगी। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। इससे 88 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जुड़ने का लक्ष्य है।
जावद-नीमच को 4,197 करोड़
नीमच जिले की जावद-नीमच परियोजना को सबसे ज्यादा राशि मिली है। कैबिनेट ने इसके लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रुपए मंजूर किए। यह परियोजना दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर आधारित है। इसके जरिए पानी खेतों तक पहुंचाने की योजना है।
परियोजना को पांच साल जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसकी अवधि अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक रहेगी। दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई से पानी की बचत का लक्ष्य है। साथ ही सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा। सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने को भी परियोजना का उद्देश्य बताया है। इसका सीधा संबंध खेतों तक पानी की उपलब्धता से है।
सुठालिया परियोजना को 262 करोड़
राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी मिली है। इसके लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। यह परियोजना भी अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगी। इसकी अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 है।
परियोजना में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका लक्ष्य राजगढ़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाना है। सरकार ने 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इससे क्षेत्र में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
पार्वती रिन्सी को 507 करोड़
राजगढ़ की पार्वती रिन्सी परियोजना को भी पांच साल जारी रखा जाएगा। कैबिनेट ने इसके लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपए मंजूर किए। इस परियोजना के तहत बांध निर्माण किया जाएगा। इससे 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
सुठालिया और पार्वती रिन्सी दोनों राजगढ़ जिले से जुड़ी हैं। दोनों परियोजनाओं के लिए अलग-अलग राशि मंजूर हुई है। इन दोनों परियोजनाओं का कुल लक्षित क्षेत्र 88 हजार हेक्टेयर है। जावद-नीमच परियोजना भी अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ाएगी।
किसानों के लिए इसका मतलब
सिंचाई परियोजनाओं का सबसे बड़ा संबंध खेती में पानी से है। पर्याप्त पानी मिलने से किसान फसल चक्र बेहतर कर सकते हैं। सिंचाई सुविधा बढ़ने से बारिश पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि परियोजनाओं का वास्तविक असर जमीन पर काम से तय होगा। इसमें निर्माण, पानी की उपलब्धता और समय पर पूरा होना अहम है। कैबिनेट की मंजूरी से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। अब संबंधित विभागों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करना होगा।
2,800 मेगावॉट बिजली खरीद
कैबिनेट ने बिजली से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला भी लिया है। 2,800 मेगावॉट ताप विद्युत खरीदने को मंजूरी दी गई है। यह फैसला कृषि सहित अन्य क्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों से जुड़ा है। बिजली की खरीद प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया से होगी।
इसके लिए मध्य प्रदेश की विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाएं शामिल होंगी। इनमें मौजूदा और निर्माणाधीन परियोजनाएं भी शामिल हैं। नई प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाओं से भी बिजली खरीदी जा सकेगी। आगे की प्रक्रिया नियामक आयोग की मंजूरी पर निर्भर होगी।
140 क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
कैबिनेट ने खेलों को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया है। प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में परिसर बनेंगे। इनका नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स रखने का फैसला हुआ है। इनके निर्माण और संचालन के लिए सैद्धांतिक सहमति मिली है।
इसके लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपए की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। हर परिसर के मुख्य मैदान में स्थायी हेलीपैड भी होगा। यह फैसला प्रदेश के खेल ढांचे से जुड़ा है। इसके तहत विधानसभा क्षेत्रों में खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
ग्राम न्यायालय योजना जारी रहेगी
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने ग्राम न्यायालय योजना को जारी रखने की मंजूरी दी। यह योजना अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगी। इसके लिए 554 करोड़ 61 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। यह अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक है। इस राशि से न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों का खर्च पूरा होगा। कार्यालय संबंधी खर्च भी इसी राशि से किया जाएगा।
विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड की योजना भी जारी रहेगी। इसके लिए 524 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। परिवार न्यायालयों की स्थापना योजना को भी जारी रखने का फैसला हुआ। इसके लिए 1,000 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।
कई विभागों से जुड़े फैसले
मंत्रि-परिषद ने उच्च न्यायालय से जुड़ी योजना भी जारी रखी है। इसके लिए 2,015 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। वाणिज्यिक कर विभाग की छह योजनाओं को भी मंजूरी मिली है। इनके लिए कुल 969 करोड़ 87 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं।
इन योजनाओं में ई-रजिस्ट्री और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े काम शामिल हैं। विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव की योजनाएं भी इसमें हैं। जिला और उप पंजीयक कार्यालयों से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। इन योजनाओं की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक है।
इंदौर डेंटल कॉलेज में सीटें बढ़ेंगी
शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के लिए भी फैसला हुआ है। यहां 13 नए शिक्षकीय पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक प्राध्यापक और 10 सह-प्राध्यापक पद शामिल हैं। दो सहायक प्राध्यापक पद भी स्वीकृत किए गए हैं। बीडीएस की सीटें 63 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य है। एमडीएस की सीटें 35 से बढ़ाकर 44 होंगी।
कैबिनेट ने तीन जिलों में नए कार्यालयों को भी मंजूरी दी। मैहर और पांढुर्णा में जिला कार्यालय बनाए जाएंगे। सिंगरौली के चितरंगी ब्लॉक में अनुविभागीय कार्यालय बनेगा। इन कार्यालयों के लिए नए पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
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