किसान की बात,सूत्र के साथ

एमपी में ड्रिप सिंचाई से छोटी जमीन पर अदरक की खेती, छिंदवाड़ा के किसान कृपाराम को 15 लाख का बड़ा मुनाफा

newz@gmail.com | Sep 22, 2026, 15:38 IST

छिंदवाड़ा के सोनमऊ गांव के किसान कृपाराम पाठे ने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर सिर्फ 0.400 हेक्टेयर में अदरक की खेती की। ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक प्रबंधन से करीब 250 क्विंटल उत्पादन हुआ। इससे उन्हें करीब 15 लाख रुपए की आय हुई।

अदरक की खेती

छोटी जमीन में भी बड़ी कमाई हो सकती है। छिंदवाड़ा के एक किसान ने यह साबित कर दिखाया है। मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम सोनमऊ (महलपुर) के कृपाराम पाठे ने अदरक की खेती अपनाई। उन्हें इसमें उद्यानिकी विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन मिला। इसी सलाह ने उनकी खेती की दिशा बदल दी।

कृपाराम के पास कुल 1.800 हेक्टेयर जमीन है। उनके खेत में ड्रिप सिंचाई की सुविधा पहले से मौजूद थी। उद्यानिकी विभाग की सलाह से प्रेरित होकर उन्होंने जुलाई 2025 में करीब 0.400 हेक्टेयर में अदरक की फसल लगाई। यानी उन्होंने अपनी कुल जमीन के छोटे हिस्से से शुरुआत की।

कैसे चुनी अदरक की फसल

अदरक की खेती से पहले कृपाराम के सामने एक बड़ी चुनौती थी। उन्हें तय करना था कि सीमित संसाधनों में कौन सी उद्यानिकी फसल फायदेमंद रहेगी। इसमें उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी मदद की। विभाग की सलाह से उन्हें सही फसल प्रबंधन अपनाने में सहायता मिली।

विभागीय सलाह के आधार पर उन्होंने कई बातों पर ध्यान दिया। इनमें भूमि तैयारी और खाद-उर्वरक प्रबंधन शामिल था। माइक्रोन्यूट्रिएंट्स यानी सूक्ष्म पोषक तत्वों का इस्तेमाल भी किया गया। फसल उपचार और सिंचाई प्रबंधन पर भी खास ध्यान दिया गया।

ड्रिप सिंचाई से मिली मदद

कृपाराम ने ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें पौधों को जड़ों तक सीधे पानी मिलता है। उन्होंने फसल की जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई की। इससे पानी की बर्बादी भी कम हुई। वैज्ञानिक तरीके से किए गए इस प्रबंधन ने अदरक की फसल को अच्छी तरह बढ़ने में मदद की।

कितना हुआ खर्च

कृपाराम ने 0.400 हेक्टेयर में अदरक की खेती पर सीमित खर्च किया। उन्होंने अदरक के बीज पर करीब 36,000 रुपए खर्च किए। भूमि तैयारी, खाद, उर्वरक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और उपचार दवा पर करीब 24,000 रुपए और लगे। इस तरह उनकी कुल लागत करीब 60,000 रुपए रही।

करीब एक साल की मेहनत के बाद जुलाई 2026 में उन्होंने अदरक की खुदाई शुरू की। यानी फसल तैयार होने में करीब एक साल का समय लगा।

कितनी हुई कमाई

कृपाराम को इस छोटे से खेत से करीब 250 क्विंटल अदरक का उत्पादन मिला। मंडी में अदरक करीब 5,000 से 6,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। इस तरह उन्हें कुल करीब 15 लाख रुपए की आय हुई।

कृपाराम के मुताबिक कुल लागत निकालने के बाद उन्हें करीब 14.50 लाख रुपए की शुद्ध आय मिली। यानी 60,000 रुपए के निवेश पर उन्हें 24 गुना से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह हिसाब कृपाराम के बताए आंकड़ों पर आधारित है।

तकनीकी मार्गदर्शन बना आधार

कृपाराम पाठे कहते हैं कि यह सफलता सिर्फ फसल लगाने भर से नहीं मिली। उनके मुताबिक यह उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन का नतीजा है। उनका कहना है कि विभागीय सलाह से उन्हें फसल के हर चरण में सही प्रबंधन समझने में मदद मिली। इसे खेत में लागू करना भी आसान हुआ।

खेती के प्रति नजरिया बदला

अदरक की खेती से मिली आय ने कृपाराम की सोच बदल दी है। पहले वे खेती को सिर्फ पारंपरिक काम मानते थे। अब वे इसे अलग नजरिए से देखते हैं। उनके मुताबिक तकनीकी जानकारी, आधुनिक सिंचाई और सही उद्यानिकी फसलों का साथ आना जरूरी है। इसी समन्वय से आय बढ़ाने का मौका बनता है।

किसान इससे क्या सीख सकते हैं

पहली सीख यह है कि छोटी जमीन में भी अच्छी कमाई संभव है। कृपाराम ने अपनी पूरी जमीन नहीं, सिर्फ एक हिस्सा ही अदरक के लिए इस्तेमाल किया। दूसरी सीख विभागीय मार्गदर्शन लेने की है। कृपाराम को सही सलाह उद्यानिकी विभाग से ही मिली। इच्छुक किसान अपने जिले के उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

तीसरी सीख सिंचाई तकनीक की है। ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन भी मिल सकता है। चौथी सीख धैर्य की है। अदरक की फसल तैयार होने में करीब एक साल लगा। इसलिए तुरंत नतीजे की उम्मीद न रखें।

पांचवीं सीख भाव के उतार-चढ़ाव से जुड़ी है। मंडी में अदरक का भाव 5,000 से 6,000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बताया गया है। हर सीजन में भाव एक जैसा नहीं रहता। इसलिए बुवाई से पहले नजदीकी मंडी के भाव का अंदाजा जरूर लगाएं।

ये भी पढ़ें…

पारंपरिक अनाज छोड़ जबलपुर के किसान ने उगाए शिमला मिर्च, बैंगन, टमाटर; 12 एकड़ से कमा रहे दो लाख रुपया महीना

MP के धार में आधुनिक खेती की झलक, तिलगारा में ब्लूबेरी की नई किस्म और रूपाखेड़ा में पॉलीहाउस में गुलाब, जिप्सोफिला

घर से मशरूम खेती शुरू कर छत्तीसगढ़ की मिथिला दीदी बनीं मिसाल, हर महीने हो रही 50 हजार रुपए की कमाई

बड़वानी की रिंकु ने केले के तने से रेशा बनाकर बदली किस्मत, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से लगाई फाइबर यूनिट

GENERAL newz@gmail.com

Read more