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राजस्थान की ग्रीन हाऊस योजना: 70% तक अनुदान, पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और भुगतान की जानकारी

newz@gmail.com | Sep 29, 2026, 11:10 IST

राजस्थान सरकार की ग्रीन हाऊस योजना में किसानों को 70 प्रतिशत तक अनुदान मिल रहा है। जानिए पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अनुदान भुगतान का तरीका।

ग्रीन हाउस योजना

राजस्थान में खेती अब सिर्फ मौसम के भरोसे नहीं रही। बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और कीटों की मार किसानों को परेशान करती है। ऐसे में संरक्षित खेती (Protected Farming) एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। इसी दिशा में राज्य सरकार ग्रीन हाऊस योजना चला रही है। इस योजना में किसान नियंत्रित माहौल में सब्जी, फूल और फल उगा सकते हैं। सरकार इसके लिए 70 प्रतिशत तक अनुदान देती है।

क्या है ग्रीन हाऊस योजना

ग्रीन हाऊस एक ऐसी संरचना है। इसके अंदर मौसम को काबू में रखा जाता है। इस योजना का मकसद तापमान, नमी और धूप को नियंत्रित करना है। इसी माहौल में उद्यानिकी फसलों की खेती की जाती है।

इससे किसानों को ज्यादा कमाई का मौका मिलता है। ग्रीन हाऊस में फसलें मौसम की मार से सुरक्षित रहती हैं। पूरे साल खेती भी की जा सकती है।

किसे कितना अनुदान मिलेगा

अनुदान की रकम किसान की श्रेणी पर निर्भर करती है। सामान्य श्रेणी के किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है। लघु और सीमांत किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान मिलता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को भी 70 प्रतिशत मिलता है।

अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों के लिए अलग प्रावधान है। उन्हें 25 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान देय है। इसका अंतिम हिसाब कैसे होगा, यह उद्यान विभाग से पूछकर ही तय करें।

अधिकतम क्षेत्र और गणना

अनुदान अधिकतम 4000 वर्गमीटर क्षेत्र के लिए दिया जाता है। इससे बड़े क्षेत्र पर अनुदान नहीं मिलेगा। अनुदान की गणना का तरीका भी तय है। एक तरफ निर्धारित इकाई लागत होती है। दूसरी तरफ विभाग से अनुमोदित फर्मों की दरें होती हैं। इन दोनों में जो रकम कम होगी, उसी पर अनुदान बनेगा।

योजना के लिए पात्रता

योजना का लाभ लेने के लिए दो शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली शर्त यह है कि आवेदक के पास कृषि योग्य जमीन का स्वामित्व हो। दूसरी शर्त सिंचाई स्रोत की है। किसान के पास कुआं, नलकूप या बोरवेल जैसा साधन होना चाहिए।

आवेदन की पूरी प्रक्रिया

आवेदन की प्रक्रिया सरल बताई गई है। किसान को सबसे पहले नजदीकी ई-मित्र केंद्र जाना होगा। वहां राज किसान साथी पोर्टल पर आवेदन होता है। यह आवेदन जन आधार संख्या के जरिए किया जाता है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होंगे। सबसे आखिर में आवेदन जमा करना होगा।

पात्र आवेदनों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होता है। जरूरत पड़ने पर लॉटरी प्रणाली भी अपनाई जाती है। इसलिए किसान को समय पर आवेदन करना चाहिए।

जरूरी दस्तावेजों की सूची

आवेदन के लिए कई दस्तावेज लगते हैं। सबसे पहले जमाबंदी नकल चाहिए। यह छह महीने से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए। पहचान और पते के लिए आधार कार्ड या जनाधार कार्ड लगेगा।

मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट भी जरूरी है। यह रिपोर्ट कृषि विभाग की मान्य प्रयोगशाला से बनवानी होगी। विभाग से अनुमोदित फर्म का कोटेशन भी लगाना होगा।

सिंचाई स्रोत का प्रमाण भी देना होगा। इसके लिए बिजली बिल या पंप सेट से जुड़ा कागज चल सकता है। श्रेणी प्रमाण पत्र भी जरूरी है। यह लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति या जनजाति के किसानों के लिए है।

निर्माण और पैसे का भुगतान

ग्रीन हाऊस बनाने में जल्दबाजी न करें। निर्माण तभी शुरू हो सकता है। इसके लिए उद्यान विभाग की प्रशासनिक स्वीकृति या कार्यादेश जरूरी है। स्वीकृति से पहले कोई भी निर्माण कार्य शुरू न करें। निर्माण पूरा होने पर एक कमेटी सत्यापन करती है। संरचना सही मिलने पर अनुदान जारी किया जाता है।

अनुदान की रकम सीधे किसान के बैंक खाते में जा सकती है। किसान की लिखित सहमति हो तो रकम निर्माता फर्म को भी दी जाती है। भुगतान डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए होता है।

कौन सी फसलें उगा सकते हैं

ग्रीन हाऊस में मुख्य रूप से ऊंची कीमत वाली फसलें उगाई जाती हैं। सब्जियों में टमाटर, शिमला मिर्च और खीरा शामिल हैं। फलों में स्ट्रॉबेरी की खेती की जा सकती है। फूलों में गुलाब और जरबेरा उगाए जाते हैं। इन फसलों की बाजार में लगातार मांग रहती है। इसी वजह से किसानों को स्थायी और अच्छी आय की उम्मीद रहती है।

ग्रीन हाऊस खेती के फायदे

ग्रीन हाऊस से किसानों को कई फायदे मिलते हैं। सबसे बड़ा फायदा है कि मौसम पर निर्भरता घटती है। फसलें गर्मी, ठंड, बारिश और ओलावृष्टि से बची रहती हैं।

पूरे साल खेती संभव होने से बेमौसमी फसलें उगाई जा सकती हैं। इनके बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। नियंत्रित माहौल में कीट और बीमारियों का असर कम रहता है। सिंचाई में पानी की खपत भी कम होती है। फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। इससे निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

कहां करें संपर्क

योजना की और जानकारी के लिए किसान तीन जगह संपर्क कर सकते हैं। ऑनलाइन जानकारी राज किसान साथी पोर्टल पर मिलेगी। नजदीकी ई-मित्र केंद्र भी मदद कर सकता है। अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय में भी पूछताछ की जा सकती है।

योजना चालू वित्तीय वर्ष के लिए मान्य बताई गई है। जिन किसानों के पास जमीन और सिंचाई का साधन है, वे जल्दी तैयारी करें। आवेदन से पहले मिट्टी-पानी की जांच रिपोर्ट बनवा लें। अनुमोदित फर्म का कोटेशन भी तैयार रखें।

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