भोपाल. खेती अब घाटे का सौदा नहीं रहेगी। किसान अब मजदूर नहीं, कंपनी के मालिक बनेंगे। सरकार की FPO योजना ने यह मौका दिया है। FPO का मतलब है किसान उत्पादक संगठन। यह किसानों का अपना समूह है। यह किसानों द्वारा, किसानों के लिए बनाया जाता है। छोटे किसान अब एकजुट होकर बड़ा बिजनेस कर सकते हैं। बिचौलिये खत्म होंगे। मुनाफा सीधे जेब में आएगा।
FPO एक कंपनी की तरह काम करते हैं। यह सहकारी समिति से अलग है और को-ऑपरेटिव एक्ट से प्रभावित नहीं होते। इनमें भी किसी कंपनी के निदेशक मंडल की तरह ही किसानों के समूह के हाथ में प्रबंधन होता है। कम से कम 11 किसानों का समूह एफपीओ चला सकते हैं, लेकिन इसकी प्रभावी सक्रियता के लिए 300 सदस्य होना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सदस्यों की संख्या 100 हो सकती है। आज छोटा किसान अकेला है। उसे खाद महंगी मिलती है। बीज नकली मिलता है। बाजार में सही दाम नहीं मिलता। FPO इस अकेलेपन को खत्म करता है। समूह में ताकत आती है। सौदेबाजी की ताकत बढ़ती है।
FPO कैसे बनाएं ?
FPO बनाना बहुत आसान है। सबसे पहले अपने गांव के 10-11 जागरूक किसानों को जोड़ें। एक साथ बैठकर संगठन का नाम तय करें। इसके बाद दो रास्ते हैं। पहला, ऑनलाइन। आप eNAM की वेबसाइट https://www.enam.gov.in पर जाएं। वहां FPO ऑप्शन पर क्लिक करें। फॉर्म भरें। दस्तावेज अपलोड करें।
दूसरा तरीका ऑफलाइन है। इसके लिए आप कृषि विभाग या कृषि मंडी के नजदीकी कार्यालय में जा सकते हैं। वहां CBBO यानी क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गनाइजेशन आपकी मदद करेंगे। सरकार द्वारा CA और एक्सपर्ट भी नियुक्त किए हैं। वे किसानों को मुफ्त में तकनीकी मदद देते हैं।
ये हैं जरूरी दस्तावेज
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, खसरा-खतौनी और जमीन के कागज, पासपोर्ट साइज फोटो, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और निवास प्रमाण पत्र। पहले से बने FPO में जुड़ने के लिए 500 से 1000 रुपये की सदस्यता फीस लगती है।रजिस्ट्रेशन के बाद ROC यानी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में कंपनी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन होता है। इसके बाद आपको FPO का सर्टिफिकेट मिलता है।
FPO से किसानों को मिलेंगे ये फायदे
FPO यानी फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन के कई फायदे हैं जिनका लाभ सीधे ही सदस्य किसानों को मिलता है। पहला फायदा उन्हें खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि यंत्र की खरीदी के रूप में मिलता है। समूह में खरीदी से उन्हें यह सामान काफी कम कीमत पर मिल जाता है। दूसरा फायदा किसान को फसल को कम कीमत पर मंडी में बेंचने की जरूरत नहीं होती। वे अपनी उपज को इकट्ठा कर सीधे बड़ी कंपनियों से डील कर सकते हैं या eNAM मंडी में बेच सकते हैं।
इसके अलावा भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण का खर्च बंट जाता है। वे नई तकनीक जैसे ग्रीन हाउस, कोल्ड स्टोरेज, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकते हैं। एफपीओ के रूप में किसानों को एक्सपर्ट की सलाह मिलना आसान होता है। जिससे पैदावार बढ़ाकर वे अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं।
सरकार भी दे रही FPO बनाने में मदद
सरकार किसानों को मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत है। इसी के तहत फार्मर प्रोड्यसर ऑर्गनाइजेशन बनाने पर सरकार 15 लाख तक की मदद दे रही है। किसान इसका फायदा उठा सकते हैं। सरकार FPO को लेकर खासी गंभीर है। केंद्र सरकार ने 10,000 FPO बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें महिलाओं की 40 प्रतिशत भागीदारी का भी लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र सरकार ने इस मद में 6865 करोड़ रुपए का बजट रखा है। हर FPO को तीन साल में 15 लाख रुपए तक की इक्विटी ग्रांट देना तय किया गया है। यह पैसा FPO के काम के आंकलन के आधार पर किश्तों में दिया जाता है। दो करोड़ रुपए तक के लोन पर बेहद लो इंटरेस्ट पर क्रेडिट गारंटी भी मिलती है। पांच साल तक सरकार हैंड होल्डिंग सपोर्ट देती है। NABARD इसकी रेटिंग करता है। वहीं SFAC, NABARD और NCDC जैसी संस्थाएं ट्रेनिंग और मार्केटिंग में मदद करती हैं।
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