संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने नया कार्यक्रम घोषित किया है। संगठन तीन अक्टूबर से ग्राम स्तरीय महापंचायतें आयोजित करेगा। यह अभियान देशभर के गांवों में चलाने की योजना है। महापंचायतों का आयोजन 3 से 23 अक्टूबर तक होगा। SKM ने अपने सदस्य संगठनों से अपील की है। संगठनों से गांवों में महापंचायत आयोजित करने को कहा गया है। इन बैठकों में आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। गांवों को संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनाने पर जोर रहेगा।
लखीमपुर खीरी से होगी शुरुआत
SKM के अनुसार अभियान की शुरुआत तीन अक्टूबर से होगी। इस दिन लखीमपुर खीरी में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संगठन इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाता है।
SKM ने 2021 की घटना के मृतकों को श्रद्धांजलि दी। संगठन ने किसान और पत्रकार रमन कश्यप को भी याद किया। SKM के अनुसार उस घटना में चार किसान मारे गए थे। एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।
12 अक्टूबर को करनाल में बैठक
SKM ने 12 अक्टूबर की बैठक को महत्वपूर्ण बताया है। हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
सात प्रमुख मांगों पर भी आगे का कार्यक्रम तय होगा। संगठन ने 26 नवंबर से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। इस तारीख से आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत होगी।
MSP की कानूनी गारंटी की मांग
SKM ने सभी फसलों के लिए खरीद की मांग रखी है। संगठन चाहता है कि खरीद की कानूनी गारंटी मिले। MSP (Minimum Support Price) को C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले पर तय करने की मांग है।
SKM का कहना है कि किसानों को तय मूल्य मिलना चाहिए। संगठन ने इसके लिए कानूनी व्यवस्था की मांग की है। यह मांग लंबे समय से SKM के एजेंडे में रही है।
मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध
SKM ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी विरोध किया है। संगठन ने सभी मुक्त व्यापार समझौते रद्द करने की मांग की है। SKM का कहना है कि ऐसे समझौतों का असर किसानों पर पड़ सकता है। SKM ने ग्रामीण कर्जदारी खत्म करने की मांग भी रखी है। इसके लिए व्यापक कर्जमाफी लागू करने की मांग की गई है। किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग भी है।
SKM ने ऐसे परिवारों के लिए 25 लाख रुपए मांगे हैं। संगठन ने बुजुर्ग किसानों के लिए पेंशन की मांग रखी है। 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए 10,000 रुपए मासिक पेंशन मांगी है। इसमें कृषि श्रमिकों को भी शामिल करने की मांग है। यह SKM की मांग है, लागू योजना की घोषणा नहीं।
बिजली और बीज कानून पर विरोध
SKM ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025 वापस लेने की मांग की है। संगठन ने स्मार्ट मीटर लगाने का भी विरोध किया है। बीज विधेयक 2025 पर रोक लगाने की मांग की गई है।
SKM का कहना है कि किसान हितों की रक्षा जरूरी है। संगठन ने भूमि अधिग्रहण को लेकर भी मांग रखी है। कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग का विरोध किया गया है। किसानों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों की मांग है। वनवासियों के अधिकारों की सुरक्षा की बात भी कही गई है।
मनरेगा को लेकर भी मांगें
इसके अलावा SKM ने चारों श्रम संहिताओं को भी रद्द करने की मांग की है। संगठन ने सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी मांगी है। यह न्यूनतम मजदूरी 42,000 रुपए मासिक करने की मांग है। मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) में 200 दिनों के काम की मांग भी है। SKM ने मजदूरी 700 रुपए प्रतिदिन करने की मांग की है।
संगठन ने कुछ अन्य कानूनों पर भी मांग रखी है। खान और खनिज अधिनियम 2026 को निरस्त करने की मांग है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम 2026 भी वापस लेने की मांग है।
धान खरीद को लेकर अलग मांग
देशभर में धान खरीद की नीति मांगी गई है। संगठन चाहता है कि धान खरीद के लिए व्यापक नीति बने। जीन-संपादित चावल के बीजों की बिक्री रोकने की मांग है। हरियाणा में कंबाइन मशीनों से धान कटाई का मुद्दा भी है। संगठन ने रात में लगी रोक हटाने की मांग की है। इन मुद्दों पर आगे की योजना करनाल बैठक में तय होगी।
CEC को हटाने की मांग
SKM ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी मांग उठाई है। संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी रखी गई है। SKM ने विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन पर आरोप लगाए हैं। इसे SIR (Special Intensive Revision) कहा जाता है। संगठन ने मतदाता हटाने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
SKM का दावा है कि करीब 13 करोड़ मतदाता हटाए गए। संगठन ने इसे चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर आरोप लगाया है। इन आरोपों को SKM के दावे के रूप में समझना जरूरी है।
ग्राम महापंचायत में तीन प्रस्ताव
SKM ने ग्राम महापंचायतों में तीन प्रस्ताव रखने की बात कही है। पहला प्रस्ताव 9 दिसंबर 2021 के लिखित आश्वासन से जुड़ा है। संगठन चाहता है कि उस आश्वासन को लागू किया जाए।
दूसरा प्रस्ताव 736 किसानों के स्मारक से जुड़ा है। SKM आंदोलन में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक चाहता है। संगठन ने सिंघु बॉर्डर पर स्मारक बनाने की मांग की है।
तीसरा प्रस्ताव मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ा है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग शामिल है।
आंदोलन का अगला चरण क्या होगा
तीन अक्टूबर से ग्राम महापंचायतों का कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद 12 अक्टूबर को करनाल में राष्ट्रीय बैठक होगी। इस बैठक में आगे की रणनीति पर फैसला होगा।
SKM ने 26 नवंबर से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। इससे आंदोलन का अगला चरण स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल संगठन ने गांवों में गतिविधियां बढ़ाने की योजना बनाई है।
किसानों के लिए इन मांगों का मतलब
SKM की मांगों में कृषि और ग्रामीण मुद्दे शामिल हैं। इनमें MSP, कर्ज, बिजली और जमीन जैसे विषय हैं। श्रम कानून और मनरेगा भी मांगों में शामिल हैं।
कुछ मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं। कुछ मांगें राज्य स्तर के मुद्दों से भी संबंधित हैं। अलग-अलग मांगों पर सरकारों का जवाब अलग हो सकता है। इसलिए मौजूदा स्थिति समझने के लिए आधिकारिक फैसले जरूरी होंगे।
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