भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में सैकड़ों महिला और पुरुष किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। किसानों ने रैली निकालकर अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद किसानों ने धरना शुरू किया। किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर अलग नजारा देखने को मिला। किसानों ने वहीं चूल्हे जलाकर भोजन बनाना शुरू कर दिया।
कलेक्ट्रेट गेट पर बनी दाल-बाटी
किसानों ने लंबे धरने की तैयारी के साथ भोजन की व्यवस्था की थी। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर कई किसान दाल-बाटी बनाने में जुट गए। कुछ किसान आटा गूंथते नजर आए। कुछ किसान बाटियां तैयार कर रहे थे।
कई किसान लकड़ी और कंडों से चूल्हे जलाकर खाना बनाने की तैयारी करते दिखे। सैकड़ों किसानों के लिए भोजन तैयार किया गया। मालवा की प्रसिद्ध दाल-बाटी इस प्रदर्शन का आकर्षण बनी रही।
फसल नुकसान का मांगा मुआवजा
किसानों की मुख्य मांग प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों का मुआवजा है। किसानों का कहना है कि आगर तहसील के कानड़ और तनोडिया क्षेत्र में फसलों को नुकसान हुआ था। किसानों के अनुसार आंधी, तूफान, बारिश और ओलावृष्टि से कई फसलें प्रभावित हुईं। इसमें संतरा, लहसुन, प्याज और गेहूं जैसी फसलें शामिल हैं।
किसानों का आरोप है कि प्रभावित लोगों को अभी तक आरबीसी 6(4) के तहत सहायता राशि नहीं मिली है। किसान संगठन ने प्रशासन से जल्द मुआवजा देने की मांग की है।
फसल बीमा योजना पर सवाल
किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। किसान संगठन ने खरीफ और रबी फसलों की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। इसमें पटवारी हल्कों की उपज और वास्तविक उत्पादन का विवरण मांगा गया है।
किसानों ने वर्षवार और फसलवार आंकड़े देने की मांग रखी है। इसके अलावा बीमा योजना से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों की जानकारी भी मांगी गई है। किसान जानना चाहते हैं कि कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और उन पर क्या कार्रवाई हुई।
बीमा क्लेम की जानकारी मांगी
किसानों ने बीमा दावों से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। इसमें नुकसान प्रतिशत, क्लेम राशि और सर्वे रिपोर्ट की जानकारी शामिल है। किसान संगठन ने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए सर्वे का विवरण भी मांगा है।
किसानों का कहना है कि बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उनके अनुसार किसानों को अपने दावों की स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए।
तीन दर्जन से ज्यादा मांगें
भारतीय किसान संघ ने प्रशासन के सामने कई मुद्दे रखे हैं। संगठन के अनुसार मांग पत्र में तीन दर्जन से अधिक मांगें शामिल हैं। इनमें फसल राहत, बीमा भुगतान और किसानों से जुड़े अन्य विषय शामिल हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि नुकसान झेलने वाले किसानों को जल्द राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से लंबित मामलों के समाधान की मांग की।
अधिकारियों से चर्चा की मांग
किसानों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए अधिकारी बुलाने की मांग की। इस दौरान किसान नेताओं और अधिकारियों के बीच चर्चा भी हुई। कुछ समय के लिए बहस की स्थिति बनी। इसके बाद भी किसानों ने अपना धरना जारी रखा।
किसान अपनी मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बात कहते रहे। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। धरने के दौरान किसानों ने चूल्हे जलाकर मालवा की प्रसिद्ध दाल-बाटी भी बनाई।
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