आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में खेती से जुड़ी बड़ी परियोजना शुरू हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका शिलान्यास किया। उनके साथ मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब का उद्देश्य रायलसीमा की खेती बदलना है। परियोजना किसानों को बेहतर तकनीक और बाजार उपलब्ध कराएगी। इसी कार्यक्रम में इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की नींव रखी गई। यह संस्थान कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण पर काम करेगा।
किसानों की आय पर जोर
निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों का उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी के स्वदेशी विचार को याद किया। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के नारे का भी जिक्र किया। उनके अनुसार किसानों को विकास के केंद्र में रखना जरूरी है। खेती की मजबूती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलता है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहलों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा को आगे बढ़ाया है। वित्त मंत्री ने पीएम-किसान और किसान क्रेडिट कार्ड गिनाए। उन्होंने जरूरी कृषि सामग्री की उपलब्धता पर भी बात की।
यूरिया पर बड़ी सब्सिडी
निर्मला सीतारमण ने यूरिया की कीमतों का उदाहरण दिया। उन्होंने वैश्विक संघर्षों से बढ़ी लागत की जानकारी दी। उनके अनुसार विदेश में यूरिया बोरी लगभग 3,000 रुपए पहुंची। भारतीय किसानों को यह करीब 300 रुपए में मिली। केंद्र लगभग 2,700 रुपए का भार वहन कर रहा है। यह आंकड़ा वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में बताया।
किसानों के लिए कीमत भाषण में गोल आंकड़े में बताई गई। अधिसूचित खुदरा कीमत बोरी के वजन अनुसार अलग होती है। सरकार का उद्देश्य खाद की उपलब्धता बनाए रखना है। वैश्विक आपूर्ति संकट ने आयात लागत बढ़ाई है। पश्चिम एशिया के तनाव ने परिवहन मार्ग भी प्रभावित किए। इसके बावजूद किसानों को राहत जारी रखने का दावा है।
खेती में नई तकनीक
सरकार जलवायु अनुकूल फसलों को बढ़ावा दे रही है। ऐसी किस्में बदलते मौसम में नुकसान घटा सकती हैं। पीएम-कुसुम योजना से सौर कृषि पंप लगाए जाते हैं। इससे सिंचाई पर किसानों का खर्च कम हो सकता है।
गोवर्धन योजना जैविक कचरे से बायोगैस बनाने में मदद करती है। सरकार मत्स्य पालन और पशुपालन को भी सहायता देती है। कार्यक्रम में फसल बीमा योजनाओं का भी उल्लेख हुआ। बेहतर जल प्रबंधन को परियोजना का अहम हिस्सा बताया गया।
इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर आधुनिक तकनीक पर काम करेगा। यह संस्थान किसानों को वैज्ञानिक तरीके सिखाएगा। स्कूल को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस जैसा विकसित किया जाएगा। रिलायंस इसके विकास में राज्य सरकार का सहयोग करेगी।
एक लाख करोड़ का निवेश
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। अनुमानित निवेश लगभग एक लाख करोड़ रुपए रखा गया है। सरकारी निवेश का प्रस्ताव करीब 40,352 करोड़ रुपए है। निजी क्षेत्र से करीब 60,000 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे।
सरकारी धन सिंचाई बागवानी और सड़कों पर खर्च होगा। लगभग 20,884 करोड़ रुपए सिंचाई के लिए प्रस्तावित हैं। बागवानी विकास पर करीब 15,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ग्रामीण सड़कों के लिए 4,562 करोड़ रुपए रखे गए हैं। बेहतर सड़कें फसल को मंडियों तक जल्दी पहुंचाएंगी। इससे परिवहन नुकसान और भंडारण दबाव कम हो सकता है।
परियोजना का दस जिलों तक विस्तार
परियोजना दस जिलों के 201 क्लस्टरों में लागू होगी। इसके दायरे में 303 मंडल और 5,869 गांव आएंगे। इन जिलों में अनंतपुर और अन्नमय्या शामिल हैं। चित्तूर और कुरनूल भी योजना के दायरे में होंगे।
नंदयाल श्री सत्य साई और तिरुपति शामिल रहेंगे। कडप्पा प्रकाशम और मार्कापुरम भी इससे जुड़ेंगे। परियोजना से लगभग 9.6 लाख किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। उन्हें उत्पादन प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने की योजना है।
बागवानी का मौजूदा क्षेत्र 8.41 लाख हेक्टेयर बताया गया। इसे बढ़ाकर 14.41 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। इस हिसाब से छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र बढ़ाया जाएगा। मूल उपलब्ध विवरण में यह आंकड़ा हेक्टेयर में है।
उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
बागवानी उत्पादन अभी लगभग 222 लाख मीट्रिक टन है। इसे 435 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने की योजना है। परियोजना में शीत भंडार और पैक हाउस बनाए जाएंगे। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विकास पर भी जोर रहेगा। किसान उत्पादक संगठनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
परियोजना विवरण में अतिरिक्त जीवीए का लक्ष्य भी दिया गया। जीवीए (Gross Value Added) आर्थिक योगदान बताने वाला प्रमुख माप है। तीसरे वर्ष से करीब 81,000 करोड़ रुपए बढ़ोतरी का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने व्यापक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य एक लाख करोड़ बताया।
फसलों का दायरा बढ़ेगा
रायलसीमा में आम और केले की खेती पहले होती है। टमाटर और अनार भी यहां की प्रमुख फसलें हैं। नई योजना ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो को बढ़ावा देगी। कीवी स्ट्रॉबेरी और खजूर की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। मुख्यमंत्री नायडू ने सिंचाई को सबसे अहम जरूरत बताया। उनके अनुसार पानी मिलने पर क्षेत्र बड़ी पैदावार दे सकता है।
उन्होंने बेहतर विपणन व्यवस्था की जरूरत भी बताई। केवल उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय सुनिश्चित नहीं होती। भंडारण प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच जरूरी रहती है। परियोजना की सफलता इन्हीं व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगी।
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