किसान की बात,सूत्र के साथ

इथेनॉल ब्लेंडिंग पर गडकरी बोले, किसानों को मिलेगा नया बाजार, गिनाए खेती के फायदे

newz@gmail.com | Oct 2, 2026, 15:45 IST

पटना में बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग को खेती के लिए नया बाजार बताया। उन्होंने इथेनॉल मिले पेट्रोल से वाहनों को नुकसान के दावों को खारिज किया।

बिहार में गडकरी

पटना में आयोजित बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 में इथेनॉल पर बड़ी बात सामने आई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस पर बयान दिया। उन्होंने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को खेती से जोड़कर देखने की बात कही। गडकरी के मुताबिक इसे सिर्फ ईंधन के विकल्प की तरह नहीं देखना चाहिए। उनका कहना है कि यह खेती में विविधता लाने का भी अहम कदम है। उन्होंने वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों को भी खारिज किया।

इथेनॉल से खेती को नया बाजार

गडकरी ने कहा कि इथेनॉल से खेती को नया बाजार मिल रहा है। उनके मुताबिक किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे ऐसी फसलों से भी आय कमा सकते हैं। यहां उन फसलों और कृषि उत्पादों की बात है, जिनसे इथेनॉल बनता है।

उन्होंने कहा कि इससे खेती से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है। किसानों की आय के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। गडकरी के मुताबिक खेती और ऊर्जा क्षेत्र का रिश्ता भी मजबूत हो रहा है।

चार करोड़ कार का किया जिक्र

गडकरी का दावा है कि 2022 से अब तक करीब चार करोड़ कारें चलीं। ये कारें इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चलती हैं। इसके अलावा करीब 20 करोड़ दोपहिया वाहन भी यही पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं।

उनके मुताबिक इतने बड़े इस्तेमाल के बाद भी नुकसान की शिकायत सामने नहीं आई। यह आंकड़ा और दावा गडकरी का है। रिपोर्ट में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

वाहन खराब होने के दावे पर जवाब

गडकरी ने कहा कि किसी वाहन को नुकसान हुआ हो, तो शिकायत करें। यह बात कोई भी व्यक्ति सामने रख सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ खास हितों से जुड़े लोग अलग बातें कर सकते हैं। हालांकि उनके मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग से वाहनों को नुकसान की बात सही नहीं है। यानी उन्होंने इस सवाल पर साफ और सीधा रुख रखा। इस मुद्दे पर रिपोर्ट में किसी दूसरे पक्ष का बयान शामिल नहीं है।

घट सकता है पेट्रोलियम आयात

भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए ईंधन के घरेलू विकल्प की चर्चा अहम हो जाती है। ऐसे में इथेनॉल मिलाने से पेट्रोलियम ईंधन की हिस्सेदारी घटाई जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे विदेशी मुद्रा की बचत की उम्मीद है।

गडकरी के मुताबिक कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी घट सकती है। ऊर्जा सुरक्षा को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ा रही है।

गन्ने से बनता है इथेनॉल

रिपोर्ट के मुताबिक इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनता है। कुछ अन्य कृषि उत्पादों से भी इसका उत्पादन होता है। इसलिए मांग बढ़ने पर कृषि आधारित उद्योगों को फायदा मिल सकता है। गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए भी नए मौके बन सकते हैं। इथेनॉल से जुड़े दूसरे कारोबारों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

बिहार में क्या हैं संभावनाएं

गडकरी ने यह बयान बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 के उद्घाटन सत्र में दिया। कार्यक्रम का शीर्षक बिहार को भारत का उभरता निवेश ठिकाना बताता है। इसमें निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बिहार में भी इथेनॉल उत्पादन की संभावनाएं हैं। वजह यह है कि राज्य की अर्थव्यवस्था बड़े स्तर पर खेती पर टिकी है। इथेनॉल उद्योग बढ़ने से किसानों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।

गडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग को बड़े कृषि विविधीकरण का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक यह सोच खेती को सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रखती। इसमें चीनी उद्योग और दूसरे कारोबार भी जुड़ते हैं।

इथेनॉल नीति पर उठे सवाल

इसी बीच इथेनॉल नीति पर सवाल भी उठे हैं। धान और मक्का का रकबा घटने का मुद्दा भी आया है। उसमें सवाल पूछा गया कि टंकी भरेगी या थाली। यानी बहस सिर्फ फायदे तक सीमित नहीं है। खाद्य फसलों और ईंधन के बीच संतुलन का सवाल भी चर्चा में है। गडकरी के बयान में इस पहलू का जिक्र रिपोर्ट में नहीं मिलता।

आगे किसानों की नजर

गडकरी के मुताबिक किसानों को नए बाजार और कमाई के मौके मिल सकते हैं। अब देखना होगा कि जमीन पर इसका असर कितना दिखता है। किसानों की नजर इसके भाव और खरीद पर भी रहेगी। गडकरी की बात का सार सीधा है। उनके मुताबिक इथेनॉल से खेती, ऊर्जा और वाहन तीनों जुड़े हैं। यह बयान बिहार निवेश सम्मेलन के मंच से आया।

फिलहाल यह बयान एक केंद्रीय मंत्री का दावा और अनुमान है। वाहनों पर असर और किसानों की कमाई, दोनों पर और आंकड़ों का इंतजार रहेगा। इस मुद्दे पर आगे भी बहस जारी रहने के आसार हैं। किसानों, उद्योग और आम वाहन मालिकों, सबकी नजर सरकार की अगली नीति पर रहेगी।

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