महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच केंद्र ने बड़ा कदम उठाया है। जमीनी हालात देखने के लिए एक केंद्रीय टीम बनाई गई है। यह टीम सूखा प्रभावित तालुकाओं का दौरा करेगी। वह फसल नुकसान और किसानों की परेशानी का आकलन करेगी। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इसकी जानकारी दी है।
केंद्र ने क्यों बनाई टीम
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को 265 तालुका सूखा प्रभावित घोषित किए थे। इसके बाद केंद्र ने यह टीम बनाई है। कम बारिश से कई इलाकों में फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है।
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने बताया कि टीम सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी। वह नुकसान और संकट की गंभीरता का जायजा लेगी। टीम राज्य सरकार के साथ तालमेल बनाकर काम करेगी।
265 तालुका का मतलब क्या है
महाराष्ट्र में कुल 358 तालुका हैं। इनमें से 265 तालुका सूखा प्रभावित घोषित हुए हैं। यह संख्या राज्य के करीब 74 फीसदी तालुकाओं के बराबर है। यानी राज्य का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में माना गया है। इसलिए केंद्र की टीम का दौरा किसानों के लिए अहम है। अब सबकी नजर टीम की रिपोर्ट पर टिकी है।
टीम में कौन-कौन होगा
टीम की अगुवाई कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल करेंगे। टीम में केंद्र सरकार के करीब 10 विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधि होंगे। इनमें वित्त और कृषि विभाग भी शामिल हैं। नीति आयोग के प्रतिनिधि भी इस टीम का हिस्सा होंगे। अलग-अलग विभागों के लोग साथ जाने से हालात की तस्वीर पूरी बन सकेगी।
टीम क्या-क्या जांचेगी
टीम सूखे की स्थिति और फसल नुकसान का आकलन करेगी। वह किसानों की समस्याओं पर भी रिपोर्ट तैयार करेगी। आकलन में तुरंत राहत की जरूरतें भी शामिल होंगी।
टीम की रिपोर्ट में तात्कालिक उपायों के साथ दीर्घकालिक पुनर्वास पर भी सुझाव होंगे। यानी सिर्फ फौरी मदद नहीं, आगे की जरूरतों पर भी बात होगी।
रिपोर्ट के बाद क्या होगा
टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों के लिए राहत की सिफारिश होगी। पुनर्वास से जुड़े उपाय भी सुझाए जाएंगे।
टीम आपदा राहत कोष से संभावित सहायता पर भी सुझाव देगी। यह केंद्र और राज्य, दोनों का कोष है। यह कोष किसानों को दी जाने वाली मदद का एक जरिया है।
कृषि मंत्री को क्या उम्मीद
दत्तात्रय भरणे ने उम्मीद जताई। उनके मुताबिक टीम के दौरे से मदद की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही सूखा प्रभावित किसानों को केंद्र से सहायता जल्दी मिल सकेगी।
भरणे ने हाल में दिल्ली की रबी समीक्षा बैठक में मुद्दा उठाया था। वहां उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सूखे की स्थिति बताई। उन्होंने किसानों की परेशानियां भी बताईं।
भरणे के मुताबिक उन्होंने केंद्र से जल्द केंद्रीय टीम भेजने का अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिया था। केंद्र संकट से जूझ रहे किसानों को जरूरी मदद उपलब्ध कराएगा।
मुख्यमंत्री ने मांगी थी मदद
यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। फडणवीस ने केंद्र सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। उन्होंने महाराष्ट्र के लिए NDRF (National Disaster Response Fund) से सहायता मांगी है।
NDRF यानी राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष। अब टीम के जमीनी आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसी से राज्य को मिलने वाली राहत और पुनर्वास सहायता का रास्ता साफ होगा।
शिंदे ने की मोदी से मुलाकात

उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा की। शिंदे के मुताबिक प्रधानमंत्री ने हालात की विस्तार से जानकारी ली।
शिंदे के मुताबिक प्रधानमंत्री ने पानी, चारे और फसल नुकसान की स्थिति पूछी। यह दावा शिंदे के बयान पर आधारित है।
किसानों की मुश्किलें
दूसरी रिपोर्ट्स में सूखे के असर की कई तस्वीरें सामने आई हैं। जालना में सोयाबीन और अंगूर के बागों पर संकट की बात है। अकोला में सोयाबीन और कपास के नुकसान का जायजा लिया गया है।
लातूर में चारे के संकट में किसान मवेशियों के लिए गन्ना काट रहे हैं। यानी सूखे का असर फसल के साथ पशुपालन पर भी पड़ रहा है।
पहले उठाए गए राज्य के कदम
पहले की रिपोर्ट के मुताबिक 19 और तालुकाओं में सर्वे का फैसला हुआ था। इन इलाकों में पांच प्रमुख फसलों का 20 प्रतिशत सर्वे होना था। चारे और पीने के पानी की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए थे।
रिपोर्ट में जबरन कर्ज वसूली न करने का निर्देश भी था। अब टीम के आने से इन इंतजामों की जमीनी हकीकत सामने आ सकती है।
किसान अभी क्या करें
सूखा प्रभावित तालुकाओं के किसान अपने खेत के नुकसान का रिकॉर्ड रखें। फसल की स्थिति की तस्वीरें लेकर रखना भी मददगार हो सकता है। राहत और सर्वे की जानकारी के लिए तालुका के कृषि अधिकारी से संपर्क करें।
अभी राहत की रकम या तारीख की घोषणा नहीं हुई है। टीम की रिपोर्ट के बाद ही सहायता तय होगी। इसलिए किसान सिर्फ आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।
