त्योहारी सीजन से पहले प्याज खरीदने वालों को राहत मिली है। देश के कई हिस्सों में प्याज के दाम नीचे आए हैं। इसकी बड़ी वजह नई खरीफ फसल की आवक है। सरकार भी बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतार रही है। इससे सप्लाई बढ़ी है और भाव पर दबाव बना है। थोक मंडियों में कीमतें घटी हैं। खुदरा बाजार में भी कई शहरों में सस्ता प्याज मिलने लगा है।
प्याज के दाम क्यों गिरे
प्याज के दाम गिरने के पीछे कई कारण एक साथ आए हैं। सबसे बड़ा कारण नई खरीफ फसल की आवक है। खरीफ यानी बारिश के मौसम की फसल। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से नया प्याज बाजार में आने लगा है। आने वाले हफ्तों में यह आवक और बढ़ने की उम्मीद है।
गोदामों में रखा पुराना प्याज भी बाजार में आ रहा है। यानी नए और पुराने, दोनों तरह के प्याज की सप्लाई है। जब सप्लाई बढ़ती है, तब भाव अक्सर नरम पड़ते हैं। तीसरा कारण सरकारी बफर स्टॉक है। यह सरकारी भंडार होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर बाजार में उतारा जाता है। सरकार इसमें से लगातार प्याज भेज रही है।
मंडियों में कितना सस्ता हुआ
थोक बाजार में गिरावट साफ दिख रही है। महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में प्याज का औसत भाव घटा है। यह मंडियों में आई मात्रा के हिसाब से निकाला गया औसत है।
16 सितंबर को यह भाव करीब 4,030 रुपए प्रति क्विंटल था। तीन अक्टूबर तक यह घटकर करीब 3,475 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। यानी भाव में 13 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।
रुपए में देखें तो प्याज करीब 555 रुपए प्रति क्विंटल सस्ता हुआ। यानी थोक भाव करीब 40 रुपए प्रति किलो से घटकर करीब 35 रुपए हुआ। हालांकि अलग अलग मंडियों में भाव एक जैसे नहीं हैं। थोक और खुदरा बाजार के भाव में भी फर्क बना रह सकता है।
खुदरा बाजार में क्या हाल
आम ग्राहक को असली राहत खुदरा बाजार में मिलती है। बीते दो हफ्तों में 126 शहरों में प्याज के खुदरा भाव घटे हैं। कहीं भाव में 1 रुपए प्रति किलो की कमी आई। कहीं यह कमी 21 रुपए प्रति किलो तक रही।
नरमी कई राज्यों में देखी गई है। इनमें तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और ओडिशा शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी भाव नीचे आए हैं। मध्य प्रदेश के ग्राहकों के लिए यह राहत की खबर है। त्योहारों में रसोई का खर्च वैसे ही बढ़ जाता है।
बफर स्टॉक से कितनी सप्लाई
केंद्र सरकार प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय है। अब तक 2 लाख क्विंटल से ज्यादा प्याज 123 शहरों में पहुंचा है। यह प्याज बफर स्टॉक से निकाला गया है। इस सप्लाई के लिए 8 कांदा एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई गईं। इसके अलावा 467 ट्रकों का इस्तेमाल हुआ। कांदा का मतलब प्याज होता है।
सरकार आगे भी रेल रेक की योजना बना रही है। रेक यानी रेल के डिब्बों का पूरा सेट। यह उन बाजारों के लिए है, जहां त्योहारों में खपत ज्यादा रहती है।
रकबे और मौसम का असर
इस बार खरीफ प्याज की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा हुआ बताया गया है। अनुमान है कि यह पिछले साल से करीब 5 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल का क्षेत्र भी पहले से अच्छा था। यानी इस बार पैदावार का आधार और मजबूत है। इससे आगे भी सप्लाई बनी रहने की उम्मीद है।
फसल के लिए हालात भी अनुकूल बताए जा रहे हैं। आईएमडी (India Meteorological Department) ने भारी बारिश का अनुमान नहीं जताया है। यह अनुमान प्रमुख प्याज उगाने वाले इलाकों के लिए है।
यह कटाई के समय बड़ी राहत की बात है। सूखा मौसम रहे तो कटाई और सुखाई आसान होती है। प्याज को मंडी तक ले जाने में भी दिक्कत कम आती है। नमी से प्याज के खराब होने का खतरा भी घटता है। खराब माल कम निकलेगा तो बाजार में अच्छा माल ज्यादा पहुंचेगा।
आगे प्याज के भाव कैसे रहेंगे
सरकार को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में प्याज की उपलब्धता और सुधरेगी। इससे त्योहारी मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। सरकार कीमतों, स्टॉक और मंडियों की आवक पर लगातार नजर रख रही है।
भाव कितना और गिरेगा, यह कई बातों पर निर्भर करेगा। असली आवक कितनी रहती है, यह सबसे अहम है। मांग और स्थानीय बाजार के हालात भी असर डालेंगे।
ग्राहक और किसान के लिए संकेत
ग्राहकों के लिए भाव नरम होना रसोई के बजट में थोड़ी राहत है। लेकिन हर शहर में एक जैसी राहत नहीं मिलेगी। स्थानीय मंडी और दुकानदार के हिसाब से भाव अलग हो सकते हैं।
कीमतों में गिरावट का असर उत्पादकों की कमाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए किसानों के लिए मंडी का ताजा भाव देखना जरूरी है। बिक्री का फैसला उसी के हिसाब से करना समझदारी रहेगी।
फिलहाल तस्वीर साफ है। नई आवक, बफर स्टॉक और अच्छे मौसम ने प्याज का बाजार नरम रखा है। अब देखना है कि त्योहारी मांग में यह नरमी कब तक टिकती है।
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