महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। अमित शाह केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री हैं। बैठक में महाराष्ट्र के गंभीर सूखे पर विस्तार से चर्चा हुई। फडणवीस ने केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने राज्य में पानी की कमी की जानकारी भी दी। महाराष्ट्र के करीब 32 जिलों में गंभीर जल संकट बना हुआ है।
राज्य के 358 में से 265 तालुका प्रभावित घोषित हैं। यह संख्या कुल तालुका की लगभग 74 प्रतिशत है। इसलिए राज्य का करीब तीन-चौथाई हिस्सा सूखे की चपेट में है। कई जगह खरीफ फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने आगामी संकटों की आशंका भी जताई है। आने वाले महीनों में पेयजल की परेशानी बढ़ सकती है। पशुओं के लिए चारे की कमी भी हो सकती है। सरकार ने इन दोनों जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
फडणवीस ने अमित शाह से क्या मांग की
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य का अग्रिम प्रस्ताव अमित शाह को सौंपा। इसमें सूखे और फसल नुकसान की जानकारी शामिल है। राज्य ने केंद्र से अधिकतम संभव सहायता मांगी है। यह सहायता प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए होगी।
फडणवीस के अनुसार अमित शाह ने मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने अधिकतम केंद्रीय सहायता दिलाने का भरोसा दिया। राज्य ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से सहायता मांगी है। इसे NDRF (National Disaster Response Fund) भी कहा जाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्र से मिलने वाली राशि में समय लग सकता है। इसलिए राज्य सरकार इंतजार नहीं करेगी। राज्य अपने संसाधनों से शुरुआती राहत देने की तैयारी करेगी। नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद राशि तय होगी।
केंद्रीय टीम का दौरा
केंद्र ने महाराष्ट्र के लिए अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की है। टीम 8 से 11 अक्टूबर तक राज्य में रहेगी। यह टीम सूखाग्रस्त इलाकों का जमीनी निरीक्षण करेगी। अधिकारी खेतों और जल संकट वाले क्षेत्रों में जाएंगे। टीम में विभिन्न केंद्रीय विभागों के अधिकारी शामिल हैं। कृषि और जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी दौरा करेंगे।
ग्रामीण विकास और पेयजल विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। पशुपालन और वित्त विभाग के अधिकारी स्थिति समझेंगे। टीम तीन समूहों में अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। अधिकारी पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के जिलों में जाएंगे।
विदर्भ के प्रभावित क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद टीम केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट से वास्तविक नुकसान की तस्वीर सामने आएगी। उसी आधार पर केंद्रीय सहायता पर आगे निर्णय होगा।
23 हजार गांवों का सर्वे
महाराष्ट्र सरकार ने फसल नुकसान का सर्वे तेज कर दिया है। करीब 23 हजार गांवों में शुरुआती सर्वे पूरा हुआ है। यह सर्वे कुछ प्रमुख फसलों के नुकसान से जुड़ा है। बाकी फसलों और क्षेत्रों की जांच अभी चल रही है। अधिकारियों को सर्वे तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार वास्तविक नुकसान के आधार पर राहत देना चाहती है।
कई स्थानों पर फसलें पूरी तरह सूख चुकी हैं। कुछ किसानों ने खराब फसलें खेतों से हटा दी हैं। ऐसी फसलों को भी सर्वे में शामिल करने के निर्देश हैं। इससे प्रभावित किसानों का नुकसान दर्ज किया जा सकेगा।
राज्य के सभी प्रभावित गांवों में प्रक्रिया जारी रहेगी। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट राज्य और केंद्र की सहायता तय करने में महत्वपूर्ण होगी। किसानों के बैंक खातों और जमीन का विवरण भी जांचा जाएगा।
किसानों को जल्द राहत
मुख्यमंत्री ने किसानों को जल्द आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिया है। राज्य इसके लिए केंद्रीय राशि का इंतजार नहीं करेगा। पहले राज्य के उपलब्ध संसाधनों से राहत देने की योजना है। बाद में केंद्रीय सहायता मिलने पर राशि समायोजित हो सकती है। सरकार फसल नुकसान का सही आकलन पूरा करना चाहती है। इसके बाद प्रभावित किसानों की सूची तैयार की जाएगी।
राहत सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने की तैयारी होगी। इससे बिचौलियों और गलत भुगतान की गुंजाइश कम होगी। सरकार ने जिला अधिकारियों को तेजी से काम करने को कहा है। हर प्रभावित किसान का नुकसान दर्ज करने के निर्देश हैं। फडणवीस ने कहा कि किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। सरकार मुश्किल समय में उनके साथ खड़ी रहेगी।
सूखा पहले घोषित हुआ
महाराष्ट्र में सूखे की घोषणा आमतौर पर बाद में होती थी। यह प्रक्रिया नवंबर या दिसंबर तक पूरी होती थी। इस बार सरकार ने सितंबर के अंत में घोषणा कर दी। राज्य के 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए। यह फैसला कम बारिश और लंबे शुष्क दौर के बाद हुआ। कई क्षेत्रों में 21 दिनों से अधिक सूखा दौर रहा।
बारिश की कमी से खरीफ फसलों की बढ़त रुक गई। मिट्टी में जरूरी नमी भी तेजी से घट गई। जलाशयों और स्थानीय जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने लगा है। गांवों में पेयजल योजना बनाने की जरूरत भी बढ़ी है। जल्द घोषणा से राहत उपाय पहले शुरू हो सकते हैं। नुकसान का सर्वे भी सामान्य समय से पहले शुरू हुआ।
राहत में क्या मिल सकता है
सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए कई राहत उपाय घोषित किए गए हैं। इनमें फसल ऋण का पुनर्गठन शामिल है। कृषि ऋण की वसूली कुछ समय के लिए टल सकती है। भूमि राजस्व में भी किसानों को राहत मिल सकती है।
कृषि पंपों के बिजली बिल पर रियायत का प्रावधान है। जरूरत वाले गांवों में पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था भी की जाएगी। ग्रामीण रोजगार योजना के नियमों में राहत मिल सकती है। प्रभावित विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट मिल सकती है। इन उपायों का लाभ तय नियमों के अनुसार मिलेगा।
आर्थिक मुआवजे के लिए अलग सरकारी आदेश जारी होगा। यह आदेश नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद आएगा। किसानों को संबंधित जिला प्रशासन की सूचना देखते रहना चाहिए। अपुष्ट संदेशों के आधार पर आवेदन नहीं करना चाहिए।
शिवराज सिंह ने लिया अपडेट
फडणवीस ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका बताई। उनके मुताबिक कृषि मंत्री ने व्यक्तिगत संपर्क किया था। उन्होंने महाराष्ट्र की सूखा स्थिति की जानकारी ली। केंद्र से जरूरी सहायता दिलाने का भरोसा भी दिया।
कृषि मंत्रालय ने अंतरिम रिपोर्ट भेजने की अनुमति दी। इससे अंतिम रिपोर्ट का इंतजार जरूरी नहीं रहा। अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय टीम भेजी जा सकती है। बाद में अंतिम आंकड़ों के अनुसार रिपोर्ट बदली जा सकेगी। इस व्यवस्था से निरीक्षण प्रक्रिया जल्दी शुरू हुई। राहत प्रस्ताव पर विचार भी पहले शुरू हो सकता है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने जल उपलब्धता पर योजना बनाने को कहा। मिट्टी की नमी भी योजना का आधार बनेगी। बारानी और सिंचित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति जरूरी होगी। इससे अगली फसल की तैयारी बेहतर हो सकती है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय टीम पहले प्रभावित इलाकों का निरीक्षण पूरा करेगी। टीम फसल और पानी की स्थिति दर्ज करेगी। वह किसानों और स्थानीय अधिकारियों से जानकारी भी ले सकती है। जिला प्रशासन टीम को जरूरी आंकड़े उपलब्ध कराएगा।
इसके बाद केंद्रीय टीम अपनी आकलन रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट में नुकसान और जरूरी राहत का अनुमान होगा। केंद्र सरकार इस रिपोर्ट और राज्य के प्रस्ताव पर विचार करेगी। इसके बाद सहायता राशि पर फैसला लिया जा सकता है।
इसी दौरान राज्य सरकार अपना सर्वे पूरा करेगी। पात्र किसानों की सूची और नुकसान का विवरण तैयार होगा। सबसे बड़ी चुनौती राहत को समय पर पहुंचाना है। गलत सर्वे से जरूरतमंद किसान सहायता से वंचित हो सकते हैं। पारदर्शी सर्वे और सार्वजनिक जानकारी से भरोसा बढ़ेगा। राहत वितरण की नियमित निगरानी भी जरूरी होगी।
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