किसान की बात,सूत्र के साथ

अब महाराष्ट्र के भंडारा में किसान की मौत, सूखे में धान की फसल हो चुकी थी बर्बाद, कुछ दिन पहले ही मंत्री को बताई थी पीड़ा

newz@gmail.com | Oct 9, 2026, 18:08 IST

भंडारा के धोप गांव में 55 साल के किसान राजेंद्र सपाटे की मौत हुई है। पुलिस ने इसे दुर्घटनावश मौत दर्ज किया है और जांच जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक सूखे में उनकी धान की फसल खराब हो गई थी।

किसान की मौत

महाराष्ट्र के भंडारा जिले से एक दुखद खबर आई है। मोहाड़ी क्षेत्र के धोप गांव के किसान राजेंद्र सपाटे की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक उनकी धान की फसल सूखे में बर्बाद हो चुकी थी। मामले की जांच जारी है और पुलिस ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं बताया।

क्या है पूरा घटनाक्रम

मिली जानकारी के मुताबिक राजेंद्र सपाटे की उम्र 55 साल थी। गुरुवार सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच उनकी मौत हुई। मामला अंधलगांव पुलिस थाने में दर्ज हुआ है। पुलिस ने इसे दुर्घटनावश मौत के रूप में दर्ज किया है।

पुलिस के मुताबिक परिवार ने किसी तरह का संदेह नहीं जताया। परिवार शिकायत दर्ज कराना भी नहीं चाहता। जांच अभी चल रही है। मौत के हालात पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।

धान की फसल और सिंचाई की चिंता

पुलिस के मुताबिक बारिश की कमी से सपाटे की धान फसल खराब हुई थी। धान की फसल को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सिंचाई का इंतजाम न हो, तो सूखे में फसल बचाना मुश्किल होता है।

सपाटे ने कहा था कि सिंचाई बिना खेती मुश्किल है। उन्होंने सिंचाई सुविधा के लिए कई बार आवेदन और शिकायत की थी। रिपोर्ट में दावा है कि उन्हें ठोस मदद नहीं मिली। यह भी बताया गया है कि उनके आवेदन और फाइलें लंबित हैं। इस दावे पर प्रशासन का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है। किसी कर्ज या कर्ज के दबाव का भी जिक्र नहीं है।

मंत्री से हुई थी मुलाकात

बताया जा रहा है कि भंडारा के पालक मंत्री पंकज भोयर तीन अक्टूबर को आए थे। वे जिले में सूखे का जायजा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान सपाटे ने अपनी परेशानी मंत्री को बताई। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी घूमा। मंत्री ने किसान की बात सुनी। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने जरूरी कदम उठाने का भरोसा भी दिया था।

महाराष्ट्र में 265 तालुका सूखाग्रस्त

राज्य सरकार ने 26 सितंबर को सूखे की घोषणा की थी। राज्य के 358 में से 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित हुए। यह करीब 74 फीसदी इलाका है। ये तालुका 32 जिलों में फैले हैं।

सूखे की घोषणा सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के आधार पर हुई। यह संहिता 2020 में अपडेट हुई थी। जून से 18 सितंबर तक राज्य में 755.9 मिलीमीटर बारिश हुई। औसत बारिश 932.3 मिलीमीटर रहती है। यानी करीब 18.8 फीसदी कमी रही।

सरकार ने राहत के कई कदम भी बताए हैं। इनमें भू-राजस्व में रियायत और फसल कर्ज का पुनर्गठन शामिल है। खेती से जुड़े कर्ज की वसूली टालने की बात भी है। 7.5 हॉर्सपावर से ऊपर के कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत मिलेगी।

प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकर चलेंगे। पशुओं के लिए चारे का इंतजाम होगा। किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए अनाज की व्यवस्था की बात है। मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) के नियमों में ढील देकर ज्यादा काम देने का भी प्रावधान है।

सरकार ने अभी आर्थिक सहायता की कोई रकम तय नहीं की है। फसल नुकसान के मुआवजे पर अलग सरकारी आदेश आएगा। यह आदेश तय प्रक्रिया के बाद जारी होगा।

केंद्र सरकार से मदद की मांग

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सात अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (National Disaster Response Fund) से ज्यादा से ज्यादा मदद मांगी। राज्य ने राहत के लिए एक ज्ञापन भी सौंपा।

फडणवीस के मुताबिक शाह ने केंद्र की ओर से पूरी मदद का भरोसा दिया। केंद्र की एक टीम 8 से 11 अक्टूबर तक महाराष्ट्र का दौरा करेगी। यह टीम हालात और नुकसान का आकलन करेगी।

राहत मंत्री मकरंद पाटिल ने बताया कि 65.26 लाख हेक्टेयर का आकलन हुआ है। यह राज्य के कुल खेती वाले रकबे का करीब 45 फीसदी है। राज्य में कुल 1.49 करोड़ हेक्टेयर में खेती होती है। बाकी आकलन 12 अक्टूबर तक पूरा होना है।

संकट के समय किसान क्या करें

सूखे में फसल नुकसान की जानकारी अपने तालुका के कृषि कार्यालय को दें। पंचनामे यानी फसल नुकसान के सर्वे के बारे में पूछते रहें। फसल बीमा लिया है, तो बीमा कंपनी या बैंक से भी संपर्क करें।

सिंचाई या मदद के आवेदन की रसीद संभालकर रखें। आवेदन की स्थिति के बारे में तहसील कार्यालय से पूछते रहें। लंबित फाइल हो, तो जिला कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दें।

खेती का संकट कई बार मन पर भारी पड़ता है। अगर आप या कोई परिचित बहुत तनाव में है, तो अकेला न रहें। परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। टेली-मानस (Tele-MANAS) हेल्पलाइन 14416 पर मुफ्त और गोपनीय सलाह मिल सकती है। यह सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध है।

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