खेती में पानी की कमी हर किसान की बड़ी चिंता है। ग्राम छैगांवदेवी के किसान लवकुश पटेल ने इसका रास्ता निकाला है। उन्होंने अपने खेत में स्प्रिंकलर सिस्टम लगवाया। यह सिस्टम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की मदद से मिला। अब वे कम समय में ज्यादा खेत सींच पा रहे हैं।
सूक्ष्म सिंचाई से बदली खेती
लवकुश पटेल के पास तीन हेक्टेयर जमीन है। वे सोयाबीन, प्याज, मिर्ची, चना और गेहूं की खेती करते हैं। यानी उनके खेत में खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसलें हैं।
पहले वे पारंपरिक तरीके से सिंचाई करते थे। इसमें पानी ज्यादा लगता था। समय और मेहनत भी ज्यादा जाती थी। उनके मुताबिक अब सिंचाई का काम पहले से सुविधाजनक और व्यवस्थित हो गया है।
किसान की पुरानी परेशानी
पटेल बताते हैं कि पानी सीमित था। इस कारण समय पर पूरी सिंचाई करना मुश्किल होता था। पारंपरिक तरीके में किसान को खेत में काफी देर रुकना पड़ता था।
फसलों को सही वक्त पर पानी न मिले, तो उपज पर असर पड़ता है। प्याज और मिर्ची जैसी फसलों में यह दिक्कत और बढ़ जाती है। इसलिए नियंत्रित सिंचाई का तरीका उन्हें काम का लगा।
योजना से कैसे मिली मदद
पटेल ने बताया कि कृषि विभाग से उन्हें योजना की जानकारी मिली। यह जानकारी सूक्ष्म सिंचाई और स्प्रिंकलर प्रणाली को लेकर थी। इसके बाद उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत आवेदन किया।
योजना के जरिए 3 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम मिला। यह सिस्टम कृषि विभाग ने उपलब्ध कराया। इस तरह किसान को बाजार में खुद भटकने की जरूरत नहीं पड़ी।
लागत और अनुदान का हिसाब
स्प्रिंकलर सिस्टम की कुल लागत 55,680 रुपए थी। इसमें सरकार ने 21,051 रुपए का अनुदान दिया। यानी करीब 38 फीसदी लागत सरकारी मदद से पूरी हुई। बाकी रकम किसान को देनी पड़ी। हिसाब लगाएं तो यह 34,629 रुपए बैठती है। यानी किसान ने अपनी जेब से इतना खर्च किया।
अनुदान की रकम हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होती। यह सिस्टम की लागत और योजना के नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए अपने जिले के कृषि कार्यालय से पूरा हिसाब पूछ लें।
सिंचाई में कितना फायदा
पटेल के मुताबिक स्प्रिंकलर लगने के बाद ज्यादा क्षेत्र जल्दी सिंच रहा है। पहले सिंचाई के दौरान खेत में काफी समय देना पड़ता था। अब यह काम आसान हो गया है। उनका कहना है कि मेहनत और समय की बचत हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि सिंचाई समान और नियंत्रित हो रही है। इससे फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी मिल रहा है। उनके मुताबिक फसल की बढ़वार और विकास पर भी अच्छा असर दिखा है।
पानी की बचत का कोई आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। उपज कितनी बढ़ी, यह भी नहीं बताया गया। इसलिए ये फायदे किसान का अपना अनुभव हैं।
क्या है सूक्ष्म सिंचाई योजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का मकसद खेत तक पानी पहुंचाना है। इसमें पानी का सही इस्तेमाल करने पर भी जोर रहता है। इसके तहत सूक्ष्म सिंचाई योजना चलती है।
सूक्ष्म सिंचाई में स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसे तरीके आते हैं। स्प्रिंकलर पाइप और नोजल से बारिश की तरह पानी छिड़कता है। ड्रिप सिस्टम पौधों की जड़ों के पास बूंद-बूंद पानी देता है।
इन तरीकों में खेत में पानी भरने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए आम तौर पर पानी कम खर्च होता है। यह सामान्य जानकारी है, किसी खास खेत का आंकड़ा नहीं।
किसान ने जताया आभार
पटेल ने योजना के तहत मिली सब्सिडी के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने में मदद मिलती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का धन्यवाद किया।
अन्य किसान क्या करें
जो किसान सिंचाई सुधारना चाहते हैं, वे सबसे पहले कृषि विभाग से संपर्क करें। विभाग से योजना की पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया पूछ लें। जरूरी कागज की सूची भी पहले ले लें।
स्प्रिंकलर लगवाने से पहले अपनी फसल और खेत का आकार देखें। सिस्टम की लागत, अनुदान और अपनी हिस्सेदारी लिखित में समझ लें। ये सामान्य सलाह है। सिस्टम लगने के बाद उसकी देखभाल भी जरूरी है। पाइप और नोजल की नियमित सफाई करें। तेज हवा में स्प्रिंकलर चलाने से बचें। इससे पानी खेत में बराबर नहीं पहुंचता।
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