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सीजी में गन्ना खरीदी दर बढ़कर 425 रुपए, पुराने सीजन का भी मिलेगा लाभ, किसानों को राहत

newz@gmail.com | Oct 12, 2026, 20:13 IST

छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने की खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपए प्रति क्विंटल कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुराने पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए गन्ने पर भी बढ़ी दर से भुगतान करने का फैसला लिया है।

गन्ने की खरीदी

छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों के लिए अहम फैसला लिया गया है। राज्य में गन्ने की खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपए प्रति क्विंटल कर दी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय को मंजूरी दी है। इसका लाभ पुराने पेराई सत्र के किसानों को भी मिलेगा।

सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए गन्ने पर भी बढ़ी दर से भुगतान करने का फैसला किया है। इससे संबंधित किसानों को बढ़ी हुई दर के अनुसार अतिरिक्त भुगतान मिलने का रास्ता खुलेगा। हालांकि, प्रति किसान कितनी अतिरिक्त राशि मिलेगी, यह खरीदे गए गन्ने की मात्रा और पहले किए गए भुगतान पर निर्भर करेगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब किसानों के लिए खेती की लागत महत्वपूर्ण मुद्दा है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च बढ़ने से खेती का हिसाब प्रभावित होता है। ऐसे में गन्ने की बेहतर खरीदी दर किसानों की आमदनी को सहारा दे सकती है।

कैसे हुआ खरीदी दर बढ़ाने का फैसला?

मुख्यमंत्री साय से भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी। इस दौरान किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। गन्ना उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य देने की मांग भी उठाई गई।

प्रतिनिधिमंडल में संगठन मंत्री मनीष शर्मा और महामंत्री नवीन शेष सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इस मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी मौजूद रहे। किसानों की मांग और उनके हितों पर चर्चा के बाद खरीदी दर बढ़ाने का फैसला लिया गया।

सरकार ने केवल आगामी खरीदी दर बढ़ाने तक फैसला सीमित नहीं रखा। पेराई सत्र 2025-26 में पहले खरीदे गए गन्ने के भुगतान को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे पुराने सीजन में गन्ना बेच चुके किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

425 रुपए प्रति क्विंटल का क्या मतलब?

नई दर के अनुसार, एक क्विंटल गन्ने की खरीदी 425 रुपए में होगी। क्विंटल वजन की एक इकाई है, जो 100 किलोग्राम के बराबर होती है। इससे किसान अपनी उपज की कुल कीमत का अनुमान लगा सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान 100 क्विंटल गन्ना बेचता है, तो 425 रुपए की दर से कुल कीमत 42,500 रुपए होगी। यह गणना केवल नई दर के आधार पर है। इसमें पहले से किए गए भुगतान, कटौती या अन्य लागू शर्तों का हिसाब शामिल नहीं है।

इसी तरह 200 क्विंटल गन्ने की कुल कीमत नई दर पर 85,000 रुपए होगी। वास्तविक भुगतान खरीदी गई मात्रा और संबंधित भुगतान नियमों के अनुसार होगा। किसानों को अपनी पर्ची और भुगतान रिकॉर्ड से राशि का मिलान करना चाहिए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खरीदी दर और शुद्ध मुनाफा अलग-अलग हैं। किसान की आमदनी से खेती की लागत घटाने के बाद वास्तविक लाभ निकलता है। इसलिए बेहतर दर से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन कुल मुनाफा उत्पादन और लागत पर भी निर्भर करेगा।

पुराने सीजन के किसानों को क्या लाभ?

इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू पुराने पेराई सत्र को शामिल करना है। सरकार ने 2025-26 में खरीदे गए गन्ने पर भी बढ़ी दर के अनुसार भुगतान करने का निर्णय लिया है। इससे उस अवधि में गन्ना बेचने वाले किसानों को भी फायदा मिल सकता है।

जिन किसानों ने पिछले सत्र में गन्ना बेचा था, उनके लिए भुगतान का रिकॉर्ड अहम रहेगा। खरीदी की मात्रा और पहले मिल चुकी रकम से अतिरिक्त भुगतान की गणना की जा सकेगी। किसानों को अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अतिरिक्त भुगतान की कुल राशि या भुगतान की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। इसलिए हर किसान के खाते में आने वाली रकम का अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता। संबंधित सहकारी शक्कर कारखाने या विभाग से भुगतान की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

पुराने सीजन पर बढ़ी दर लागू करने से किसानों को उनकी पिछली उपज के लिए भी बेहतर मूल्य मिलने का अवसर बनता है। यह फैसला किसानों की आमदनी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

सरकार ने आय बढ़ाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। खेती को लाभकारी बनाना और किसान परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी सरकार के लक्ष्य हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि लागत घटाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।

गन्ने की खरीदी दर बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है। गन्ना उत्पादक किसानों की आय बेहतर होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल सकता है। खेती पर होने वाला खर्च गांवों में रोजगार और व्यापार से भी जुड़ा रहता है।

हालांकि, खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए सिर्फ खरीदी दर बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। समय पर भुगतान, उत्पादन लागत और कारखानों की खरीदी व्यवस्था भी अहम हैं। किसानों के लिए इन सभी पहलुओं का बेहतर होना जरूरी है।

भारतीय किसान संघ ने जताया आभार

गन्ना किसानों के हित में लिए गए फैसले पर भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि खरीदी दर बढ़ने से गन्ना उत्पादकों को लाभ मिलेगा। इससे उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

किसान संगठनों की भूमिका खेती से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है। खरीदी दर, भुगतान और उत्पादन लागत जैसे विषय किसानों की आमदनी पर सीधा असर डालते हैं। इस मुलाकात में गन्ना किसानों के हितों को प्रमुखता से उठाया गया।

अब इस फैसले का लाभ किसानों तक पहुंचना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए बढ़ी दर के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। पुराने सीजन के भुगतान का हिसाब भी किसानों को समझ में आना चाहिए।

गन्ना किसानों को अब क्या करना चाहिए?

गन्ना किसानों को अपनी खरीदी पर्ची और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड संभालकर रखने चाहिए। पुराने सीजन में बेचे गए गन्ने की मात्रा और प्राप्त भुगतान का मिलान करना उपयोगी रहेगा। इससे बढ़ी दर के अनुसार मिलने वाली अतिरिक्त राशि की जानकारी मिल सकती है।

यदि भुगतान की राशि स्पष्ट नहीं है, तो किसान संबंधित शक्कर कारखाने या विभाग से संपर्क कर सकते हैं। उन्हें यह भी पता करना चाहिए कि अतिरिक्त भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इससे किसी भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

नई दर किसानों के लिए बेहतर मूल्य की संभावना लेकर आई है। पुराने सीजन को शामिल करने से इसका दायरा भी बढ़ा है। अब किसानों की नजर भुगतान की प्रक्रिया और अतिरिक्त राशि मिलने पर रहेगी।

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