छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की बोनी लगभग पूरी हो गई है। छह अक्टूबर तक 48.62 लाख हेक्टेयर में फसलें बोई गईं। सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर बोनी का लक्ष्य रखा था। उपलब्धि लक्ष्य के करीब 99.86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसलिए इसे लगभग शत-प्रतिशत बोनी माना गया है।
लक्ष्य से केवल 0.07 लाख हेक्टेयर रकबा कम है। यह अंतर करीब सात हजार हेक्टेयर के बराबर है। कृषि विभाग के अनुसार शुरुआती खेती कार्य अंतिम चरण में है। मानसून आने के साथ किसानों ने खेत तैयार करना शुरू किया था। अब ज्यादातर क्षेत्रों में बोनी का काम पूरा हो चुका है।
कौन सी फसलें बोई गईं
प्रदेश में धान सबसे प्रमुख खरीफ फसल बनी हुई है। इसके अलावा मक्का और मोटे अनाज भी बोए गए हैं। किसानों ने कोदो और कुटकी की बोनी भी की है। इन फसलों का आदिवासी क्षेत्रों में विशेष महत्व रहता है। ये कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। दलहन में अरहर और मूंग की बोनी हुई है। तिलहन में मूंगफली और रामतिल को शामिल किया गया है।
प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में फसलों का रकबा अलग रहता है। इसका निर्धारण स्थानीय बारिश और मिट्टी से होता है। सिंचाई उपलब्धता भी किसानों के फसल चयन को प्रभावित करती है। अब किसानों का ध्यान फसल देखभाल पर रहेगा। कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन अगले महत्वपूर्ण काम होंगे।
13.40 लाख टन खाद बांटी
राज्य में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य है। इसके मुकाबले 18.02 लाख मीट्रिक टन खाद भंडारित हुई। यह भंडारण सहकारी और निजी क्षेत्रों में किया गया है। निर्धारित लक्ष्य से भंडारित मात्रा 2.47 लाख टन अधिक है।
किसानों को अब तक 13.40 लाख मीट्रिक टन खाद मिली है। यह वितरण लक्ष्य का करीब 86 प्रतिशत हिस्सा है। भंडारित मात्रा और वितरण के बीच 4.62 लाख टन अंतर है। यह आंकड़ा उपलब्ध सरकारी जानकारी की गणना पर आधारित है। जिलों में वास्तविक स्टॉक की स्थिति अलग हो सकती है।
खाद उपलब्ध होना खेती के लिए बेहद जरूरी है। समय पर वितरण नहीं होने से फसल की बढ़वार प्रभावित होती है। इसलिए स्थानीय सोसायटियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
बीज वितरण कितना हुआ
छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम ने प्रमाणित बीज का लक्ष्य तय किया था। यह लक्ष्य 4.95 लाख क्विंटल रखा गया है। इसके मुकाबले 4.80 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज भंडारित किया गया। किसानों को 4.62 लाख क्विंटल बीज वितरित हो चुका है। भंडारण के मुकाबले बीज वितरण करीब 96 प्रतिशत रहा है। वहीं वितरण लक्ष्य की तुलना में करीब 93 प्रतिशत है।
प्रमाणित बीज किसानों के उत्पादन जोखिम को कम कर सकता है। इसकी अंकुरण क्षमता तय मानकों के अनुसार जांची जाती है। शुद्ध किस्म मिलने से फसल प्रबंधन भी आसान होता है। किसान को सही समय पर बीज मिलना जरूरी रहता है। देरी होने पर बोनी का बेहतर समय निकल सकता है।
बारिश ने दिया साथ
छत्तीसगढ़ में छह अक्टूबर सुबह तक 1,155.2 मिलीमीटर औसत वर्षा हुई। प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1,246.3 मिलीमीटर बताई गई है। पिछले दस वर्षों में समान अवधि का औसत 1,139.9 मिलीमीटर रहा। इस बार बारिश उस औसत से 15.3 मिलीमीटर अधिक है। बेहतर बारिश से बोनी का रकबा बढ़ाने में मदद मिली। कई क्षेत्रों में खेतों को पर्याप्त नमी भी मिली है।
हर जिले में बारिश का वितरण समान होना जरूरी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश से नुकसान भी हो सकता है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। अब बारिश की मात्रा से ज्यादा उसका समय महत्वपूर्ण रहेगा। कटाई से पहले तेज बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
कृषि ऋण में बढ़ोतरी
किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण दिया गया है। पांच अक्टूबर तक 8,178.54 करोड़ रुपए वितरित हुए हैं। पिछले वर्ष समान अवधि में 6,938.10 करोड़ रुपए बांटे गए थे। इस बार वितरण 1,240.44 करोड़ रुपए अधिक रहा है।
सरकार ने 8,800 करोड़ रुपए कृषि ऋण का लक्ष्य रखा है। अब तक लक्ष्य का लगभग 93 प्रतिशत ऋण वितरित हुआ है। अल्पकालीन कृषि ऋण से किसान जरूरी सामान खरीद सकते हैं। इसमें बीज, खाद और कीटनाशक जैसी जरूरतें शामिल हैं। इससे किसानों की नकद पूंजी पर दबाव कम होता है। समय पर ऋण मिलने से साहूकारों पर निर्भरता घट सकती है। किसान को ऋण की शर्तें समझना भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों की मांग के अनुसार वितरण करने को कहा है। सोसायटियों में पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी करने को भी कहा गया है। लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश हैं। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग निगरानी कर रहा है। अधिकारियों को स्टॉक और वितरण का नियमित मिलान करना होगा। कागजी भंडार और वास्तविक उपलब्धता समान होना जरूरी है। किसानों की शिकायतों का समय पर समाधान भी होना चाहिए।
अब किसानों के लिए क्या अहम
बोनी पूरी होने के बाद फसल सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण काम है। किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी होगी। पानी भरने वाले खेतों में निकासी की व्यवस्था जरूरी है। दलहन और तिलहन फसलों में जलभराव नुकसान कर सकता है।
कीट या बीमारी दिखने पर कृषि अधिकारियों से सलाह लेनी चाहिए। बिना सलाह कीटनाशक इस्तेमाल करने से लागत बढ़ सकती है। खाद का उपयोग मिट्टी और फसल की जरूरत अनुसार होना चाहिए। ज्यादा खाद से उत्पादन बढ़ना हमेशा जरूरी नहीं है। इससे मिट्टी और पानी की सेहत प्रभावित हो सकती है।
आने वाले महीनों में मौसम भी उत्पादन तय करेगा। समय पर सलाह और सरकारी सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
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