छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कुछ किसान धान छोड़कर सन की खेती कर रहे हैं। लैलूंगा ब्लॉक के सुखदेव सिदार और चंद्रशेखर पटेल ने सन बोया है। वे बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत उपज बीज निगम को बेच सकेंगे। कृषक उन्नति योजना में धान छोड़ने पर 15,000 रुपए प्रति एकड़ मिलते हैं।
धान छोड़ सन की ओर किसान
रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक में यह बदलाव दिख रहा है। यहां के किसान धान का रकबा घटा रहे हैं। उसकी जगह सन की खेती शुरू की गई है। यह खेती बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत हो रही है। यानी किसान सन को बीज के रूप में बेच सकेंगे। उपज बीज निगम को दी जा सकती है।
कौन हैं ये किसान
केंदाटिकरा गांव के सुखदेव सिदार इस बदलाव में शामिल हैं। लैलूंगा गांव के चंद्रशेखर पटेल भी इसमें हैं। दोनों किसानों ने टिकरा जमीन पर सन बोया है। टिकरा यानी ऊंची और पथरीली जमीन। ऐसी जमीन पर पानी जल्दी बह जाता है या सूख जाता है। इसलिए यहां धान की खेती में जोखिम ज्यादा रहता है। दोनों किसान धान का रकबा घटा रहे हैं।
बदलाव की वजह क्या है
जिला प्रशासन के मुताबिक इस बदलाव के तीन मकसद हैं। पहला, कम पानी वाली जमीन का बेहतर उपयोग करना। दूसरा, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना। तीसरा, मिट्टी और पानी के हिसाब से खेती करना। धान की खेती में आम तौर पर पानी ज्यादा लगता है। जहां सिंचाई का साधन कम है, वहां यह महंगा सौदा बन सकता है। यह सामान्य जानकारी है।
सन की खेती क्यों खास
सन के रेशे से रस्सी बनाई जाती है। इसका उपयोग बोरी और खाट की बुनाई में होता है। यानी इसकी बाजार में अपनी जगह है। सन हरी खाद के रूप में भी काम आता है। हरी फसल को खेत में जोतने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है। इससे रासायनिक खाद की जरूरत घट सकती है।
इस बार किसान इसे बीज उत्पादन के लिए उगा रहे हैं। यहां कमाई का गणित अलग है। उपज सीधे बीज निगम को देने का विकल्प मिलता है।
बीज उत्पादन से कमाई की उम्मीद
बीज उत्पादन में कमाई दाम और खरीद की शर्तों पर निर्भर करती है। इस मामले में खरीद का दाम नहीं बताया गया। उत्पादन का अनुमान भी सामने नहीं आया। इसलिए कमाई कितनी होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। किसानों को पहले खरीद की शर्तें लिखित में समझनी चाहिए। भुगतान कब और कैसे होगा, यह भी पूछ लें।
कृषक उन्नति योजना में क्या
छत्तीसगढ़ सरकार की कृषक उन्नति योजना का मकसद धान पर निर्भरता घटाना है। योजना के संशोधित रूप में 15,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता है। यह उन किसानों के लिए है जो धान की जगह दूसरी फसल उगाते हैं।
योजना खरीफ 2026 के सीजन से लागू है। इसमें दलहन, तिलहन, मक्का और रागी शामिल हैं। कोदो-कुटकी और कपास भी सूची में हैं। सरकार का मकसद पानी बचाना और मिट्टी सुधारना भी है।
पिछले साल इसी योजना में 10,000 रुपए प्रति एकड़ तय हुए थे। पिछले साल एमएसपी पर धान बेचने वालों के लिए 11,000 रुपए का प्रावधान था। एमएसपी (Minimum Support Price) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य।
किसान क्या ध्यान रखें
अगर आपके पास टिकरा जैसी कम पानी वाली जमीन है, तो विकल्प देखें। पर धान छोड़ने से पहले हिसाब लगाएं। बीज की खरीद, खेती का खर्च और बिक्री का भाव देख लें।
कृषि विभाग से पूछें कि आपकी फसल योजना में शामिल है या नहीं। पंजीयन की आखिरी तारीख भी पता कर लें। बीज निगम से बीज उत्पादन की शर्तें लिखित में लें। ये सामान्य सलाह है। किसी बिचौलिए को योजना के नाम पर पैसा न दें। सरकारी लाभ सिर्फ तय प्रक्रिया से मिलता है। आवेदन और रसीद संभालकर रखें।
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