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छत्तीसगढ़ में खरीफ गिरदावरी अक्टूबर में पूरी होगी, किसानों को मिलेगा उचित मुआवजा और योजनाओं का लाभ

newz@gmail.com | Oct 6, 2026, 15:20 IST

छत्तीसगढ़ में खरीफ गिरदावरी अक्टूबर तक पूरी होगी। ड्रोन और मैदानी रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। सही आंकड़ों से किसानों को बीमा, मुआवजा और योजनाओं का लाभ मिलेगा। नशीली फसलों की अवैध खेती पर भी निगरानी रहेगी।

जियो मैपिंग

छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ गिरदावरी जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। यह काम अक्टूबर के आखिर तक पूरा किया जाएगा। गिरदावरी में खेत और फसल की जानकारी दर्ज होती है। इसमें फसल की किस्म और बोया गया क्षेत्र शामिल रहता है। यह रिकॉर्ड कई सरकारी योजनाओं का आधार बनता है।

राजस्व कर्मचारी खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति दर्ज करेंगे। उनकी रिपोर्ट की अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा भी होगी। सरकार इस प्रक्रिया को सटीक और पारदर्शी बनाना चाहती है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और ड्रोन का उपयोग हो रहा है।

ड्रोन से जियो मैपिंग

कई क्षेत्रों में ड्रोन से खेतों की जियो मैपिंग होगी। इससे खेतों की भौगोलिक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा। ड्रोन फसल वाले क्षेत्र की तस्वीरें भी जुटाएगा। इनसे फसल के अनुमानित क्षेत्रफल की जांच आसान होगी।

मैदानी कर्मचारी हर खेत की फसल दर्ज करेंगे। इसके बाद उनकी रिपोर्ट का डिजिटल आंकड़ों से मिलान होगा। दोनों रिकॉर्ड समान मिलने पर जानकारी प्रमाणित मानी जाएगी। अंतर मिलने पर संबंधित खेत की दोबारा जांच होगी।

संबंधित कर्मचारी से भी रिकॉर्ड का कारण पूछा जाएगा। जरूरत पड़ने पर उससे स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। इस प्रक्रिया से केवल कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता घटेगी। अधिकारियों को खेत की वास्तविक स्थिति भी दिखाई देगी।

किसानों को क्या फायदा

सही गिरदावरी रिकॉर्ड किसानों के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें गलती होने से योजना का लाभ रुक सकता है। फसल बीमा के दावे में भी यह रिकॉर्ड उपयोगी रहता है। प्राकृतिक आपदा के बाद मुआवजा तय करने में इसकी भूमिका रहती है।

रिकॉर्ड में सही फसल दर्ज होना जरूरी है। बोया गया सही रकबा भी दर्ज होना चाहिए। गलत फसल दर्ज होने पर किसान को नुकसान हो सकता है। वास्तविक रकबा कम होने पर मुआवजा भी प्रभावित हो सकता है।

ड्रोन सर्वे ऐसी गलतियों को कम करने में मदद करेगा। मैदानी सत्यापन से किसान की स्थिति भी स्पष्ट होगी। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाना आसान होगा।

48.44 लाख हेक्टेयर बोनी

इस खरीफ सीजन में बड़ा बुवाई लक्ष्य रखा गया था। राज्य में 48.69 लाख हेक्टेयर बोनी का लक्ष्य था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 22 सितंबर तक 48.44 लाख हेक्टेयर बोनी हुई। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 99 प्रतिशत है।

प्रदेश में धान की खेती सबसे प्रमुख मानी जाती है। इसके अलावा कई दूसरी खरीफ फसलें भी बोई गई हैं। इनमें मक्का, कोदो और कुटकी शामिल हैं। अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल की भी बुवाई हुई है।

गिरदावरी पूरी होने के बाद फसलवार अंतिम आंकड़े मिलेंगे। जिलावार खेती का वास्तविक रकबा भी सामने आएगा। इन आंकड़ों से सरकार को कृषि नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। खाद, बीज और खरीद की तैयारी भी बेहतर हो सकेगी।

गिरदावरी रिकॉर्ड कैसे बनेगा

पहले चरण में कर्मचारी खेत की वास्तविक फसल देखेंगे। इसके बाद निर्धारित व्यवस्था में फसल की जानकारी दर्ज होगी। दूसरे चरण में ड्रोन से मिले आंकड़े देखे जाएंगे। खेत के क्षेत्रफल और स्थिति का मिलान किया जाएगा।

संदेह होने पर मैदानी सत्यापन कराया जाएगा। अधिकारी जरूरत के अनुसार रिकॉर्ड में सुधार करा सकेंगे। इस दौरान किसान की जानकारी सुनना भी जरूरी होगा। किसान बोई गई फसल और क्षेत्र की पुष्टि कर सकेगा। सही प्रक्रिया किसानों और प्रशासन के बीच विवाद घटा सकती है। इससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

अवैध खेती पर निगरानी

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की अलग पहचान की है। इन क्षेत्रों में अवैध नशीली फसलों पर निगरानी रहेगी। गांजा और अफीम की अवैध खेती की जांच होगी। राजस्व और पुलिस विभाग आपसी समन्वय से काम करेंगे। अन्य संबंधित विभागों से भी सूचनाएं जुटाई जाएंगी। ड्रोन सर्वे में संदिग्ध फसल दिखने पर जांच होगी।

केवल तस्वीर के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले मैदानी स्तर पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन होगा। अवैध खेती की पुष्टि होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने निगरानी व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए हैं।

इस कार्रवाई में निर्दोष किसान की सुरक्षा भी जरूरी होगी। रिकॉर्ड, सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

डिजिटल रिकॉर्ड की चुनौती

तकनीक से गिरदावरी तेज और सटीक हो सकती है। फिर भी मशीन से मिली जानकारी अंतिम प्रमाण नहीं होती। फसल की पहचान में मौसम का असर पड़ सकता है। बादल, पेड़ और कमजोर तस्वीरें भी बाधा बन सकती हैं।

इसी कारण मैदानी जांच को जरूरी रखा गया है। कर्मचारी की रिपोर्ट और ड्रोन रिकॉर्ड साथ देखे जाएंगे। किसानों को रिकॉर्ड जांचने का अवसर भी मिलना चाहिए। गलती मिलने पर सुधार की आसान व्यवस्था जरूरी है। डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। किसान की निजी और भूमि संबंधी जानकारी संरक्षित रहनी चाहिए।

अक्टूबर बाद आएंगे आंकड़े

गिरदावरी पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें फसल और क्षेत्र के अनुसार आंकड़े होंगे। जिलों की बुवाई स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। सरकार इन्हीं आंकड़ों पर आगामी फैसले ले सकती है।

फसल खरीद और भंडारण की योजना बनाने में मदद मिलेगी। बीमा और मुआवजा प्रक्रिया भी अधिक सटीक हो सकती है। अक्टूबर के आखिर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद अंतिम आंकड़े सार्वजनिक किए जा सकते हैं।

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