छत्तीसगढ़ में किसानों ने आठ अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन किया। भारतीय किसान संघ ने प्रदेशभर में आंदोलन किया। कई जिलों में किसान ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर पहुंचे। कवर्धा में इसका असर सबसे ज्यादा दिखा।
किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली और कई जगह चक्काजाम किया। इससे शहर के कई रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ। आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल जाने वाले लोगों को रास्ता बदलना पड़ा। एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई थी। बाद में प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को रास्ता दिया। इस घटना से यातायात व्यवस्था पर असर साफ दिखा। पुलिस ने भीड़ और ट्रैक्टरों को नियंत्रित करने की कोशिश की।
छत्तीसगढ़ में 1700 करोड़ भुगतान बना मुद्दा
किसानों के आंदोलन का बड़ा मुद्दा बकाया भुगतान है। भारतीय किसान संघ ने 1700 करोड़ रुपए का दावा किया। यह राशि वर्ष 2022-23 की धान खरीदी से जुड़ी है। संघ के अनुसार किसानों को पूरा भुगतान नहीं मिला।
किसान संघ ने सरकार से तुरंत भुगतान की मांग की। संगठन के मुताबिक किसान अपनी फसल पहले ही बेच चुके हैं। इसके बावजूद भुगतान लंबित रहने से परेशानी बढ़ी है। किसानों को अगली फसल के लिए पैसा चाहिए।
खाद, बीज और खेती के दूसरे खर्च भी सामने हैं। भुगतान रुकने से किसान इन जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। संघ ने भुगतान की समयसीमा तय करने की मांग की।

धान का भाव 3358 रुपए करने की मांग
किसान संघ ने धान की कीमत को लेकर भी मांग रखी। संगठन 3358 रुपए प्रति क्विंटल की खरीद चाहता है। संघ ने पिछले वर्षों में बढ़े समर्थन मूल्य का हवाला दिया। किसानों को इसका पूरा लाभ देने की मांग हुई।
किसान संघ ने धान खरीदी व्यवस्था में बदलाव भी मांगा। संगठन ने प्रति बोरी 40 किलो 700 ग्राम की सीमा मांगी। इससे अधिक वजन लेने पर रोक लगाने की मांग है।
किसानों का कहना है कि अतिरिक्त धान लेने की समस्या है। संघ चाहता है कि खरीदी केंद्रों पर तय वजन ही लिया जाए। इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा।
टोकन व्यवस्था बदलने की मांग
धान बेचने के लिए टोकन व्यवस्था भी आंदोलन का मुद्दा बनी। किसान संघ ने अलग-अलग किसानों के लिए टोकन संख्या मांगी। बड़े किसानों के लिए पांच टोकन की मांग है।
छोटे किसानों के लिए तीन टोकन मांगे गए हैं। सीमांत किसानों के लिए एक टोकन की मांग रखी गई। संघ चाहता है कि पूरी उपज बेचने में परेशानी नहीं हो।
किसानों के अनुसार टोकन की कमी से बिक्री प्रभावित होती है। कई किसानों को खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संघ इस व्यवस्था को आसान बनाने की मांग कर रहा है।
15 नवंबर से धान खरीदी हो
भारतीय किसान संघ ने खरीदी की तारीख बदलने की मांग की। संगठन 15 नवंबर से धान खरीदी चाहता है। खरीदी 15 फरवरी तक चलाने की मांग रखी गई है।
संघ के अनुसार इससे किसानों को पर्याप्त समय मिलेगा। किसान जल्दबाजी के बिना अपनी उपज बेच सकेंगे। खरीदी केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं भी मांगी गई हैं। तौल और टोकन प्रक्रिया आसान करने की मांग है। इससे किसानों की परेशानी कम हो सकती है।
बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा
किसान संघ ने बाढ़ से हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। कई इलाकों में फसल खराब होने का दावा किया गया। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग हुई।
संघ ने खेतों में जाकर सर्वे कराने की मांग की। संगठन केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करना चाहता। किसानों की वास्तविक स्थिति देखने की बात कही गई।
इस मांग का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत दिलाना है। प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। फसल खराब होने से अगली खेती भी प्रभावित होती है।
खाद की कीमत पर भी नाराजगी
किसानों ने खाद की उपलब्धता और कीमत का मुद्दा उठाया। संघ ने निर्धारित कीमत पर खाद देने की मांग की। अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई की मांग हुई। किसानों के लिए खाद खेती की जरूरी जरूरत है। कीमत बढ़ने पर खेती की लागत भी बढ़ती है। इसलिए संघ ने इस मामले में सख्ती मांगी है।
आंदोलन में खाद की उपलब्धता का मुद्दा भी जुड़ा है। समय पर खाद नहीं मिलने से बुवाई प्रभावित हो सकती है। किसान संगठन इसका स्थायी समाधान चाहता है।
सिंचाई परियोजनाएं पूरी करने की मांग
किसान संघ ने अधूरी सिंचाई परियोजनाओं पर सवाल उठाए। अरपा-भैंसाझार परियोजना को जल्द पूरा करने की मांग हुई। दूसरी लंबित परियोजनाओं को भी पूरा करने की बात कही गई।
संगठन के अनुसार कई क्षेत्रों में पानी की समस्या है। अनियमित बारिश खेती के लिए चुनौती बनती है। सूखे के दौरान यह परेशानी और बढ़ जाती है। किसानों का कहना है कि परियोजनाओं पर पैसा खर्च होता है। फिर भी कई काम वर्षों तक पूरे नहीं होते। संघ ने लंबित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग की।
गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग
गन्ना किसानों के लिए भी संगठन ने मांग रखी। गन्ने का मूल्य 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग हुई। गन्ने को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने की मांग है।
संगठन ने मक्का और गेहूं किसानों का मुद्दा भी उठाया। रबी सीजन में समर्थन मूल्य पर खरीद मांगी गई। इससे दूसरी फसल लेने वाले किसानों को राहत मिल सकती है। किसान संघ ने जल संरक्षण पर भी जोर दिया। खेती में पानी बचाने की जरूरत बताई गई।
जमीन अधिग्रहण पर किसानों की चिंता
आंदोलन में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी शामिल रहा। किसान संघ ने किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। संगठन ने विकास के दौरान किसानों का हित बचाने की बात कही।
संघ ने उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुसार कार्रवाई की मांग की। संगठन के अनुसार जमीन किसानों की आजीविका का आधार है। इसलिए अधिग्रहण में किसानों के हित जरूरी हैं।
इस मांग का संबंध खेती और ग्रामीण आजीविका से है। जमीन जाने पर किसान की आय का आधार प्रभावित होता है। इसलिए संगठन ने इस विषय को भी शामिल किया।
कृषक उन्नति योजना का दायरा बढ़े
किसान संघ ने दूसरी फसलों को भी योजना से जोड़ने की मांग की। इसमें फल और सब्जी उत्पादकों को शामिल करने की मांग है। गन्ना किसानों को जोड़ने की बात भी कही गई।
इसका उद्देश्य धान से बाहर के किसानों को लाभ देना है। संगठन चाहता है कि अलग-अलग फसल लेने वालों को मदद मिले। इससे फसल विविधता को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, योजना में बदलाव का अंतिम फैसला सरकार करेगी। किसान संगठन ने इसे अपनी प्रमुख मांगों में रखा है।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे
भारतीय किसान संघ ने मांगें सरकार तक पहुंचाने का फैसला किया। संगठन जिला कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। इसमें किसानों की प्रमुख समस्याएं शामिल होंगी। ज्ञापन में धान खरीदी और बकाया भुगतान शामिल हैं। सिंचाई और बिजली से जुड़े मुद्दे भी रखे जाएंगे। गन्ने की कीमत और जमीन अधिग्रहण भी शामिल हैं।
संगठन ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय बैठक की मांग की। सभी मांगों पर स्पष्ट फैसला लेने की मांग है। साथ ही समाधान की समयसीमा घोषित करने की बात हुई।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज
भारतीय किसान संघ ने आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी दी। संगठन ने कहा कि केवल बैठक से समाधान नहीं होगा। किसानों की मांगों पर ठोस फैसले जरूरी हैं।
संघ के अनुसार किसान लंबे समय से परेशान हैं। फसल बेचने, खाद लेने और उचित कीमत के सवाल हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद राहत की भी जरूरत है। मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ सकता है। संगठन गांवों से ज्यादा किसानों को जोड़ने की तैयारी करेगा। इससे प्रदेश में किसान आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।
कवर्धा में यातायात पर असर
कवर्धा में आंदोलन के दौरान कई रास्तों पर वाहन फंसे। कुछ वाहन चालकों ने वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया। कई लोग खेतों से होकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था संभाली। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी। एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं को रास्ता देने पर जोर रहा।
भारतीय किसान संघ के मीडिया प्रभारी दिनेश चंद्रवंशी ने व्यवस्था पर बयान दिया। उन्होंने जरूरी सेवाओं का रास्ता खुला रखने की बात कही। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने भी यातायात प्रबंध बताए। उन्होंने एंबुलेंस और स्कूली बसों को प्राथमिकता देने की बात कही।
कुल मिलाकर आंदोलन का केंद्र किसानों की लंबित मांगें हैं। इनमें भुगतान, धान खरीदी और सिंचाई प्रमुख मुद्दे हैं। गन्ने और दूसरी फसलों से जुड़े सवाल भी हैं। अब सरकार की प्रतिक्रिया पर किसानों की अगली रणनीति निर्भर करेगी।
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