महाराष्ट्र में गन्ने के दाम को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग रोको आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन महाराष्ट्र और कर्नाटक, दोनों राज्यों में चल रहा है। कोल्हापुर के कोगनोली टोल प्लाजा के पास हजारों किसान सड़क पर उतर आए। पुणे बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात रुक गया।
कोगनोली में हाईवे जाम
मंगलवार (13 अक्टूबर) को कोगनोली टोल प्लाजा के पास किसान जमा हुए। इनकी संख्या हजारों में बताई गई है। उन्होंने पुणे बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात रोक दिया।
हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सबसे ज्यादा परेशानी मालवाहक ट्रकों को हुई। बड़ी संख्या में ट्रक रास्ते में फंस गए। इससे माल की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
किसान पूरी तैयारी के साथ पहुंचे हैं। वे अपने साथ खाना बनाने के बर्तन और गैस सिलेंडर भी लाए हैं। इससे साफ है कि वे लंबे धरने के लिए तैयार हैं।

दिल्ली की बैठक बेनतीजा
इस आंदोलन की जड़ दिल्ली की बैठक है। सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। इसमें गन्ने की कीमत और चीनी उद्योग के मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका। सरकार ने मांगों के अध्ययन के लिए समिति बनाने की बात कही।
किसान संगठन इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। संगठन तत्काल फैसला चाहता था। बैठक बेनतीजा रहने के बाद उसने आंदोलन तेज करने का फैसला किया।
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष पूर्व सांसद राजू शेट्टी हैं। उन्हीं के नेतृत्व में किसान गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि लागत और जरूरत देखकर उचित भाव तय हो। यही मुद्दा इस पूरे आंदोलन के केंद्र में है।
गन्ने का भाव 5,500 रुपए टन
किसानों की सबसे बड़ी मांग गन्ने के कुल भाव को लेकर है। संगठन चाहता है कि गन्ने का भाव 5,500 रुपए प्रति टन हो। संगठन ने इसका हिसाब भी बताया है।
चीनी मिलें 5,000 रुपए प्रति टन दें। केंद्र सरकार 500 रुपए प्रति टन की सब्सिडी दे। दोनों को जोड़ने पर कुल भाव 5,500 रुपए प्रति टन बनता है। एक टन में 10 क्विंटल होते हैं। इस हिसाब से यह मांग 550 रुपए प्रति क्विंटल के बराबर है।
केंद्र ने सीजन 2026-27 का एफआरपी (Fair and Remunerative Price) तय किया है। यह 365 रुपए प्रति क्विंटल है। यह 3,650 रुपए प्रति टन होता है। यानी किसानों की मांग इससे 1,850 रुपए प्रति टन ज्यादा है।
चीनी और इथेनॉल पर भी मांग
भाव के अलावा किसानों ने दो और मांगें रखी हैं। पहली मांग चीनी के न्यूनतम सुरक्षित मूल्य को लेकर है। संगठन चाहता है कि यह बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलो किया जाए। दूसरी मांग इथेनॉल की खरीद दर की है। संगठन चाहता है कि इथेनॉल की खरीद दर 70 रुपए प्रति लीटर हो। संगठन के मुताबिक ये दोनों मांगें गन्ने के भाव से जुड़ी हैं।
कटाई से पहले भाव घोषित हो
किसान एक और बात पर जोर दे रहे हैं। उनकी मांग है कि भाव कटाई और ढुलाई शुरू होने से पहले घोषित हो। इससे किसानों को समय रहते अपनी उपज की कीमत पता चल जाएगी। कीमत पहले पता हो, तो किसान आर्थिक योजना बना सकते हैं।
कई जगह एक साथ प्रदर्शन
आंदोलन सिर्फ कोगनोली तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के कराड, सातारा और इंदापुर में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। कर्नाटक के कई हिस्सों में भी किसान सड़कों पर हैं। कई जगह एक साथ प्रदर्शन होने से दबाव बढ़ गया है। हाईवे जाम का असर दोनों राज्यों में दिख रहा है। मौके पर पुलिस और प्रशासन तैनात हैं। हालात पर नजर रखी जा रही है।
यातायात और आम लोगों पर असर
हाईवे जाम का असर यात्रियों और ट्रक चालकों पर पड़ा। मालवाहक ट्रकों के फंसने से माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। अगर आंदोलन लंबा चला, तो वैकल्पिक रास्तों से यातायात चलाना पड़ सकता है। इसकी तैयारी प्रशासन के लिए जरूरी हो सकती है। यात्रा से पहले रास्ते की जानकारी जरूर लें। जरूरत हो तो वैकल्पिक मार्ग चुनें।
सरकार का पक्ष और अगला कदम
सरकार की ओर से अभी समिति बनाने की बात सामने आई है। समिति किसानों की मांगों का अध्ययन करेगी। लेकिन किसान संगठन को यह जवाब काफी नहीं लगा।
संगठन ने संकेत दिया है कि ठोस फैसले तक आंदोलन जारी रह सकता है। इसलिए अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। किसानों के साथ आगे बातचीत होती है या नहीं, यह भी देखना होगा।
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