धार पुलिस ने अवैध गांजे की खेती पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तीन थाना क्षेत्रों से गांजे के 1501 पौधे जब्त किए हैं। इन पौधों की कीमत 1.60 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। पुलिस के मुताबिक पौधे कपास और अरहर की फसल के बीच छिपे थे। एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। बाकी लोगों की तलाश जारी है। मामले की जांच भी चल रही है।
धार में 1501 पौधे जब्त
मध्य प्रदेश के धार जिले में पुलिस को एक सूचना मिली थी। सूचना यह थी कि कुछ खेतों में चोरी छिपे गांजा उगाया जा रहा है। पुलिस ने इस जानकारी को गंभीरता से लिया। इसके बाद जिले में बड़ी कार्रवाई की योजना बनी।
यह कार्रवाई टांडा, बाग और धमनोद थाना क्षेत्रों में हुई। तीनों जगह खेतों में छापा मारा गया। पौधों की कुल संख्या 1501 निकली। इसमें टांडा से 855, बाग से 586 और धमनोद से 60 पौधे मिले।
तीन टीमों ने की कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा ने इस अभियान के लिए तीन अलग टीमें बनाई थीं। हर टीम को एक इलाके की जिम्मेदारी दी गई। इन टीमों ने तीनों इलाकों में खेतों पर छापा मारा। पुलिस अब अवैध खेती से जुड़े लोगों का पता लगा रही है।
पुरा गांव में सबसे बड़ी खेप
सबसे बड़ी कार्रवाई टांडा थाना क्षेत्र के पुरा गांव में हुई। यहां से गांजे के 855 पौधे जब्त किए गए। इनकी कीमत 90 लाख रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में खेत मालिक भूरू को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि खेती कब से चल रही थी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि इसमें और कौन लोग शामिल थे।
बाग के कनेरी गांव में छापा
दूसरी कार्रवाई बाग थाना क्षेत्र के कनेरी गांव में हुई। यह इलाका देहरी चौकी के अंतर्गत आता है। यहां से गांजे के 586 पौधे जब्त किए गए। इन पौधों का कुल वजन करीब 446 किलो बताया गया है। इनकी अनुमानित कीमत करीब 67 लाख रुपए है।
इस मामले में भी केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फसल किसने उगाई। यह भी जांचा जा रहा है कि इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं।
धमनोद के गिनवापुर में भी केस
तीसरी कार्रवाई धमनोद थाना क्षेत्र के गिनवापुर गांव में हुई। यहां से गांजे के 60 पौधे जब्त किए गए। इनका वजन करीब 38 किलो था। पुलिस ने इनकी कीमत करीब 4.5 लाख रुपए आंकी है।
यहां भी गांजा कपास और अरहर की फसल के बीच उगाया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब यह जांच हो रही है कि खेत में गांजा किसने लगाया। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसका इस्तेमाल कहां होना था।
तीनों जगह का पूरा हिसाब
अब तीनों कार्रवाइयों को एक साथ देखते हैं। टांडा के पुरा गांव में 855 पौधे मिले। इनकी कीमत 90 लाख रुपए से ज्यादा आंकी गई। बाग के कनेरी गांव में 586 पौधे मिले। इनकी कीमत करीब 67 लाख रुपए बताई गई।
धमनोद के गिनवापुर गांव में 60 पौधे जब्त हुए। इनकी कीमत करीब 4.5 लाख रुपए है। तीनों जगह की कीमत जोड़ने पर आंकड़ा 1.60 करोड़ रुपए से ज्यादा बैठता है। कुल पौधों की गिनती 1501 है।
कपास और अरहर के बीच खेती
पुलिस के मुताबिक गांजे के पौधे आम फसलों के बीच छिपाए गए थे। कपास और अरहर की फसल की आड़ ली गई थी। ऐसे में दूर से खेत सामान्य ही दिखता है। इसी वजह से इस तरह की खेती का पता लगाना आसान नहीं होता।
यही कारण है कि पुलिस की कार्रवाई सूचना के आधार पर हुई। सूचना मिलने के बाद ही टीमें खेतों तक पहुंचीं। अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि पौधे किस तरह लगाए गए।
एनडीपीएस एक्ट में दर्ज हुए केस
तीनों मामलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। यह कानून नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों पर लागू होता है। बिना अनुमति गांजे की खेती इस कानून के दायरे में आती है। इस मामले में दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है। अदालत में सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी।
जांच में क्या देखा जाएगा
पुलिस के सामने अब कई सवाल हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि गांजे की खेती के पीछे कौन था। दूसरा सवाल यह है कि इसे कहां बेचने की तैयारी थी। पुलिस इन दोनों सवालों के जवाब खोज रही है।
टांडा में पकड़े गए आरोपी से पूछताछ चल रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि खेती कब से हो रही थी। बाकी आरोपियों की तलाश भी जारी है। बाग और धमनोद में भी खेती करने वालों की पहचान हो रही है।
ऑपरेशन प्रहार जारी रहेगा
अपर पुलिस अधीक्षक विजय दवार ने बताया कि नशे के खिलाफ अभियान जारी है। यह कार्रवाई ऑपरेशन प्रहार के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे भी छापे और गिरफ्तारियां होंगी। पुलिस का यह अभियान नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए है। खेतों में छिपाकर उगाई गई फसल का पता लगाना आसान नहीं होता। ऐसे मामलों में सूचना की भूमिका अहम होती है।
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