मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग में रबी सीजन की तैयारियां तेज की जा रही हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में खरीफ फसल वर्ष 2026 की स्थिति पर चर्चा हुई। साथ ही रबी वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा भी की गई।
बैठक में खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री की उपलब्धता प्रमुख मुद्दा रही। अधिकारियों को किसानों की जरूरत के अनुसार समय पर सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। फसलों का रकबा बढ़ाने और उत्पादन सुधारने पर भी चर्चा हुई। कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
बैठक में कृषि, सहकारिता, विपणन और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। संभाग के जिलों के कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी मौजूद रहे। चर्चा में कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति पर ध्यान दिया गया।
चार जिलों में कम बारिश
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 में संभाग के चार जिले कम बारिश से प्रभावित हैं। इनमें आलीराजपुर, धार, इंदौर और झाबुआ शामिल हैं। अधिकारियों ने पिछले वर्ष की तुलना में बारिश की कमी के आंकड़े प्रस्तुत किए। आलीराजपुर में बारिश 43.11 प्रतिशत कम दर्ज की गई। धार में यह कमी 40.81 प्रतिशत रही। इंदौर में बारिश 32.82 प्रतिशत कम रही। झाबुआ में 28.98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई की योजना प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को पानी की उपलब्धता देखकर फसल चुनने की सलाह देने के निर्देश दिए गए। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों पर जोर रहेगा। कम अवधि में पकने वाली किस्मों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अधिकारियों ने जल परियोजनाओं की क्षमता और उपलब्ध जल की स्थिति की समीक्षा की। बुवाई के प्रतिशत और आगामी जरूरतों के अनुसार बीज उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। उपलब्ध पानी का समुचित उपयोग करने की जरूरत बताई गई।
गेहूं और चने की बुवाई
इंदौर संभाग में रबी सीजन 2026-27 के लिए कुल 17,36,005 हेक्टेयर बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें गेहूं सबसे बड़ी फसल के रूप में सामने है। गेहूं की बुवाई 9,93,100 हेक्टेयर में प्रस्तावित है। चने की बुवाई का लक्ष्य 5,82,100 हेक्टेयर रखा गया है। मक्का के लिए 1,23,940 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित है। इसके अलावा मसूर, मटर, सरसों, अलसी और गन्ने की खेती भी योजना में शामिल है।
कम बारिश को देखते हुए फसल विविधीकरण पर भी चर्चा की गई। चना और सरसों जैसी फसलों का रकबा बढ़ाने की संभावनाएं देखी गईं। फसल का चयन स्थानीय पानी और मिट्टी की स्थिति के अनुसार करने पर जोर दिया गया।
इन लक्ष्यों के जरिए संभाग में रबी उत्पादन की योजना तैयार की जा रही है। हालांकि, प्रस्तावित बुवाई का क्षेत्र अंतिम वास्तविक रकबा नहीं है। वास्तविक स्थिति बुवाई पूरी होने और संबंधित आंकड़े मिलने के बाद स्पष्ट होगी।
खाद और बीज समय पर मिलेंगे
बैठक में खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। किसानों को उनकी मांग के अनुसार समय पर सामग्री मिलनी चाहिए। उर्वरक वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया गया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने रबी फसलों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा की। बीज की जरूरत और बीज प्रतिस्थापन दर पर भी चर्चा हुई। खाद, बीज और कीटनाशकों के नमूनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई।
अमानक खाद, बीज और कृषि औषधियों की बिक्री पर सख्ती के निर्देश दिए गए। ऐसे उत्पादों का अवैध भंडारण या कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है।
कृषि सामग्री की गुणवत्ता सीधे खेती की लागत और फसल पर असर डाल सकती है। इसलिए किसानों को खरीद के समय बिल लेना चाहिए। पैकेट पर दर्ज जानकारी और उत्पाद की वैधता भी देखनी चाहिए। संदिग्ध सामग्री मिलने पर संबंधित कृषि विभाग को सूचना देना उपयोगी रहेगा।
ई-विकास पोर्टल से खाद वितरण
बैठक में ई-विकास उर्वरक वितरण प्रणाली की प्रगति की समीक्षा हुई। कृषि विभाग के अधिकारियों को वितरण व्यवस्था का प्रचार बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अनुदानित खाद का वितरण ई-विकास पोर्टल के माध्यम से करने पर जोर दिया गया।
खाद की बिक्री पीओएस (Point of Sale) मशीनों के जरिए सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सीधे प्रदाय किए गए स्टॉक के आरओ और डीडी को जल्द पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया। अधिकारियों को रबी फसलों के बुवाई क्षेत्र के अनुपात में खाद उठाव की समीक्षा करनी होगी।
बार-बार खाद लेने वाले किसानों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। कंपनियों और थोक विक्रेताओं के स्टॉक की निगरानी भी जरूरी बताई गई। जिन जिलों में पिछले साल से कम खाद उपलब्ध है, वहां प्राथमिकता से भंडारण कराया जाएगा। खाद बिक्री केंद्रों के वास्तविक स्टॉक का पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से मिलान होगा। इसके लिए अचानक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। इससे रिकॉर्ड और उपलब्ध भंडार के बीच अंतर की पहचान की जा सकेगी।
किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं
बैठक में खाद बिक्री केंद्रों पर किसानों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। केंद्रों पर बैठने, छाया और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। किसान विश्राम शेड बनाने को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इसके लिए सांसद और विधायक निधि के उपयोग पर जोर दिया गया। नए खाद भंडारण केंद्रों के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। इसमें सहकारिता विभाग की भूमिका रहेगी।
अधिकारियों को फार्मर आईडी में किसानों के सभी खातों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना होगा। एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति भी बैठक में समीक्षा का विषय रही। किसानों को संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए प्रचार-प्रसार बढ़ाने को कहा गया।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खाद वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाना है। किसानों को जानकारी और जरूरी सामग्री समय पर मिले, यह भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए विभागीय निगरानी और केंद्रों की नियमित जांच जरूरी होगी।
कम पानी में खेती की सलाह
कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के बेहतर विकल्प अपनाने की सलाह दी जाएगी। बैठक में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग जैसी तकनीकें अपनाने की सलाह भी दी गई।
मल्चिंग में मिट्टी की सतह को ढककर नमी बचाने की कोशिश की जाती है। ड्रिप सिंचाई से पानी पौधों की जड़ों के पास पहुंचाया जा सकता है। स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जाता है। इन तरीकों का चयन खेत और फसल की जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जरूरत के अनुसार सिंचाई की जानकारी दी जाएगी। कृषि विशेषज्ञों के माध्यम से फसल विविधीकरण पर भी मार्गदर्शन देने के निर्देश हैं। इसका उद्देश्य कम बारिश के बावजूद फसल की उत्पादकता बनाए रखने में मदद करना है।
सहकारिता और किसान ऋण
बैठक में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भी निर्देश दिए गए। सहकारिता आयुक्त दीपक सिंह ने जिला सहकारी विकास समिति की मासिक बैठक कराने पर जोर दिया। जिला स्तरीय क्रियान्वयन एवं निगरानी समिति की नियमित बैठकें भी आयोजित होंगी।
वर्ष 2027-28 के फसल ऋणमान तय करने के लिए जिला स्तरीय तकनीकी समूह की बैठक होगी। इसकी सिफारिशें 15 नवंबर 2026 तक भेजने के निर्देश दिए गए। फसल ऋण प्रक्रिया सरल बनाने और किसानों की जरूरत के अनुसार ऋण उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
किसानों को सालभर नकद और वस्तु के रूप में जरूरत के मुताबिक ऋण देने की बात कही गई। खरीफ और रबी की बाध्यता खत्म करने पर भी जोर दिया गया। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के ऑनलाइन आवेदन और शाखा स्तर पर मंजूरी की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) में खाद उपलब्धता और कार्यालय व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। सहकारी संस्थाओं के कारोबार में विविधता लाने की जरूरत बताई गई। हर पैक्स को हर महीने कम से कम एक कृषि अवधि ऋण देने की अपेक्षा रखी गई। बैंक शाखाओं से हर महीने कम से कम एक गैर-कृषि अवधि ऋण देने को भी कहा गया।
उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग
बैठक में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सभी जिलों में उद्यानिकी का रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए गए। किसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
ऐसी इकाइयों में कृषि और बागवानी उत्पादों का प्रसंस्करण किया जा सकता है। इससे किसानों को उत्पादों की बिक्री के नए विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, इकाई लगाने से पहले लागत, बाजार और उपलब्ध कच्चे माल का आकलन जरूरी है।
उद्यानिकी विभाग को किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं से वित्तीय मदद दिलाने पर भी जोर दिया गया। इससे इच्छुक किसानों को व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया समझने में मदद मिल सकती है।
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