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राज्य मिलेट मिशन: अब कोदो-कुटकी की खेती पर बोनस और बीज भी मिलेगा फ्री

newz@gmail.com | Aug 26, 2026, 14:50 IST

मध्य प्रदेश सरकार ने मिलेट मिशन योजना शुरू की है। इसमें कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और रागी की खेती करने वाले किसानों को बीज, प्रशिक्षण, आर्थिक मदद और बोनस मिलेगा।

मिलेट मिशन

राज्य मिलेट मिशन: मोटे अनाजों को फिर से खेतों और थाली तक लाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य मिलेट मिशन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को बीज, प्रशिक्षण, आर्थिक प्रोत्साहन और बोनस दिया जा रहा है।सरकार का मकसद किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देकर प्रदेश को पोषण सुरक्षा की ओर ले जाना है।

राज्य मिलेट मिशन: किसानों को हुआ ये लाभ

योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार किसानों को मिलेट्स की उन्नत किस्मों के बीज निशुल्क या रियायती दर पर उपलब्ध करा रही है। खेती की पूरी प्रक्रिया समझाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं। इसमें बीज उपचार से लेकर कटाई और भंडारण तक की वैज्ञानिक जानकारी दी जाती है। सबसे बड़ी राहत कोदो-कुटकी की फसल पर बोनस के रूप में मिल रही है। फसल बेचने पर किसानों को निर्धारित दर के अलावा अतिरिक्त बोनस राशि भी दी जाती है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है।

आदिवासी अंचलों को विशेष फायदा

मिलेट मिशन का सबसे बड़ा असर प्रदेश के आदिवासी अंचलों में दिख रहा है। डिंडोरी, मंडला, झाबुआ, अलीराजपुर और सिवनी जैसे जिलों में कोदो-कुटकी पारंपरिक फसल रही है, लेकिन बाजार और बीज के अभाव में इसकी खेती घट गई थी।

योजना के तहत इन क्षेत्रों में बीज वितरण केंद्र खोले गए हैं और कृषि सखियों के जरिए महिलाओं को प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कम सिंचाई में होने वाली इन फसलों से पहाड़ी और पठारी इलाकों के किसानों को सूखे में भी फसल मिल रही है।
साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से सीधी खरीदी और बोनस मिलने से आदिवासी किसानों की आय में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार स्थानीय मेले और हाट बाजारों में मिलेट्स स्टॉल लगवाकर आदिवासी उत्पादों को सीधा उपभोक्ता तक पहुंचा रही है।

कम लागत, कम पानी, मुनाफा ज्यादा

मिलेट्स को ‘श्रीअन्न’ कहा जाता है। ये फसलें कम पानी और कम उर्वरक में भी अच्छी पैदावार देती हैं। सूखे और कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए यह सबसे उपयुक्त विकल्प है। सरकार का मानना है कि रासायनिक खेती का बोझ घटाकर मिलेट्स अपनाने से मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और किसान का खर्च भी कम होगा।

खेत से बाजार तक मुहिम

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, खपत बढ़ाने पर भी जोर है। राज्य और जिला स्तर पर मिलेट फूड फेस्टिवल, कार्यशाला और मेले आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा मिलेट्स से बने व्यंजनों को प्रदर्शित कर पोषण संबंधी फायदे बताए जा रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी स्कूल, आंगनवाड़ी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी मिलेट्स को शामिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे किसानों को फसल का सीधा और भरोसेमंद बाजार मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य पारंपरिक मोटे अनाजों को फिर से मुख्यधारा में लाना है। अधिकारियों का कहना है कि मिलेट मिशन से एक तरफ किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और दूसरी तरफ प्रदेश की जनता को पौष्टिक आहार उपलब्ध होगा।

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