प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। योजना की सालाना सहायता बढ़ाने की चर्चा फिर शुरू हुई है। फिलहाल पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपए मिलते हैं। यह रकम तीन बराबर किस्तों में खाते में आती है। हर किस्त के तहत किसान को दो हजार रुपए मिलते हैं। अब सालाना रकम 10 हजार रुपए होने की संभावना जताई गई है।
इस बदलाव पर केंद्र सरकार के स्तर पर विचार होने का दावा है। अभी सरकार ने इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए किसानों को 10 हजार रुपए मिलना फिलहाल तय नहीं है। इसे केवल संभावित बदलाव के रूप में समझना जरूरी है।
सम्मान निधि 10 हजार रु. करने का दावा
भारतीय कृषक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कृष्णवीर चौधरी ने यह संकेत दिया। वह सरकार की उच्चस्तरीय खरीद समिति के सदस्य भी बताए गए हैं। उन्होंने हरियाणा के नूंह पंचायत भवन में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इसी कार्यक्रम में सहायता राशि बढ़ने की संभावना बताई गई।
उनके मुताबिक केंद्र इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। सालाना सहायता 6,000 से 10,000 रुपए हो सकती है। ऐसा हुआ तो किसानों को सालाना चार हजार रुपए अतिरिक्त मिलेंगे। इससे खाद और बीज खरीदने में कुछ राहत मिल सकती है। डीजल, कीटनाशक और मजदूरी के खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए किसान संगठन लंबे समय से राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
डॉ. चौधरी का बयान किसी अंतिम सरकारी फैसले की पुष्टि नहीं है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर ही बदलाव लागू होगा। कृषि मंत्रालय की अधिसूचना भी जरूरी होगी। इसके बाद भुगतान और किस्तों का नया प्रारूप साफ होगा।
सरकार ने क्या कहा
केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट अभी सालाना सहायता छह हजार रुपए बताती है। यह रकम दो हजार रुपए की तीन किस्तों में मिलती है। सरकारी पोर्टल पर 10 हजार रुपए वाली सहायता दर्ज नहीं है। कृषि मंत्रालय ने भी ऐसा आदेश जारी नहीं किया है।
इस कारण बढ़ी राशि को पक्का लाभ समझना सही नहीं होगा। किसानों को केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर कई भ्रामक दावे भी प्रसारित हो सकते हैं। कुछ संदेश अगली किस्त में बड़ी रकम मिलने का दावा कर सकते हैं।
किसान ऐसे संदेशों में दिए अनजान लिंक नहीं खोलें। योजना की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से ही जांची जानी चाहिए। बैंक खाते या आधार की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं दें। वन टाइम पासवर्ड साझा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
क्या किस्त में 10 हजार मिलेंगे
यहां सालाना सहायता और एक किस्त का अंतर समझना जरूरी है। चर्चा सालाना रकम 10 हजार रुपए करने की है। इसका मतलब 24वीं किस्त में 10 हजार रुपए मिलना नहीं है। सरकार ने किस्तों का नया बंटवारा भी घोषित नहीं किया।
मौजूदा व्यवस्था में प्रत्येक किस्त दो हजार रुपए की होती है। पात्र किसानों को साल में तीन बार भुगतान मिलता है। राशि बढ़ने पर किस्तों का प्रारूप सरकार तय करेगी। किस्तों की संख्या या रकम अभी स्पष्ट नहीं है।
आधिकारिक फैसला नहीं होने तक मौजूदा नियम लागू रहेंगे। इसलिए फिलहाल 24वीं किस्त दो हजार रुपए मानी जाएगी। रकम बदलने पर कृषि मंत्रालय नई जानकारी जारी करेगा। भुगतान से पहले पोर्टल पर भी जरूरी बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
24वीं किस्त कब आएगी
पीएम-किसान (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) की 24वीं किस्त का इंतजार जारी है। केंद्र ने भुगतान की तारीख घोषित नहीं की है। योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल से राशि जारी की थी।
उस समय 18,880 करोड़ रुपए से अधिक राशि भेजी गई। इससे लगभग 9.44 करोड़ पात्र किसानों को लाभ मिला। इन लाभार्थियों में 2.18 करोड़ से अधिक महिला किसान शामिल थीं। रकम सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई।
उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने अक्टूबर की संभावना जताई है। यह केवल संभावित समय है। चार महीने के सामान्य अंतराल से भी अक्टूबर का अनुमान लगाया जा रहा है। अंतिम तारीख केंद्र सरकार ही घोषित करेगी। किसानों को किसी अपुष्ट तारीख पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आधिकारिक सूचना पोर्टल और कृषि मंत्रालय से जारी होगी।
योजना में कितनी सहायता
योजना के तहत पात्र परिवारों को छह हजार रुपए सालाना मिलते हैं। केंद्र सरकार इसका पूरा खर्च उठाती है। रकम डीबीटी (Direct Benefit Transfer) व्यवस्था से बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे भुगतान सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।
योजना 24 फरवरी 2019 को शुरू की गई थी। इसका संचालन दिसंबर 2018 से प्रभावी माना गया था। इसका उद्देश्य भूमिधारक किसान परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। रकम खेती की छोटी जरूरतों में मदद करती है।
किसान इससे बीज, खाद और दूसरे कृषि साधन खरीद सकते हैं। यह पूरी खेती लागत का विकल्प नहीं है। फिर भी बुवाई के समय यह रकम उपयोगी साबित होती है। छोटे किसानों को तत्काल नकदी की जरूरत अक्सर रहती है।
सरकार ने योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इससे योजना की निरंतरता को मंजूरी मिली है। इस मंजूरी में सालाना राशि बढ़ाकर 10 हजार रुपए नहीं की गई। इसलिए दोनों फैसलों को अलग समझना चाहिए।
अब तक कितना पैसा मिला
केंद्रीय सरकारी आंकड़ों में 23 किस्तों की जानकारी उपलब्ध है। किसानों को 4.46 लाख करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। जुलाई 2026 के सरकारी आंकड़ों में रकम 4.47 लाख करोड़ बताई गई। बाद में आंकड़े अपडेट होने से यह अंतर आया।
सरकार के मुताबिक योजना बड़ी प्रत्यक्ष भुगतान पहलों में शामिल है। राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पहुंचाई जाती है। महिला किसानों की भागीदारी भी लगातार महत्वपूर्ण रही है। लगभग हर चार लाभार्थियों में एक महिला बताई गई है।
सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान भी भुगतान जारी रखा था। उस अवधि में 1.71 लाख करोड़ रुपए से अधिक दिए गए। केंद्रीय बजट 2026-27 में योजना के लिए 60 हजार करोड़ रुपए रखे गए। यह राशि मौजूदा सहायता व्यवस्था के लिए मंजूर हुई।
किस्त पाने के जरूरी काम
अगली किस्त पाने के लिए किसानों की जानकारी सही होनी चाहिए। भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा होना जरूरी है। बैंक खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए। नाम और जन्मतिथि में अंतर होने पर भुगतान रुक सकता है।
लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी (Electronic Know Your Customer) भी जरूरी है। इसे आधिकारिक पोर्टल पर पूरा किया जा सकता है। आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर उपलब्ध होने पर ऑनलाइन सत्यापन संभव है। किसान नजदीकी सेवा केंद्र भी जा सकते हैं।
बायोमेट्रिक सत्यापन की सुविधा सेवा केंद्रों पर मिल सकती है। इसके लिए तय शुल्क की रसीद जरूर लेनी चाहिए। किसान अपना पंजीकरण नंबर सुरक्षित रखें। इसी नंबर से भुगतान और लाभार्थी स्थिति जांची जाती है।
लाभार्थी स्टेटस कैसे देखें
किसान सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। वहां किसान कॉर्नर में स्थिति जांचने का विकल्प मिलता है। पंजीकरण नंबर और सुरक्षा कोड दर्ज करना पड़ सकता है। इसके बाद भुगतान की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देती है।
पंजीकरण नंबर भूलने पर उसे खोजने का विकल्प मिलता है। आधार या पंजीकृत मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ सकती है। लाभार्थी सूची भी गांव के आधार पर देखी जा सकती है। इसके लिए राज्य, जिला और ब्लॉक चुनना होता है।
सूची में नाम नहीं मिलने पर स्थानीय कृषि कार्यालय जाएं। बैंक और भूमि रिकॉर्ड की जानकारी भी दोबारा जांचें। गलत जानकारी मिलने पर सुधार आवेदन जमा किया जा सकता है। आवेदन की रसीद और संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
किन लोगों को लाभ नहीं मिलता
यह योजना सभी नागरिकों के लिए नहीं है। पात्रता भूमि और परिवार की स्थिति पर निर्भर करती है। संस्थागत भूमि मालिक योजना का लाभ नहीं ले सकते। संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्ति भी बाहर रखे गए हैं।
केंद्र और राज्य के कुछ मौजूदा कर्मचारी पात्र नहीं होते। आयकर देने वाले लोगों पर भी रोक लागू है। डॉक्टर, इंजीनियर और वकील जैसे पेशेवर भी बाहर हो सकते हैं। पात्रता के विस्तृत नियम सरकारी दिशा-निर्देशों में उपलब्ध हैं।
किसानों को अभी क्या करना चाहिए
किसानों को फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए। 10 हजार रुपए की सहायता अभी केवल संभावना है। 24वीं किस्त की तारीख भी सरकार ने घोषित नहीं की है। अक्टूबर को संभावित समय बताया जा रहा है।
लाभार्थियों को ई-केवाईसी और आधार लिंकिंग तुरंत जांचनी चाहिए। बैंक खाते में नाम भी आधार से मेल खाना चाहिए। किसान लाभार्थी सूची में अपना नाम देख सकते हैं। भूमि रिकॉर्ड में बदलाव होने पर जानकारी अपडेट करानी चाहिए। सरकार सहायता बढ़ाती है तो आधिकारिक आदेश जारी होगा। इसके बाद नई किस्त व्यवस्था की सही तस्वीर सामने आएगी।
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