धान बेचने वाले किसानों के लिए इस बार नियम सख्त हो गए हैं। सरकार का मकसद खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। टोकन, मात्रा, सत्यापन और रिकॉर्ड, सब पर नई शर्तें जोड़ी गई हैं। सबसे बड़ी शर्त मात्रा से जुड़ी है। टोकन में जितना धान दर्ज होगा, उतना ही केंद्र पर लाना होगा। कम धान लाने पर किसान का रकबा घट सकता है।
टोकन में दर्ज मात्रा क्यों अहम
नए नियम में टोकन की मात्रा और लाई गई मात्रा का मिलान होगा। दोनों बराबर होने चाहिए। कम धान आने पर बचा हुआ रकबा निरस्त कर दिया जाएगा। निरस्त हुए रकबे का दोबारा टोकन नहीं कटेगा। यानी किसान उस जमीन का धान सरकारी खरीदी में नहीं बेच पाएगा। यह नियम किसानों के लिए सबसे अहम बदलाव माना जा सकता है।
एक उदाहरण से समझिए
21 क्विंटल प्रति एकड़ मानें, तो चार एकड़ का टोकन 84 क्विंटल का बनेगा। किसान सिर्फ 63 क्विंटल धान लाए, तो 21 क्विंटल की कमी रहेगी। यह कमी एक एकड़ के बराबर है। इसलिए उस एक एकड़ का रकबा निरस्त हो जाएगा। बाकी तीन एकड़ का धान खरीदा जा सकेगा।
टोकन कितने मिलेंगे
टोकन की संख्या रकबे के हिसाब से तय होगी। दो एकड़ तक के किसान को एक टोकन मिलेगा। इससे बड़े रकबे पर अधिकतम तीन टोकन जारी हो सकते हैं। अगर दो टोकन बनते हैं, तो कुल मात्रा 50 और 50 प्रतिशत में बंटेगी। तीन टोकन बनने पर मात्रा 33, 33 और 34 प्रतिशत में बांटी जाएगी।
तय तारीख पर न पहुंचे तो
टोकन में एक तारीख होती है। किसान उस दिन केंद्र न पहुंचे, तो अगले दिन सॉफ्टवेयर टोकन हटा देगा। किसान को एक बार टोकन दोबारा जारी कराने का मौका मिलेगा। दूसरी बार भी टोकन हटा, तो वह रकबा स्थायी रूप से निरस्त होगा। यानी दो बार चूकने की गुंजाइश नहीं है। किसान इसलिए तारीख को गंभीरता से लें। खेत से धान लाने की तैयारी पहले कर लें।
बायोमीट्रिक सत्यापन जरूरी
इस बार बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अंगूठे के निशान या आंखों के स्कैन से पहचान जांची जाएगी। सत्यापन पूरा होने के बाद ही धान खरीदा जाएगा। खरीदी का पूरा ब्योरा तुरंत डेटाबेस में दर्ज होगा। इससे बाद में नई एंट्री की गुंजाइश नहीं रहेगी। खबर के मुताबिक इसका मकसद गड़बड़ी रोकना है।
धान खरीदी में एग्रीस्टैक से पंजीयन
धान खरीदी में एग्रीस्टैक (Agristack) आधारित पंजीयन लागू होगा। इसका मकसद एक ही जमीन पर दोबारा धान बेचने की गड़बड़ी रोकना है। खबर में इसे रिसाइक्लिंग जैसी गड़बड़ी कहा गया है।
किसान की अलग अलग गांवों की जमीन की जानकारी ऑनलाइन दिखेगी। किसी खसरे पर टोकन जारी होते ही सॉफ्टवेयर उस पर टिक मार्क लगा देगा। फिर उसी जमीन पर दोबारा बिक्री नहीं हो सकेगी।
टोकन कैसे जारी होंगे
कुल टोकन का 70 फीसदी मोबाइल ऐप से जारी होगा। बाकी 30 फीसदी टोकन समितियों के जरिए दिए जाएंगे। यानी किसान ऐप से भी टोकन ले सकेंगे और समिति से भी। पूरी व्यवस्था का नियंत्रण राजधानी रायपुर से रहेगा। एमएसपी (Minimum Support Price) कॉमन ग्रेड धान पर 2,441 रुपए प्रति क्विंटल है। ग्रेड ए धान पर यह 2,461 रुपए प्रति क्विंटल है।
सियासी बयान पहले आया था
इसी मुद्दे पर 22 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान आया था। उन्होंने एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग रखी थी। सरकार की तरफ से तब कोई जवाब सामने नहीं आया था। नए नियमों वाली खबर में विपक्ष या किसान संगठनों की प्रतिक्रिया नहीं है।
किसानों के लिए क्या मायने
किसान टोकन में दर्ज मात्रा का ध्यान रखें। केंद्र पर कम धान ले जाने से रकबा कट सकता है। तय तारीख पर पहुंचना भी जरूरी है। अपना एग्रीस्टैक पंजीयन और जमीन का रिकॉर्ड पहले जांच लें। बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए खुद केंद्र पर मौजूद रहना पड़ सकता है। नियमों के बारे में अपनी समिति या कृषि विभाग से पक्की जानकारी लें।
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