छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों के लिए बोनस को लेकर अहम फैसला हुआ है। राज्य सरकार ने बोनस की गणना का आधार बढ़ा दिया है। पहले इसकी गणना 355 रुपए प्रति क्विंटल के आधार पर होती थी। अब यह आधार बढ़ाकर 425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस बदलाव से गन्ना बेचने वाले किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
खासतौर पर कबीरधाम जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने से जुड़े किसानों को फायदा होगा। इस कारखाने के 14,961 किसानों को करीब 24.55 करोड़ रुपए बोनस मिलने का अनुमान है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने लिया है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों का भी इसमें उल्लेख किया गया है। बढ़ी हुई दर से किसानों को खेती के खर्च में मदद मिल सकती है।
भोरमदेव कारखाने के किसानों को लाभ
कवर्धा स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, राम्हेपुर से जुड़े किसानों को इसका लाभ मिलेगा। ये किसान पेराई सत्र 2025-26 में कारखाने को गन्ना बेच चुके हैं। इस सत्र में कारखाने ने कुल 25,58,188 क्विंटल गन्ने की पेराई की।
बढ़ी हुई गणना के अनुसार, किसानों को 95.95 रुपए प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। कुल पेराई की मात्रा पर यह राशि करीब 24.55 करोड़ रुपए बनती है। इस तरह कारखाने को गन्ना देने वाले 14,961 किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है। यह राशि किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता साबित हो सकती है।
बोनस की गणना कैसे होगी?
गन्ना बोनस की राशि समझने के लिए गणना का आधार जानना जरूरी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उचित और लाभकारी कीमत (Fair and Remunerative Price, FRP) 329.05 रुपए प्रति क्विंटल ली गई है।
सरकार ने बोनस गणना का आधार 425 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें से 329.05 रुपए घटाने पर 95.95 रुपए बचते हैं। यही राशि प्रति क्विंटल बोनस की दर बनती है।
उदाहरण के लिए, यदि गणना के लिए किसी किसान के 100 क्विंटल गन्ने को लिया जाए, तो बोनस 9,595 रुपए बनेगा। यह उदाहरण केवल गणना समझाने के लिए है। वास्तविक भुगतान संबंधित किसान की पात्र मात्रा और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
इस फैसले से पहले बोनस का आधार 355 रुपए प्रति क्विंटल था। अब इसे 425 रुपए करने से गणना में 70 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों को मिलने वाली बोनस राशि में भी बढ़ोतरी होगी।
प्रदेश के 31 हजार किसानों को लाभ
इस फैसले का लाभ केवल भोरमदेव कारखाने तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ के चार सहकारी शक्कर कारखानों में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान कुल 53,25,120 क्विंटल गन्ने की पेराई हुई।
इस कुल मात्रा के आधार पर प्रदेश के 31,022 गन्ना विक्रेता किसानों को करीब 51.09 करोड़ रुपए बोनस मिलने का अनुमान है। यानी सरकार के फैसले का असर राज्य के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों पर पड़ेगा।
भोरमदेव कारखाने के लिए तय 24.55 करोड़ रुपए इसी राज्यव्यापी बोनस राशि का हिस्सा हैं। दोनों आंकड़ों को अलग-अलग योजनाओं की राशि समझना सही नहीं होगा। राज्य के कुल आंकड़े में भोरमदेव कारखाने का हिस्सा भी शामिल है।
किसानों को कैसे मिलेगी राहत?
गन्ना उत्पादन में किसान को कई स्तरों पर खर्च उठाना पड़ता है। खेत की तैयारी से लेकर कटाई और परिवहन तक लागत लगती है। गन्ने की खेती में समय और श्रम भी अधिक लगता है।
बोनस की बढ़ी हुई दर किसानों को इस लागत का कुछ हिस्सा संभालने में मदद कर सकती है। किसान इस राशि का उपयोग आगामी फसल की तैयारी में कर सकते हैं। समय पर कृषि कार्य कराने में भी अतिरिक्त रकम सहायक हो सकती है।
राज्य सरकार के इस फैसले से गन्ना उत्पादकों को अतिरिक्त राशि मिलने का रास्ता साफ हुआ है। लेकिन किसानों को अपने भुगतान से जुड़ी आधिकारिक जानकारी भी देखनी चाहिए। संबंधित सहकारी कारखाने से राशि और भुगतान की स्थिति की पुष्टि की जा सकती है।
सरकार ने क्या संदेश दिया?
राज्य सरकार ने बोनस का आधार बढ़ाकर गन्ना उत्पादकों को राहत देने का प्रयास किया है। फैसले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों का उल्लेख है। किसानों ने इस निर्णय पर मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। कबीरधाम जिले के गन्ना किसानों में खुशी का माहौल है।
इस फैसले का असर केवल बोनस राशि तक सीमित नहीं रह सकता। बेहतर भुगतान से किसानों को आगामी खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।
फिर भी गन्ना खेती की लंबे समय की मजबूती के लिए समय पर भुगतान जरूरी है। इसके साथ उत्पादन लागत, उपज और कारखानों की कार्यक्षमता भी महत्वपूर्ण हैं। किसानों के हित में इन सभी पहलुओं पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।
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