किसान की बात,सूत्र के साथ

मध्यप्रदेश में धान, ज्वार, बाजरा समर्थन मूल्य पंजीयन 15 सितंबर से शुरू, किसानों को कराना होगा अनुबंध

newz@gmail.com | Sep 3, 2026, 16:16 IST

मध्यप्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक होगा। सिकमी-बटाईदार किसानों को 15 सितंबर से पहले अनुबंध कराना जरूरी है, वरना पंजीयन मान्य नहीं होगा।

dhan-jwar-bajra-samarthan-mulya-panjiyan

मध्यप्रदेश में इस साल किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का मौका मिलेगा। राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पंजीयन की तारीखें तय कर दी हैं। धान, ज्वार और बाजरा उगाने वाले किसान अब 15 सितंबर से अपना पंजीयन करा सकेंगे। यह प्रक्रिया 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।

पंजीयन कैसे होगा

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इसकी जानकारी दी है। विभाग के उप सचिव के अनुसार पंजीयन की कार्यवाही तय समय सीमा में ही होगी। इसमें कई तरह के किसान शामिल किए जाएंगे। भूमि स्वामी किसानों के अलावा सिकमी और बटाईदार किसान भी पंजीयन करा सकेंगे। कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों को भी इस दायरे में रखा गया है। पुराने पंजीयन में डाटा सुधार का मौका भी दिया जाएगा। साथ ही पंजीयन का सत्यापन भी किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी करने की बात कही गई है।

सिकमी बटाईदार किसानों के लिए जरूरी शर्त

सिकमी और बटाईदार किसानों के लिए एक खास नियम बनाया गया है। ऐसे किसान जो दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं, उन्हें अनुबंध कराना होगा। यह अनुबंध जमीन के असली मालिक और बटाईदार किसान के बीच होगा। इसके लिए मध्यप्रदेश भूमिस्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक 2016 का प्रारूप इस्तेमाल होगा। यह कानून दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करता है। नियम के अनुसार अनुबंध की अधिकतम अवधि 5 साल तक हो सकती है। यानी एक बार अनुबंध होने पर किसान पांच साल तक इसका फायदा ले सकता है।

15 सितंबर से पहले अनुबंध जरूरी

इस साल जिन किसानों ने सिकमी या बटाई की जमीन पर धान, ज्वार या बाजरा बोया है, उनके लिए एक शर्त है। अगर वे अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचना चाहते हैं, तो पहले अनुबंध कराना जरूरी है। यह अनुबंध तीन प्रतियों में तैयार कराना होगा। साथ ही यह काम जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह दी गई है। विभाग ने साफ कहा है कि यह अनुबंध 15 सितंबर 2026 से पहले पूरा हो जाना चाहिए। तय तारीख के बाद बनने वाला कोई भी अनुबंध इस साल मान्य नहीं होगा। ऐसे किसानों का पंजीयन नहीं हो पाएगा और वे समर्थन मूल्य पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे।

देरी करने पर किसानों को होगा नुकसान

विभाग ने इस बात पर खास जोर दिया है कि समय सीमा का पालन बेहद जरूरी है। 15 सितंबर के बाद निष्पादित कोई भी सिकमी-बटाई अनुबंध इस साल काम नहीं आएगा। ऐसे किसान न तो पंजीयन करा पाएंगे और न ही धान, ज्वार या बाजरा समर्थन मूल्य पर बेच पाएंगे। इससे उन्हें बाजार भाव पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ेगी, जो अक्सर समर्थन मूल्य से कम होता है। इसलिए विभाग ने संबंधित किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अनुबंध की प्रक्रिया पूरी करा लें। जो किसान पहले से जागरूक हैं, वे जल्दी अनुबंध बनवाकर पंजीयन की तैयारी कर सकते हैं।

तय केंद्रों पर अपनी जानकारी दर्ज कराएं

15 सितंबर से पंजीयन शुरू होने के बाद किसानों को तय केंद्रों पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। भूमि स्वामी किसानों को अपने दस्तावेज साथ रखने होंगे। सिकमी-बटाईदार किसानों को अनुबंध की कॉपी दिखानी जरूरी होगी। पंजीयन के बाद ही किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के हकदार बनेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना का फायदा उठाएं।

ये खबरें भी पढ़ें…

एमपी में किसानों को 10 घंटे बिजली, बलराम जयंती पर सीएम मोहन यादव ने किसानों के लिए की कई घोषणाएं

समंदर से दूर MP में बनेगा पोर्ट, किसानों की उपज रेल से पहुंचेगी मुंबई और फिर दुनिया तक

कंधे से हल उतरा, हाथ में मोबाइल, बंडी खूंटी पर टंगी… अब खेतों में जींस वाले किसान

टमाटर की खेती से किसान अमित जैन ने खड़ा किया 8 करोड़ का कारोबार

GENERAL newz@gmail.com

Read more