@ संजय शर्मा, भोपाल. मध्यप्रदेश के किसान का गेहूं, चावल, सोयाबीन, दाल और दूसरी कृषि उपज अब देश के बाजार तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में एक बड़ा लॉजिस्टिक्स हब तैयार किया जा रहा है। यह हब नर्मदापुरम के पवारखेड़ा में 88.3 एकड़ जमीन पर विकसित होगा। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने दुबई की वैश्विक कंपनी डीपी वर्ल्ड के साथ समझौता किया है। यह समझौता जनवरी 2026 में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच के दौरान मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ था। अब यह योजना जमीन पर आकार ले रही है।
समझिए… आखिर पवारखेड़ा में ऐसा क्या बनेगा
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसान सूत्र को बताया कि अभी किसी किसान या व्यापारी को अपनी कृषि उपज दूसरे देशों तक भेजने के लिए कई स्तर की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। पवारखेड़ा में पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पोर्ट जैसी सुविधाओं वाला इनलैंड लॉजिस्टिक्स हब तैयार किया जाएगा।
यहां बड़े गोदाम होंगे। कोल्ड स्टोरेज होंगे। कंटेनर यार्ड होगा। उपज की सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग की सुविधा होगी। कंटेनरों के रखरखाव के लिए वर्कशॉप होगा। कार्गो कंसॉलिडेशन की सुविधा होगी। खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग की इकाइयां भी लगाई जा सकेंगी। यानी किसान की उपज को बाजार तक भेजने की कई जरूरी सुविधाएं एक जगह मिलेंगी।
पवारखेड़ा से मुंबई और फिर दुनिया तक कैसे पहुंचेगा अनाज
इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए नर्मदापुरम, सीहोर या रायसेन का किसान गेहूं या सोयाबीन बेचता है। यह उपज पवारखेड़ा के लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंचेगी। यहां उसे व्यवस्थित तरीके से भंडारण, ग्रेडिंग, पैकिंग और कंटेनर में लोड किया जा सकेगा। इसके बाद कंटेनर रेल के जरिए मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (न्हावा शेवा) कंटेनर टर्मिनल तक जाएगा। वहां से यही माल समुद्री मार्ग के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों तक भेजा जा सकेगा। यानी मध्यप्रदेश समुद्र से दूर है, लेकिन पवारखेड़ा का यह इनलैंड गेटवे प्रदेश की कृषि उपज को समुद्री बंदरगाह से जोड़ने का काम करेगा।
अभी सप्ताह में दो दिन चल रही कंटेनर रेल
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एदल सिंह कंषाना के अनुसार परियोजना की औपचारिक शुरुआत के तौर पर फिलहाल कंटेनर रेल सेवा सप्ताह में दो बार संचालित की जा रही है। अगले चरण में इसे बढ़ाकर सप्ताह के सातों दिन चलाने की तैयारी है। इसका सीधा फायदा रेल मार्ग से जुड़े क्षेत्रों को मिलेगा। इनमें भोपाल, मंडीदीप, इटारसी, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर और पिपरिया सहित मध्य क्षेत्र शामिल हैं।
किसान को सबसे बड़ा फायदा कहां होगा
किसान के लिए इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ इतना नहीं है कि उसकी उपज विदेश जा सकेगी। असली फायदा भंडारण, बेहतर लॉजिस्टिक्स और नए बाजारों तक पहुंच से जुड़ा है। हब में आधुनिक और तापमान नियंत्रित कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे। इससे फल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
अभी कई बार किसान के सामने ऐसी स्थिति आती है कि उपज जल्दी खराब होने वाली है, इसलिए उसे तुरंत बेचनी पड़ती है। इससे उसे कम कीमत पर भी माल बेचना पड़ सकता है। कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध होने पर उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और बेहतर कीमत मिलने तक बेचने का विकल्प रहेगा। डीपी वर्ल्ड के अनुमान के मुताबिक, मजबूत कोल्ड चेन से खराब होने वाली कृषि उपज का नुकसान 20 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
रेल से माल मुंबई पहुंचेगा जल्दी
मंत्री कंषाना ने बताया कि इस परियोजना का बड़ा फायदा परिवहन के समय को लेकर भी है। डीपी वर्ल्ड के अनुमान के मुताबिक, सड़क परिवहन की तुलना में रेल के जरिए माल पहुंचाने में लगने वाला समय 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इससे परिवहन व्यवस्था तेज होगी और कृषि उत्पादों को मुंबई के बंदरगाह तक पहुंचाना आसान होगा।
कौन-कौन सी उपज को मिल सकता है नया बाजार
इस परियोजना से बासमती चावल, गेहूं, सोयाबीन और दालों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके साथ ही फल, सब्जियां और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए भी नए बाजार खुल सकते हैं। यानी खेत में पैदा होने वाली उपज को सिर्फ स्थानीय मंडी या देश के बाजार तक ले जाने के बजाय निर्यात और बड़े बाजारों से जोड़ने की व्यवस्था तैयार होगी।
किसान अकेले नहीं, FPO के जरिए भी जुड़ सकेगा
कृषि मंत्री का कहना है कि पूरी व्यवस्था में किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसान अकेले छोटी मात्रा में उपज बेचने के बजाय FPO के माध्यम से बड़ी मात्रा में कृषि उपज एकत्र कर सकते हैं। इसके बाद FPO की निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के साथ कारोबार की संभावना बनेगी। इससे किसानों को बड़े खरीदारों और नए बाजारों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
पवारखेड़ा में पूरा कृषि कारोबार इको सिस्टम
परियोजना का दायरा केवल भंडारण तक सीमित नहीं रहेगा। करीब 25 एकड़ जमीन परियोजना के विस्तार के लिए लीज पर दी जाएगी। कारोबारियों को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी होगी। यहां खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्माण इकाइयां लगाने का प्रस्ताव है। कृषि उत्पादों को एक जगह इकट्ठा करने वाले केंद्र भी बनाए जा सकेंगे। इससे पवारखेड़ा के आसपास कृषि आधारित कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
क्या डीपी वर्ल्ड सीधे किसान से उपज खरीदेगा
नहीं। ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। यह समझना जरूरी है कि डीपी वर्ल्ड की भूमिका यहां मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स और उससे जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। किसानों को लाभ FPO, निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के माध्यम से मिलेगा। किसान को वास्तविक आर्थिक फायदा कितना होगा, यह आगे चलकर भंडारण शुल्क, खरीदारों की उपलब्धता और रेल सेवाओं जैसी चीजों पर निर्भर करेगा।
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