मध्य प्रदेश में नकली खाद की बिक्री का मामला सामने आया है। भिंड जिले के किसानों ने 83 बोरी नकली डीएपी खाद पकड़वाई। यह खाद अमायन क्षेत्र में बेची जा रही थी। मामले में कृषि विभाग की टीम ने कार्रवाई की। नकली खाद केवल अटेर क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। इसकी सप्लाई भारौली और अमायन इलाके तक भी पहुंची थी। किसानों की शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की। इस कार्रवाई में कथित सप्लायर को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।
इस मामले ने खाद की गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। डीएपी किसानों के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक है। किसान इसका इस्तेमाल फसलों को जरूरी पोषक तत्व देने के लिए करते हैं। ऐसे में नकली खाद मिलने से फसल और खेती की लागत प्रभावित हो सकती है।
अमायन मंडी में कैसे पकड़ी खाद?
नकली खाद अमायन की सरकारी कृषि उपज मंडी में रखी गई थी। वहां इसे ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर बेचने की बात सामने आई। किसानों ने खाद की गुणवत्ता पर संदेह जताया और अधिकारियों को जानकारी दी।
किसानों की निशानदेही पर कृषि विभाग की टीम अमायन पहुंची। टीम ने मौके पर जांच की और खाद की बोरियों को जब्त कराया। इस दौरान नकली खाद की बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच भी शुरू हुई।
सप्लायर तक ऐसे पहुंची टीम
मिली जानकारी के मुताबिक, कृषि विभाग की टीम ने सप्लायर को बुलाने की कोशिश की। उप संचालक कृषि रामसुजान शर्मा अपनी टीम के साथ भारौली खुर्द पहुंचे। किसानों की निशानदेही पर संदिग्ध व्यक्ति को बुलाया गया, लेकिन वह शुरुआत में नहीं आया। इसके बाद अधिकारियों ने किसानों से फोन करवाकर तत्काल 20 बोरी डीएपी लाने को कहा। इस सूचना के बाद जितेंद्र नाम का व्यक्ति वहां पहुंचा। टीम ने उसे घेरकर पूछताछ की।
जितेंद्र के हवाले से बताया गया कि उसके ड्राइवर राघवेंद्र और महादेव गुर्जर भी इस मामले में शामिल थे। उसने कथित तौर पर नकली खाद दतिया के पप्पू गुर्जर से खरीदने की बात स्वीकार की। हालांकि मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
दतिया और मुरैना तक जुड़े तार
इस मामले में दतिया और मुरैना का नाम भी सामने आया है। नकली खाद की सप्लाई का नेटवर्क इन जिलों से जुड़ा हो सकता है। जांच में कथित सप्लायर और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक सकराया में एपीएस की 600 बोरियां मिली थीं। इनमें नकली डीएपी के भीतर राख जैसे बुरादे से बनी गोलियां मिलने की बात कही गई है। यह विवरण खाद की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कथित नेटवर्क के विस्तार की पुष्टि होने पर दूसरे क्षेत्रों में भी जांच की जरूरत पड़ सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि खाद कहां तैयार हुई और किन रास्तों से पहुंची। साथ ही, यह भी जांचना होगा कि कितने किसानों ने इसे खरीदा।
कलेक्टर बोले- आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी
भिंड कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना के मुताबिक, नकली खाद बेचने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। प्रशासन मामले को गंभीरता से ले रहा है।
किसानों के लिए जरूरी है कि वे संदिग्ध खाद की शिकायत तुरंत कृषि विभाग को दें। खाद की बोरी, बिल और खरीद से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। इससे जांच के दौरान जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
नकली डीएपी से किसानों को नुकसान
डीएपी का पूरा नाम डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (Diammonium Phosphate) है। यह फसलों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराने वाला उर्वरक है। किसान इसका इस्तेमाल फसल की शुरुआती बढ़वार और जड़ों के विकास में मदद के लिए करते हैं।
अगर खाद में जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में नहीं हों, तो फसल को अपेक्षित पोषण नहीं मिल सकता। इससे पौधों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। किसान खाद खरीदने पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन नकली उत्पाद से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।
नकली खाद के कारण किसान को दोहरा नुकसान हो सकता है। पहला नुकसान खाद खरीदने में खर्च हुई रकम का है। दूसरा नुकसान फसल की कमजोर बढ़वार या कम उत्पादन से हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान खेत, फसल और इस्तेमाल किए गए उत्पाद की जांच पर निर्भर करेगा।
किसान असली खाद की पहचान कैसे करें?
किसानों को खाद खरीदते समय अधिकृत विक्रेता को प्राथमिकता देनी चाहिए। खरीद का पक्का बिल लेना भी जरूरी है। बोरी पर उत्पाद का नाम, निर्माता, बैच नंबर और अन्य जरूरी विवरण जांचें।
सिर्फ बोरी के रंग या खाद के दानों को देखकर उसकी असलियत तय नहीं की जा सकती। संदेह होने पर कृषि विभाग से जांच कराने का अनुरोध करें। खाद की गुणवत्ता का सही आकलन निर्धारित जांच से ही किया जाना चाहिए।
यदि किसान को नकली खाद मिलने का संदेह हो, तो वह तुरंत स्थानीय कृषि अधिकारी को जानकारी दे सकता है। शिकायत के साथ बिल, बोरी और उपलब्ध तस्वीरें संभालकर रखें। संदिग्ध खाद को खेत में इस्तेमाल करने से पहले अधिकारियों की सलाह लेना बेहतर होगा।
इस मामले में जांच का अगला अहम कदम खाद के नमूनों की पुष्टि और सप्लाई नेटवर्क की पहचान होगा। इससे किसानों को हुए संभावित नुकसान और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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