सरकार ने किसानों के लिए फार्म पॉन्ड निर्माण योजना लागू की है। कच्चे तालाब पर 60 से 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। प्लास्टिक लाइनिंग वाले तालाब पर 90 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलेगा। योजना के लिए कम से कम 0.5 हेक्टेयर जमीन जरूरी है। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल या ई-मित्र केंद्र के जरिए किया जा सकता है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराने के मकसद से राजस्थान सरकार ने फार्म पॉन्ड यानी खेत तालाब निर्माण योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया है। इस योजना के तहत किसानों को खेतों में वर्षा जल संचयन के लिए फार्म पॉन्ड बनाने पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। कृषि विभाग का मानना है कि यह योजना जल संकट वाले क्षेत्रों में खेती को ज्यादा लाभकारी और टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
कृषि विभाग के मुताबिक कच्चे फार्म पॉन्ड के निर्माण पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु और सीमांत किसानों को इकाई लागत का 70 फीसदी तक अनुदान मिलेगा। वहीं अन्य श्रेणी के किसानों को इस पर 60 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा प्लास्टिक लाइनिंग वाले फार्म पॉन्ड के निर्माण पर सभी पात्र किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। प्लास्टिक लाइनिंग से तालाब में पानी लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगा और रिसाव की समस्या भी कम होगी।
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के पास कम से कम 0.5 हेक्टेयर कृषि भूमि होना जरूरी है। किसान अपने नाम दर्ज जमीन पर ही फार्म पॉन्ड बनवा सकेंगे। योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी ई-मित्र केंद्र के जरिए किया जा सकता। आवेदन के समय जमाबंदी, आधार कार्ड, जनाधार कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज देने होंगे।
खेत तालाब योजना में आवेदन कैसे करें?
इस योजना में ई-मित्र केंद्र से भी आवेदन किया जा सकता है और किसान अपने मोबाइल से भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकता। इसके लिए राज किसान साथी पोर्टल पर लॉगिंग करें। इसके बाद कृषि विभाग की सेवाओं में “खेत तलाई” विकल्प चुनें। और मांगी जानकारी जैसे की जमीन और किसान संबंधी जानकारी भरें। और आवश्यक जानकारी/दस्तावेज ऑनलाइन दर्ज करके आवेदन सबमिट करें।
किसानों के लिए फायदे का सौदा
फार्म पॉन्ड के जरिए उन्नत खेती कर रहे एक किसान जवान सिंह ने बताया कि फार्म पॉन्ड वर्षा जल संरक्षित करने का एक कारगर तरीका है। उनके मुताबिक इससे किसान बारिश के पानी को स्टोर कर जरूरत के समय फसलों की सिंचाई कर सकते हैं। जवान सिंह ने बताया कि खेत तालाबों के जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का बेहतर इस्तेमाल भी संभव हो सकेगा। इससे भूजल पर निर्भरता कम होगी और जल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।
लागत घटेगी, आय बढ़ेगी
कृषि विभाग किसानों को इस योजना का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के लिए जागरूक कर रहा है। विभाग के मुताबिक बदलते मौसम और अनिश्चित बारिश के हालात में फार्म पॉन्ड खेती के लिए एक सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं। इससे सिंचाई की समस्या तो हल होगी ही, साथ ही फसल उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
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