राजधानी भोपाल के दो इंजीनियरों ने नौकरी छोड़कर बकरी पालन चुना। आज वे लाखों कमा रहे हैं। उनका फार्म देश में मिसाल बन गया है। यह कहानी है गोकुल एग्रोनॉमिक्स गोट फार्म की।
यह फार्म भोपाल में बिशखेड़ी, भदभदा रोड पर स्थित है। इसकी शुरुआत बहुत छोटी थी। एक छोटे से शेड और सिर्फ 18 देशी बकरियों से काम शुरू हुआ था।शुरू में अनुभव बिल्कुल नहीं था। संचालकों ने धीरे-धीरे सीखा। खुद मेहनत की जिससे जोखिम कम रहा। इसे अब 15 साल से ज्यादा हो गए हैं। फार्म सफलतापूर्वक चल रहा है। यहां सिरोही, बरबरी, बीटल, सोजत और गूजरी जैसी बेहतरीन नस्लें मिलती हैं। अच्छे ब्रीडर भी उपलब्ध हैं।
शर्म के कारण छिपाकर शुरू किया गोट फार्म
फार्म के संचालक हैं हेमंत माथुर और प्रवीण गुप्ता। दोनों पहले टेलीकॉम कंपनी में काम करते थे। बकरी पालन शुरू करते समय उन्हें डर था। उन्हें लगा कि परिवार और दोस्त मजाक उड़ाएंगे।इसलिए उन्होंने यह बात सबसे छिपा ली। सालों तक किसी को नहीं बताया। शुरू में सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा किया। इससे कई बार नुकसान भी हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सब्र और मेहनत से काम जारी रखा। आज वही फार्म लाभ का बिजनेस मॉडल बन गया है। हर साल लाखों का मुनाफा हो रहा है।
डबल मुनाफा, लेकिन लापरवाही पड़ेगी भारी
हेमंत और प्रवीण कहते हैं, बकरी पालन दोगुना मुनाफा देता है। लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही है। बकरी एक जीव है। मौसम बदलने पर बीमारी लगती है।अच्छी देखरेख जरूरी है। पोषण वाला चारा देना होता है। समय पर वैक्सीनेशन करना होता है। जरा सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा देती है। अगर सही देखभाल की जाए तो यह धंधा तगड़ा मुनाफा देता है।
नस्ल का चयन है सबसे जरूरी मंत्र
हेमंत माथुर बताते हैं, इस धंधे में नस्ल सबसे महत्वपूर्ण है। सही जगह से ली गई सही नस्ल ही टिकती है। गलत नस्ल लेने पर नुकसान होता है।अच्छी नस्ल की बकरी जैसे सिरोही, बरबरी और गूजरी 14 महीने में दो बार बच्चे देती है। इससे फार्म तेजी से बढ़ता है। मुनाफे की गारंटी तय हो जाती है। इसलिए नए किसानों को नस्ल पर ध्यान देना चाहिए।
मैगनी से भी हर साल लाखों की कमाई
प्रवीण गुप्ता कहते हैं, यह धंधा हर तरफ से फायदा देता है। सिर्फ बकरी नहीं, उसकी मैगनी भी बिकती है। फार्म की सफाई के बाद मैगनी यानी बकरी की लीद को गड्ढे में जमा किया जाता है।इससे कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट बनाया जाता है। किसान इसे हाथों-हाथ खरीदते हैं। एक ट्रॉली तीन से चार हजार रुपए में बिकती है। हर साल फार्म से 100 से ज्यादा ट्रॉली कंपोस्ट बिकता है। यह अतिरिक्त कमाई है।
मां के दूध जैसा पौष्टिक है बकरी का दूध
बकरी के दूध की भी खूब मांग है। हेमंत बताते हैं, अभी वे खरीद-फरोख्त में व्यस्त हैं। इसलिए दूध को बड़े स्तर पर नहीं बेच पा रहे हैं।फिर भी गोट मिल्क की कीमत 110 से 150 रुपए लीटर तक है। बड़े शहरों में इसकी बहुत डिमांड है। गोट मिल्क से पनीर, चीज और दही भी बनता है। इसमें फालतू फैट नहीं होता। यह जल्दी पचता है। पौष्टिकता के कारण इसे मदर मिल्क भी कहते हैं। इसके अलावा फार्म पर दो दिन की ट्रेनिंग भी दी जाती है। नए पशुपालकों को देखरेख, खान-पान, वैक्सीन और बीमारी की पूरी जानकारी दी जाती है।
