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एमपी के विनोद की फसल विविधीकरण से बढ़ी कमाई, 10 एकड़ में अदरक, बैंगन और उड़द से पांच लाख की आय

Pawan Modiya | Oct 17, 2026, 11:35 IST

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के किसान विनोद कुमार मौर्य करीब 10 एकड़ में अदरक, बैंगन, सूरन और उड़द उगा रहे हैं। फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक खेती से उन्हें सालाना करीब चार से पांच लाख रुपए की आय होती है।

विनोद मौर्य

कटनी जिले में खेती का एक अलग मॉडल सामने आया है। कैमोर क्षेत्र के भैंसवाही गांव के किसान विनोद कुमार मौर्य इसे अपना रहे हैं। उन्होंने करीब 10 एकड़ जमीन पर अलग-अलग फसलों की खेती की है। उनके खेत में अदरक, बैंगन, सूरन और उड़द जैसी फसलें उगाई जाती हैं।

विनोद ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्प चुने हैं। इससे उनकी खेती में आमदनी के अलग-अलग रास्ते बनते हैं। किसान के अनुसार, इस तरीके से उन्हें हर साल करीब चार से पांच लाख रुपए की आय होती है।

फसल विविधीकरण से क्या फायदा?

फसल विविधीकरण का मतलब खेत में अलग-अलग फसलें उगाना है। किसान अपनी जमीन, पानी और मौसम के अनुसार फसलों का चुनाव कर सकते हैं। इससे पूरी खेती एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहती।

मान लीजिए, किसी एक फसल की कीमत बाजार में गिर जाती है। ऐसी स्थिति में दूसरी फसल से कुछ आमदनी मिल सकती है। इसी तरह, मौसम का असर सभी फसलों पर एक जैसा नहीं होता। अलग-अलग फसलों से नुकसान का जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है।

हालांकि, यह तरीका हर किसान के लिए समान परिणाम नहीं देता। फसलों का चुनाव स्थानीय मिट्टी, सिंचाई और बाजार की मांग देखकर करना चाहिए। अलग-अलग फसलों के लिए अलग देखभाल और खर्च की जरूरत भी हो सकती है। विनोद का मॉडल इसी सोच पर आधारित है। वे कई फसलों के जरिए खेत का उपयोग बढ़ा रहे हैं। इससे साल के दौरान कमाई के अलग अवसर मिल सकते हैं।

वैज्ञानिक खेती पर जोर

विनोद पारंपरिक खेती के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक भी अपनाते हैं। वे फसलों के चयन और प्रबंधन में वैज्ञानिक तरीकों पर ध्यान देते हैं। खेती को बेहतर बनाने के लिए बाजार की जरूरतों को समझना भी उनके मॉडल का हिस्सा है। किसान को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत संचालित योजना का लाभ भी मिला है।

वैज्ञानिक खेती का मतलब केवल नई मशीनों का इस्तेमाल करना नहीं है। इसमें सही बीज, समय पर बुवाई और संतुलित पोषण भी शामिल हैं। फसल के अनुसार सिंचाई और कीट प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हैं। इन फैसलों में स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह मददगार हो सकती है।

अधिकारियों ने खेत का निरीक्षण किया

मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026 के तहत जिले में विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी भैंसवाही गांव पहुंचे। उन्होंने विनोद के खेत में लगी फसलों को देखा। निरीक्षण में कटनी के कलेक्टर आशीष तिवारी शामिल थे। उनके साथ पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा भी पहुंचे। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरसिमरनप्रीत कौर और वनमंडलाधिकारी गर्वित गंगवार भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने किसान से खेती के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने अलग-अलग फसलों, उत्पादन, फसल प्रबंधन और आमदनी के बारे में जानकारी ली। किसान ने उन्हें अपने कृषि मॉडल की विशेषताएं बताईं। इस दौरे का उद्देश्य खेत में अपनाए जा रहे प्रयोगों को समझना था।

अधिकारियों ने देखा कि किसान कई फसलों के जरिए खेती कैसे कर रहे हैं। इस तरह के निरीक्षण से स्थानीय स्तर पर उपयोगी कृषि अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है।

कलेक्टर ने क्या कहा?

कलेक्टर आशीष तिवारी ने विनोद के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, ऐसी पद्धतियां टिकाऊ खेती की दिशा में भी मदद कर सकती हैं।

कलेक्टर ने दूसरे किसानों को भी वैज्ञानिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फसल विविधीकरण और कृषि नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

यह संदेश किसानों के लिए उपयोगी है। खेती में नई पद्धति अपनाने से पहले उसके फायदे और सीमाएं समझना जरूरी है। दूसरे किसान विनोद मौर्य के अनुभव से सीख सकते हैं। लेकिन अपने खेत में बदलाव करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए।

दूसरे किसान क्या सीख सकते हैं?

विनोद का मॉडल बताता है कि खेती में फसल चुनने का फैसला महत्वपूर्ण है। किसान अपनी जमीन के हिसाब से एक से अधिक फसलें अपनाने पर विचार कर सकते हैं। इससे आमदनी के विकल्प बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसके लिए सबसे पहले मिट्टी और पानी की उपलब्धता समझनी चाहिए। फिर ऐसी फसलें चुननी चाहिए, जिनकी स्थानीय बाजार में मांग हो। बुवाई से पहले बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई का अनुमानित खर्च भी जोड़ना चाहिए।

फसल विविधीकरण अपनाने का अर्थ बिना योजना कई फसलें लगाना नहीं है। हर फसल के लिए समय, देखभाल और बाजार की व्यवस्था जरूरी है। इसलिए किसान छोटे क्षेत्र में नई फसल का परीक्षण कर सकते हैं। अच्छे अनुभव के बाद ही खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर विचार करना बेहतर होगा।

विनोद की कहानी दूसरे किसानों को विकल्प तलाशने की प्रेरणा देती है। उनके खेत का मॉडल स्थानीय कृषि परिस्थितियों के संदर्भ में समझना उपयोगी होगा। इससे किसान अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

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