केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई है। यह बैठक नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में हुई। यह मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक थी। कृषि सचिव अतीश चंद्रा और वरिष्ठ अधिकारी इसमें मौजूद रहे।
चौहान ने कहा कि केवल कागजी प्रगति पर्याप्त नहीं होगी। योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचना सबसे जरूरी है। लगातार पीछे रहने वाले जिलों की अलग निगरानी होगी। उन्होंने प्रशासनिक सुस्ती को जल्द खत्म करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित मुख्यमंत्रियों से भी सीधे बातचीत होगी।
मंत्रालय के सभी विभागों की अब हर महीने समीक्षा होगी। राष्ट्रीय मिशनों के लिए भी मासिक लक्ष्य बनाए जाएंगे। इनमें वित्तीय और जमीनी कामकाज के लक्ष्य शामिल होंगे। मंत्री ने समय पर बजट खर्च करने पर जोर दिया। खर्च को वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों तक नहीं टाला जाएगा।
खेत बचाओ अभियान में क्या होगा
देशव्यापी खेत बचाओ अभियान 22 अक्टूबर से शुरू होगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार यह 30 नवंबर तक चलेगा। अभियान मिट्टी और पर्यावरण के संरक्षण पर केंद्रित रहेगा। इसमें पराली और फसल अवशेष प्रबंधन भी शामिल होगा। रासायनिक खाद के संतुलित इस्तेमाल पर किसानों को जानकारी मिलेगी।
कृषि वैज्ञानिक किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे। मैदानी कर्मचारी भी इस अभियान में उनके साथ रहेंगे। किसानों को मिट्टी जांच का सही तरीका बताया जाएगा। मिट्टी के जैविक तत्व बचाने की जानकारी भी दी जाएगी। पराली जलाने से होने वाले नुकसान समझाए जाएंगे। संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर व्यावहारिक सलाह मिलेगी। इसका उद्देश्य खेती की लागत और मिट्टी का नुकसान घटाना है।
पीएम-किसान सम्मान निधि योजना पर निर्देश
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की भी समीक्षा हुई। सभी पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के निर्देश मिले। अपात्र लोगों को लाभार्थी सूची से हटाया जाएगा। इससे सहायता सही किसानों तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
पीएम-आशा के तहत वास्तविक खरीद का मासिक आकलन होगा। पीएम-आशा का पूरा नाम प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान है। खरीद के दौरान होने वाली गड़बड़ी रोकने पर जोर दिया गया। निर्धारित खरीद अवधि बार-बार बढ़ाने की व्यवस्था भी जांची जाएगी। मंत्री ने तीन महीने की खरीद अवधि का पालन मांगा। इससे खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश होगी।
फसल बीमा में नामांकन बढ़ा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन बढ़ा है। चालू खरीफ में 2.83 करोड़ किसानों ने नामांकन कराया। पिछले खरीफ में यह संख्या 2.30 करोड़ थी। मंत्रालय के अनुसार इसमें 23 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। योजना में 2.97 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र बीमित हुआ है। कुल बीमित राशि 1.86 लाख करोड़ रुपए पहुंची है।
चौहान ने दावों के निपटारे में पारदर्शिता रखने को कहा। कोई दावा बिना कारण लंबित नहीं रखा जाएगा। किसानों की शिकायतें तय समय में सुलझाने के निर्देश मिले हैं।
फार्मर आईडी का भी विस्तार
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की प्रगति भी बैठक में रखी गई। सरकार ने 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण का लक्ष्य रखा है। अब तक 10.77 करोड़ से ज्यादा फार्मर आईडी बनी हैं। धीमे राज्यों में विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए।
चालू खरीफ में 26.73 करोड़ खेतों का डिजिटल सर्वे हुआ। इससे फसल और बुआई की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम भी आगे बढ़ा है। इसके तहत 80.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का नक्शा बना है। डिजिटल व्यवस्था का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचना जरूरी होगा। इसके साथ किसानों के निजी डेटा की सुरक्षा भी अहम रहेगी।
दलहन उत्पादन लक्ष्य पार
दलहन उत्पादन ने सरकारी लक्ष्य को पीछे छोड़ा है। वर्ष 2025-26 में लक्ष्य 266 लाख टन था। इसके मुकाबले उत्पादन 274.09 लाख टन रहा। दलहन का रकबा 286.46 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। इसका लक्ष्य 283 लाख हेक्टेयर रखा गया था।
तिलहन उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक रहा। उत्पादन 430.59 लाख टन दर्ज किया गया। इसका निर्धारित लक्ष्य 427 लाख टन था। तिलहन का रकबा 308.86 लाख हेक्टेयर रहा। घरेलू खाद्य तेल उत्पादन भी बढ़ा है। यह उत्पादन 2023-24 में 121.75 लाख टन था। वर्ष 2025-26 में यह 129.96 लाख टन पहुंचा।
प्राकृतिक खेती का दायरा
प्राकृतिक खेती से 20.93 लाख किसान जुड़े हैं। लक्ष्य 18.75 लाख किसानों को जोड़ने का था। योजना का क्षेत्र 10.32 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। इसका लक्ष्य 7.50 लाख हेक्टेयर था।
अब तक कुल 27.32 लाख किसान इससे जुड़े हैं। कुल क्षेत्र 12.85 लाख हेक्टेयर हो गया है। मिशन में 33,257 से अधिक कृषि सखियां तैनात हैं। कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन भी किसानों को जमीनी सहायता दे रहे हैं।
एफपीओ का कारोबार बढ़ा
एफपीओ (Farmer Producer Organisation) से 30.11 लाख किसान जुड़े हैं। योजना में 2.40 लाख अतिरिक्त किसानों को जोड़ने का लक्ष्य था। एफपीओ का औसत सालाना कारोबार काफी बढ़ा है। यह 38 लाख रुपए से बढ़कर 141.76 लाख रुपए हुआ। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 664 परियोजनाएं मंजूर हुईं। इनमें प्रयोगशालाएं, गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर शामिल हैं।
बीज उत्पादन और रकबा विस्तार की 303 परियोजनाएं भी शामिल हैं। कुल आवंटन 8,550 करोड़ रुपए रखा गया है। अब तक 3,151.80 करोड़ रुपए की प्रगति दर्ज हुई है। कृषि अवसंरचना कोष के तहत 2.25 लाख परियोजनाएं मंजूर हुईं। इनके लिए 1,01,502 करोड़ रुपए से अधिक ऋण स्वीकृत हुआ।
किसानों तक पहुंचेगी तकनीक
कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे। एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी भी इस टीम में शामिल होगी। इस संस्था को पहली बार आत्मा नाम से भी समझाया जाएगा। इसका उद्देश्य तकनीक और किसानों के बीच दूरी घटाना है।
मंत्री ने किसान मेलों को अधिक उपयोगी बनाने को कहा। किसानों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। मखाना विकास योजना की समीक्षा भी बैठक में हुई। सरकार के अनुसार किसानों को तीन गुना तक मूल्य मिला है। चौहान ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता जांचने का आदेश दिया। यह जांच केवल कागजी रिपोर्टों पर आधारित नहीं होगी।
सुस्त जिलों पर निगरानी
प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना में जिला रैंकिंग देखी गई। यह रैंकिंग 74 नतीजा आधारित संकेतकों पर तैयार होती है। देश का औसत स्कोर अप्रैल में 18.85 था। अगस्त में यह बढ़कर 46.89 हो गया।
लगातार नीचे रहने वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित राज्यों के कृषि मंत्रियों को भी जानकारी दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करनी होगी। उन्हें योजनाओं का वास्तविक असर खेतों पर देखना होगा। चौहान ने योजनाओं को किसान केंद्रित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
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