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एमपी के पन्ना में जमीन मुआवजे को लेकर आदिवासी किसानों का मिट्टी सत्याग्रह, महिला की मौत पर उठाए सवाल

newz@gmail.com | Sep 22, 2026, 13:30 IST

पन्ना में मझगवां और रुंज सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित किसान और आदिवासी मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर मिट्टी सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलन में शामिल एक बुजुर्ग महिला की मौत पर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने 10 अक्टूबर तक मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

मिट्टी आंदोलन

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जमीन को लेकर किसानों का गुस्सा सड़क पर है। मझगवां और रुंज सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित किसान और आदिवासी परिवार पिछले 10 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि जमीन का सही मुआवजा मिले और सही तरीके से पुनर्वास हो। अब यह आंदोलन मिट्टी सत्याग्रह के रूप में सामने आया है। यआंदोलन अजयगढ़ क्षेत्र के मझगवां बांध के बनहरीकला टपरियन में चल रहा है।

पहले भी हुए प्रदर्शन

प्रभावित परिवारों ने इससे पहले भी विरोध जताया था। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सांकेतिक चिता प्रदर्शन किया था। इसके बाद जल सत्याग्रह भी किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसके बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी वजह से उन्होंने मिट्टी सत्याग्रह शुरू किया।

रविवार देर रात तक प्रदर्शनकारियों ने मशालों के साथ भी प्रदर्शन किया। मिट्टी सत्याग्रह को केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों का भी समर्थन मिला है। ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन से प्रभावित लोग भी इसमें शामिल हुए हैं।

मिट्टी सत्याग्रह क्यों

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि मिट्टी सत्याग्रह उनकी पुश्तैनी जमीन से जुड़ाव दिखाने का तरीका है। प्रभावित परिवारों के मुताबिक वे पीढ़ियों से इसी जमीन पर निर्भर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

आंदोलन का नेतृत्व जय किसान संगठन कर रहा है। संगठन के नेता अमित भटनागर हैं। भटनागर का आरोप है कि प्रशासन नोटिस और दूसरी कार्रवाइयों से आंदोलन खत्म कराने का दबाव बना रहा है। उनके मुताबिक इस दबाव के बावजूद प्रभावित परिवार आंदोलन जारी रखेंगे। यह आरोप भटनागर का है, प्रशासन का इस पर अलग पक्ष रिपोर्ट में नहीं है।

क्या हैं मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग साफ है। पहली मांग जमीन का उचित मुआवजा है। दूसरी मांग विस्थापित परिवारों का सही तरीके से पुनर्वास है। इसके साथ एक और मांग जुड़ी है।

प्रदर्शनकारी मझगवां परियोजना के निर्माण की जांच चाहते हैं। वे मुआवजा वितरण और पुनर्वास प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच मांग रहे हैं। यह अनियमितता का आरोप है, अभी किसी जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

आदिवासी महिला की मौत का मामला

आंदोलन के दौरान एक आदिवासी महिला की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार 75 वर्षीय रमिया बाई ने 12 और 13 सितंबर को आंदोलन में हिस्सा लिया था। इसके बाद घर लौटने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्या से उनकी मौत हुई।

आंदोलनकारियों ने इस मामले की जांच की मांग की है। वहीं अधिकारियों ने इसे प्राकृतिक मौत बताया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। किसी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट का हवाला अभी सामने नहीं आया है।

प्रशासन का रुख

आंदोलन के बीच प्रशासन ने राहत की प्रक्रिया तेज करने का कदम उठाया है। सागर कमिश्नर दिलीप कुमार ने शुक्रवार को निर्देश दिए। उनके निर्देश के मुताबिक मझगवां और रुंज मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को 10 अक्टूबर तक मुआवजा दिया जाए।

इस निर्देश में बलूपुर और कुंवरपुर के प्रभावित परिवार भी शामिल किए गए हैं। निर्देश के बाद पन्ना जिला प्रशासन ने विस्थापित ग्रामीणों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

आंदोलन जारी रहेगा या नहीं

अमित भटनागर ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है। उनके मुताबिक अब प्रभावित लोगों से चर्चा के बाद फैसला होगा। यह फैसला आंदोलन जारी रखने या खत्म करने पर होगा। यानी अभी तय नहीं है कि आंदोलन कब रुकेगा।

मझगवां और रुंज परियोजना क्या हैं

रिपोर्ट के मुताबिक मझगवां और रुंज मध्यम सिंचाई परियोजनाएं फिलहाल निर्माणाधीन हैं। ऐसी परियोजनाओं में बांध और नहर बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण होता है। इसी अधिग्रहण से किसान और आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। परियोजना की तकनीकी बारीकियां और लागत रिपोर्ट में नहीं दी गई हैं।

केन-बेतवा लिंक और रेलवे परियोजना से जुड़ाव

आंदोलन को केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों का समर्थन मिला है। यह परियोजना भी जमीन अधिग्रहण से जुड़ी बड़ी योजना है। ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन से प्रभावित लोग भी शामिल हुए हैं। इससे साफ है कि पन्ना और आसपास के इलाकों में जमीन अधिग्रहण को लेकर असंतोष व्यापक है।

बुंदेलखंड में जमीन विवाद का पैटर्न

पन्ना जिला बुंदेलखंड इलाके में आता है। यहां सिंचाई और अन्य बड़ी परियोजनाओं के लिए अक्सर जमीन ली जाती है। किसान और आदिवासी परिवार अक्सर मुआवजे और पुनर्वास को लेकर असंतोष जताते रहे हैं। यह मामला भी उसी तरह के विवादों का हिस्सा दिखता है।

आगे क्या होगा

आने वाले दिनों में कुछ बातें साफ होंगी। पहला, क्या 10 अक्टूबर तक सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिल पाता है। दूसरा, बलूपुर, कुंवरपुर जैसे गांवों में वितरण कैसे होता है। तीसरा, रमिया बाई की मौत की जांच होती है या नहीं। चौथा, आंदोलन खत्म होता है या आगे बढ़ता है। इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में साफ होंगे।

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