किसान की बात,सूत्र के साथ

मध्य प्रदेश में दलहन मिशन से घटेगी पानी वाली खेती, बढ़ेगा दालों का उत्पादन, 55 दाल मिलें भी खुलेंगी

newz@gmail.com | Oct 9, 2026, 10:58 IST

मध्य प्रदेश दलहन मिशन के तहत पांच साल का एक्शन प्लान बना है। इसका बजट 2,442 करोड़ रुपए है। 55 दाल मिलें खुलेंगी और तुअर, उड़द, मसूर की सरकारी खरीद होगी। मकसद पानी वाली खेती घटाना है।

दलहन मिशन

मध्य प्रदेश अब ज्यादा पानी वाली खेती से दलहन की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य ने पांच साल का दलहन एक्शन प्लान बनाया है। इस प्लान का बजट 2,442 करोड़ रुपए बताया गया है। योजना के केंद्र में किसान और गांव की अर्थव्यवस्था है।

क्या है मध्य प्रदेश दलहन मिशन

यह प्लान दलहन मिशन के तहत तैयार हुआ है। इसमें चना, मसूर, अरहर (तुअर) और उड़द पर खास जोर है। राज्य चाहता है कि किसान इन फसलों का रकबा बढ़ाएं। इससे धान और गेहूं पर निर्भरता घटेगी। धान और गेहूं की खेती में पानी ज्यादा लगता है।

योजना के दो बड़े लक्ष्य बताए गए हैं। पहला लक्ष्य दलहन का उत्पादन बढ़ाना है। दूसरा लक्ष्य प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा देना है। इससे गांवों में ही रोजगार के मौके बन सकते हैं।

तुअर, उड़द और मसूर का रकबा बढ़ाने पर खास ध्यान रहेगा। मौसम की मार झेल सकने वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। भंडारण और उपज प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

55 दाल मिलें और अनुदान

राज्य में 55 नई दाल मिलें लगाने की बात सामने आई है। हर मिल को केंद्र सरकार से 25 लाख रुपए तक का अनुदान मिलेगा। यानी प्रोसेसिंग का काम अब प्रदेश के भीतर ही बढ़ सकता है। इससे किसानों को उपज बेचने के नए विकल्प मिल सकते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल में रायसेन में यह घोषणा की थी। उन्होंने साफ कहा, “भारत सरकार ने मध्य प्रदेश में 55 दाल मिलें खोलने का फैसला किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि पूरी चेन खेती से फूड प्रोसेसिंग तक जुड़ेगी।

सहकारी समितियों के लिए भी रास्ता खुला है। फूड प्रोसेसिंग चाहने वाली सहकारी समितियों को आर्थिक मदद मिल सकती है। यह मदद कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) से मिलेगी। राष्ट्रीय मिशन में देशभर में 1,000 दाल मिलों की योजना बताई गई है। इनमें 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी।

किसानों को खरीद का भरोसा

किसानों की सबसे बड़ी चिंता सही दाम की होती है। रिपोर्ट के मुताबिक इसी डर को दूर करने की कोशिश हुई है। पीएम-आशा (Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan) के तहत खरीद होगी। नेफेड (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India) खरीद करेगा। एनसीसीएफ (National Cooperative Consumers’ Federation of India) भी खरीद करेगा।

यह खरीद तुअर, उड़द और मसूर की होगी। खरीद योजना के तय नियमों के हिसाब से होगी। राष्ट्रीय मिशन के ब्योरे में एक और बात दर्ज है। भाग लेने वाले राज्यों में चार साल तक पूरी खरीद का प्रावधान है। यह प्रावधान तीनों दालों पर लागू बताया गया है।

पानी बचाने पर जोर क्यों

धान और गेहूं की खेती में सिंचाई पर काफी पानी खर्च होता है। यही इस मिशन की बड़ी वजह बताई गई है। ऐसे में कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना जरूरी माना जा रहा है। आमतौर पर दलहनी फसलें कम सिंचाई में तैयार हो जाती हैं।

इसका फायदा किसान को सीधे लागत में दिख सकता है। बिजली और डीजल पर खर्च घट सकता है। साथ ही फसल चक्र में विविधता आ सकती है। हालांकि यह बदलाव तभी टिकेगा, जब दाम और खरीद का भरोसा बना रहे।

देश और राज्य के आंकड़े

राष्ट्रीय स्तर पर भी दलहन आत्मनिर्भरता मिशन चल रहा है। इसकी लागत करीब 11,440 करोड़ रुपए है। यह केंद्र प्रायोजित योजना है और अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी। मिशन 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा।

मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक 350 लाख टन उत्पादन का है। इसके लिए 35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त रकबा जोड़ा जाना है। कुल रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की बात है। देश में दलहन उत्पादन 2024-25 में 252.38 लाख टन रहा।

देश को आज भी दालें बाहर से मंगानी पड़ती हैं। साल 2023-24 में 47.38 लाख टन दालें आयात हुई थीं। इसी वजह से आत्मनिर्भरता की बात बार-बार उठ रही है। मध्य प्रदेश इस मोर्चे पर पहले से मजबूत है। रिपोर्ट में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) के आंकड़े दिए गए हैं। प्रदेश दलहन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। यहां 52.40 लाख टन दलहन पैदा हुआ।

खाद्यान्न उत्पादन 46.63 मिलियन टन रहा। इसमें प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। तिलहन उत्पादन 82.50 लाख टन रहा। इसमें भी राज्य दूसरे स्थान पर है। सोयाबीन में प्रदेश का हिस्सा करीब 35.27 फीसदी बताया गया है।

ये भी पढ़ें…

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर सीएम फडणवीस ने अमित शाह से मुलाकात की, विशेष पैकेज मांगा

MP के आदिवासी जिले आलीराजपुर-झाबुआ सूखे: खरीफ फसल प्रभावित, रबी में भी पानी का संकट, दिवाली बाद पलायन की आशंका

एमपी के वृंदावन ग्रामों में होगी उन्नत नस्ल के पशुओं की प्रतियोगिता, विजेता को मिलेंगे एक लाख : सीएम यादव

इंदौर में सोयाबीन किसानों का दो दिनी प्रशिक्षण; शिवराज बोले- खेती को लाभकारी बनाएं, आमदनी बढ़ाना हमारा लक्ष्य

GENERAL newz@gmail.com

Read more