किसान की बात,सूत्र के साथ

फसल मुआवजा, MSP, कर्जमाफी जैसी मांगों को लेकर मप्र संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को दिया 26 सूत्रीय मांगपत्र

newz@gmail.com | Oct 15, 2026, 16:25 IST

मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा ने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के नाम 26 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसमें फसल मुआवजा, MSP पर खरीदी, कर्जमाफी और परमाणु परियोजनाओं पर रोक की मांग है।

ज्ञापन

मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को 26 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है। यह मांगपत्र 13 अक्टूबर को भोपाल में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया। यह मुख्यमंत्री के नाम है। इसमें फसल मुआवजा, कर्जमाफी और खाद की किल्लत जैसे मुद्दे हैं। एमएसपी पर खरीदी की मांग भी है। प्रस्तावित सातों परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक की मांग भी है। ये सभी मांगें मोर्चे की हैं। फिलहाल सरकार की तरफ से इन पर कोई जवाब सामने नहीं आया है।

किसने सौंपा, किसे मिला

मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा (MPSKM) ने 13 अक्टूबर को मांगपत्र सौंपा। यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सचिव अरविंद दुबे को दिया गया। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को भी इसकी प्रति दी गई।

अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता को भी यह दिया गया। वे कृषि उत्पादन आयुक्त भी हैं। मोर्चे ने किसानों की समस्याओं पर तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।

क्या है संयुक्त किसान मोर्चा

मोर्चे के मुताबिक यह अलग विचारधाराओं वाले किसान संगठनों का साझा मंच है। वह खुद को दलगत राजनीति से अलग बताता है। मोर्चे ने कई समस्याओं को गंभीर बताया है। इनमें बढ़ती खेती की लागत और खाद की किल्लत शामिल है। फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान भी उन्होंने गिनाया है।

उपज का लाभकारी दाम न मिलना और सरकारी खरीदी की अव्यवस्था भी इसमें है। बिजली बिलों की गड़बड़ी और बढ़ता कर्ज भी इसमें है। जमीन अधिग्रहण का संकट भी गिनाया गया है।

फसल नुकसान का मुआवजा

मोर्चे की पहली बड़ी मांग फसल नुकसान से जुड़ी है। उसने कहा है कि अतिवृष्टि जैसी आपदाओं से बिगड़ी फसलों का पारदर्शी सर्वे हो। इसके बाद किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए। मोर्चे ने सर्वे को पारदर्शी रखने पर खास जोर दिया है।

एमएसपी पर खरीदी की मांग

मोर्चे ने सभी पात्र फसलों की एमएसपी (Minimum Support Price) पर खरीदी मांगी है। इसमें धान, गेहूं, मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द और अरहर शामिल हैं। ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी और कपास की भी मांग है।

सरकारी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना मांगा गया है। तुलाई सुचारु हो और भुगतान समय पर मिले, यह भी मांग है। मंडियों में उपज का भुगतान नियम के मुताबिक उसी दिन हो।

खाद की किल्लत और ई-टोकन

मोर्चे ने यूरिया, डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) और जरूरी खाद की मांग की है। यह उचित दाम पर और पर्याप्त मात्रा में हो। खाद बांटने की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार की बात भी रखी गई है।

मांग है कि सिकमी, बटाईदार और पट्टेदार किसान खाद से वंचित न रहें। सम्मिलित भूधारक किसानों के लिए भी यही मांग है।

वन या राजस्व भूमि पर खेती करने वाले पात्र किसानों का मुद्दा भी है। इनमें आदिवासी और गैर आदिवासी, दोनों शामिल हैं। इन्हें खाद, बीज और एमएसपी पर खरीदी की सुविधा देने को कहा गया है। सहकारी और खाद वितरण समितियों की सदस्यता भी मांग में है।

कर्जमाफी और बिजली

मोर्चे ने किसानों के कर्ज संकट को बड़ा बताया है। उसने कर्जमाफी और ऋण राहत योजना की मांग की है। मांगपत्र में सिंचाई के लिए दिन में लगातार 10 घंटे बिजली मांगी गई है। कृषि पंपों के बिलों की गड़बड़ियां दूर करने की मांग भी है।

जमीन अधिग्रहण का मुद्दा

मांगपत्र में परियोजनाओं से प्रभावित किसानों का मुद्दा प्रमुखता से रखा गया है। इनमें केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना शामिल है। रूंझ और मझगांव बांध से प्रभावित परिवारों की बात भी है।

ललितपुर सिंगरौली रेलमार्ग से प्रभावित परिवार भी इसमें हैं। मोर्चे ने इन सबके लिए उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार मांगा है।

मोर्चे ने भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों का पालन करने को कहा है। शांतिपूर्ण किसान आंदोलनों में दर्ज मुकदमों की समीक्षा की मांग भी है। उन्हें अनुचित बताते हुए वापस लेने को कहा गया है।

परमाणु परियोजनाओं पर रोक

मोर्चे ने प्रस्तावित सातों परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर तत्काल रोक मांगी है। उसका कहना है कि इनके असर का स्वतंत्र आकलन होना चाहिए।

यह आकलन किसानों, आदिवासी समुदायों और ग्राम सभाओं पर पड़ने वाले असर का हो। जलस्रोतों, खेती की जमीन और पर्यावरण पर असर भी देखा जाए। यह मोर्चे का पक्ष है।

मोर्चे ने सरकार से कहा है कि वह इन परियोजनाओं को आगे न बढ़ाए। उसके मुताबिक सुरक्षित और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए।

और भी कई मुद्दे हैं मांगपत्र में

मांगपत्र में कई और मुद्दे भी हैं। नरवाई प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक सहायता मांगी गई है। कृषि यंत्रों पर पर्याप्त अनुदान की मांग भी है। नरवाई यानी फसल कटने के बाद खेत में बचा डंठल।

छोटे किसानों के लिए सामुदायिक मशीन बैंक मांगा गया है। भूमि अभिलेखों और नक्शों की गड़बड़ियां दूर करने की मांग भी है। खेत सड़क योजना दोबारा शुरू करने को कहा गया है।

मंडी और सहकारी समितियों के चुनाव कराने की मांग भी है। दूध, फल और सब्जी उत्पादकों को लाभकारी मूल्य मांगा गया है। आदिवासी किसानों के वनाधिकार सुनिश्चित करने की बात भी शामिल है।

कौन कौन मौजूद रहा

ज्ञापन सौंपते समय कई किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनमें किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी शामिल थे। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रहलाद बैरागी भी थे।

क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के लीलाधर राजपूत, बाबूसिंह राजपूत और मोहनीश भी थे। अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के विजय कुमार भी पहुंचे। किसान सत्याग्रह के शिवम बघेल भी थे। जनसंघर्ष समन्वय समिति के समाधान पाटिल भी मौजूद रहे।

सरकार से क्या अपील

मोर्चे ने मांग की है कि सभी मुद्दों पर विभागों को साफ निर्देश मिलें। प्रमुख मांगों के निराकरण की समयसीमा तय की जाए। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हो।

मोर्चे ने यह भी कहा कि सरकार अपनी कार्रवाई की लिखित जानकारी दे। उसने सवाल टालने या आंदोलन दबाने की जगह संवाद की मांग की है।

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