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MP में सोयाबीन भावांतर योजना पंजीयन 3 से 17 अक्टूबर तक, जानें कहां मुफ्त रजिस्ट्रेशन होगा और कहां लगेगा शुल्क

newz@gmail.com | Oct 1, 2026, 12:11 IST

मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों का भावांतर योजना पंजीयन 3 से 17 अक्टूबर तक होगा। जानें मुफ्त पंजीयन केंद्र, 50 रुपए शुल्क, आधार वेरिफिकेशन और बैंक खाते से जुड़ी जरूरी जानकारी।

सोयाबीन

मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए जरूरी खबर आई है। भावांतर योजना के तहत पंजीयन की तारीख तय हो गई है। यह पंजीयन 3 अक्टूबर से शुरू होगा और 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। भावांतर योजना दरअसल भारत सरकार की प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम है। यह खरीफ वर्ष 2026, यानी विपणन वर्ष 2026-27 पर लागू होगी। किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर तय प्रक्रिया से पंजीयन कराना होगा।

भावांतर योजना का मुफ्त पंजीयन कहां होगा

किसानों के लिए पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। यह सुविधा ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों के केंद्रों पर मिलेगी। सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं के केंद्रों पर भी यह सुविधा मुफ्त रहेगी।

इन जगहों पर लगेगा शुल्क

कुछ विकल्पों पर पंजीयन के लिए शुल्क देना होगा। किसान एमपी ऑनलाइन और कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क से भी पंजीयन करा सकते हैं। लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से भी यह हो सकेगा। इन केंद्रों पर प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपए शुल्क तय किया गया है।

पंजीयन के दौरान भूमि दस्तावेज, आधार कार्ड और फोटो पहचान पत्र जांचे जाएंगे। इनका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।

सिकमी-बटाईदार की व्यवस्था

सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए अलग नियम है। इनका पंजीयन सिर्फ सहकारी समिति या सहकारी विपणन संस्था के केंद्रों पर होगा। इन श्रेणी के किसानों का राजस्व विभाग शत-प्रतिशत सत्यापन करेगा।

भुगतान के लिए बैंक खाता जरूरी

सोयाबीन की उपज का भुगतान पाने के लिए बैंक खाते का ब्योरा सही होना जरूरी है। किसान का आधार लिंक बैंक खाता प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल होगा। अगर आधार लिंक खाते में दिक्कत आए, तो दिए गए दूसरे खाते में भुगतान होगा।

पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड देना होगा। कुछ तरह के खाते मान्य नहीं होंगे। इनमें अक्रियाशील खाते और संयुक्त बैंक खाते शामिल हैं। फिनो, एयरटेल, पेटीएम जैसे खाते भी इसमें शामिल हैं। किसानों को सलाह दी गई है। वे आधार के साथ बैंक खाता और मोबाइल नंबर लिंक कराकर अपडेट रखें। पंजीयन के वक्त यह जानकारी गलत होने पर दिक्कत आ सकती है।

आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य

सोयाबीन का पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी होगा। यह वेरिफिकेशन ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस से हो सकेगा। ओटीपी आधार लिंक मोबाइल पर आएगा।

पंजीयन तभी होगा, जब खसरे में दर्ज नाम आधार कार्ड के नाम से मिलेगा। नाम में अंतर होने पर तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही पंजीयन मान्य माना जाएगा।

बैंक खाते का भी होगा सत्यापन

पंजीयन के दौरान आधार लिंक बैंक खाते का भी सत्यापन होगा। इसके लिए मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम 1 रुपए का ट्रांजेक्शन करेगा। यह ट्रांजेक्शन ई-उपार्जन या जेआईटी पोर्टल के जरिए होगा।

जिला और तहसील स्तर पर आधार केंद्र सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे किसान अपने मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट करा सकेंगे। पोस्ट ऑफिस के आधार सुविधा केंद्रों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

किसानों तक कैसे पहुंचेगी सूचना

पिछले खरीफ सीजन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं, उन्हें एसएमएस से पंजीयन की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा गांवों में डोंडी पिटवाकर भी सूचना दी जाएगी।

ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर भी जानकारी लगाई जाएगी। समितियों और मंडियों में बैनर के जरिए भी किसानों को बताया जाएगा। प्रशासन ने किसानों से तय समय में पंजीयन पूरा करने की अपील की है।

पंजीयन से पहले क्या तैयार रखें

पंजीयन सही और समय पर हो, इसके लिए कुछ तैयारी पहले से करना बेहतर रहेगा। सबसे पहले आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी है। भूमि के दस्तावेज और खसरा-खतौनी का नाम भी आधार से मिलना चाहिए।

बैंक खाता आधार से लिंक हो और चालू स्थिति में हो, यह जांच लें। संयुक्त खाता या फिनो, एयरटेल, पेटीएम जैसे खाते से पंजीयन नहीं होगा। वैकल्पिक खाता पहले से तैयार रखें।

सिकमी, बटाईदार, कोटवार या वन पट्टाधारी किसान सीधे सहकारी समिति के केंद्र पर जाएं। वहां सत्यापन से जुड़े जरूरी कागजात साथ ले जाना न भूलें।

यह पंजीयन क्यों है अहम

भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को बाजार भाव कम रहने पर अंतर की भरपाई मिलती है। इसके लिए तय समय में पंजीयन कराना ही पहली शर्त है। पंजीयन न होने या गलत जानकारी होने पर भुगतान में दिक्कत आ सकती है।

आधार और बैंक खाते से जुड़ी सख्ती भी इसी वजह से बढ़ाई गई है। इससे फर्जी पंजीयन और गलत भुगतान की आशंका कम होती है। किसानों के लिए सही जानकारी के साथ समय पर पंजीयन सबसे जरूरी कदम है। पंजीयन को लेकर उलझन हो तो नजदीकी ग्राम पंचायत या सहकारी समिति से संपर्क करें। वहीं से पूरी प्रक्रिया की सही जानकारी मिल सकेगी।

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