राजस्थान में मानसून अब आखिरी पड़ाव पर है। लेकिन इस बार बारिश का गणित पिछले साल से बिल्कुल उलट है। 1 जून से 12 सितंबर के बीच करीब 304.9 मिमी बारिश हुई। इस दौरान सामान्य बारिश करीब 410.1 मिमी होनी चाहिए थी। यानी राज्य को अब तक करीब 105 मिमी बारिश कम मिली। यह कमी करीब 26% के आसपास बैठती है। हालांकि विदाई से ठीक पहले मौसम फिर बदला है। 13 से 16 सितंबर के बीच कई इलाकों में बारिश हुई। भारतीय मौसम विभाग IMD (India Meteorological Department) ने भी चेतावनी जारी की थी।
3 सितंबर तक 21 फीसदी की कमी
मानसून के दौरान बारिश का बंटवारा बेहद असमान रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून से 3 सितंबर तक 295.30 मिमी बारिश हुई थी। इस अवधि में सामान्य बारिश 374.55 मिमी होती है। यानी उस समय कमी करीब 21% थी। प्रदेश के 41 जिलों में से 21 जिले कमी वाले थे। 18 जिले नार्मल श्रेणी में थे। सिर्फ 2 जिलों में बारिश सामान्य से ज्यादा हुई थी। इसके बाद सितंबर के दूसरे हफ्ते तक कमी बढ़कर 26% तक पहुंच गई। शुरुआती सितंबर में पर्याप्त बारिश न होने से यह घाटा और बढ़ गया।
पाली सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका
जिलों के स्तर पर तस्वीर और भी असमान है। पाली में सामान्य से 57.53% कम बारिश दर्ज हुई। यह राज्य में सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा। इसके बाद जालोर में 50.46% कमी दर्ज हुई। जैसलमेर में यह आंकड़ा 49.32% रहा। बांसवाड़ा में 48.78% और उदयपुर में 45.85% कमी दर्ज हुई। डूंगरपुर में भी करीब 43.96% कम बारिश हुई। इसके उलट डीग में सामान्य से 31.04% ज्यादा बारिश हुई। फलोदी में भी 21.57% अधिक बारिश दर्ज हुई। यानी पूरे राजस्थान को एक आंकड़े से नहीं समझा जा सकता।
जोधपुर-उदयपुर पर असर सबसे ज्यादा
संभागवार आंकड़ों में सबसे ज्यादा असर जोधपुर और उदयपुर में दिखा। जोधपुर संभाग में सामान्य 255.22 मिमी के मुकाबले सिर्फ 171.32 मिमी बारिश हुई। यह करीब 33% की कमी है। उदयपुर संभाग में 616.09 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले 430.03 मिमी पानी बरसा। यहां कमी करीब 30% रही। कोटा संभाग भी सामान्य से करीब 21% पीछे रहा। अजमेर, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में भी कमी दर्ज हुई। बीकानेर में सबसे कम, करीब 4% की कमी रही।

अल नीनो के कारण कम बारिश
इस साल के कमजोर मानसून के पीछे अल नीनो एक बड़ी वजह है। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को संसद में इसकी जानकारी दी थी। IMD ने शुरुआत से ही कम बारिश का अनुमान लगाया था। अप्रैल के पहले पूर्वानुमान में देश भर की बारिश LPA (Long Period Average) के 92% रहने की बात कही गई थी। सरकार ने यह भी बताया कि अल नीनो में मानसून आमतौर पर कमजोर रहता है। हालांकि हर अल नीनो साल में सूखा पड़े, यह जरूरी नहीं है। 1950 के बाद के 16 अल नीनो सालों में सात में मानसून सामान्य से कम रहा।
राजस्थान के बांधों की स्थिति
कम बारिश का असर राजस्थान के बांधों पर भी साफ दिख रहा है। जल संसाधन विभाग की सितंबर के पहले हफ्ते की रिपोर्ट यह बताती है। राज्य के 693 बांधों में कुल 7,611.932 मिलियन घनमीटर पानी था। यह कुल क्षमता का करीब 58% है। इनमें से 57 बांध पूरी तरह भरे हुए थे। 438 बांध आंशिक रूप से भरे थे और 198 बांध खाली थे। कोटा जोन में सबसे ज्यादा 73.38% पानी था। बांसवाड़ा में 60.08% और जयपुर में 57.84% भराव दर्ज हुआ। भरतपुर में 48.50% और उदयपुर में करीब 45% पानी था। सबसे खराब हालत जोधपुर जोन की रही, जहां सिर्फ 17.77% पानी बचा है।
पिछले साल से उलट तस्वीर
पिछला मानसून राजस्थान के लिए असाधारण रूप से अच्छा रहा था। उस दौरान बांधों में पानी का स्तर भी काफी ऊंचा पहुंचा था। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक पिछले मानसून के अंत में बांधों का औसत भराव 90.51% था। इसके उलट इस बार राज्य सामान्य बारिश से करीब एक चौथाई पीछे है। यही वजह है कि सिर्फ कुल बारिश का आंकड़ा काफी नहीं है। जिलेवार बंटवारा, बांधों की स्थिति और खरीफ फसलों पर असर भी उतना ही जरूरी है।
19 सितंबर से पहले कितनी बारिश
राजस्थान में मानसून के अब गिने-चुने दिन बचे हैं। IMD ने 19 सितंबर के आसपास मानसून वापसी शुरू होने की संभावना जताई है। आमतौर पर यह वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है। यानी इस बार शुरुआत करीब दो दिन देर से हो सकती है। उत्तर गुजरात के पास बने निम्न दबाव का असर राजस्थान पर भी है। इसी वजह से कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक जारी है। IMD ने पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 15-16 सितंबर तक ऐसी गतिविधि की संभावना जताई थी। मानसून वापसी शुरू होने के बाद बड़ी बारिश के आसार तेजी से घटते हैं। इसलिए अगले कुछ दिन मौजूदा कमी को कुछ कम कर सकते हैं।
ये भी पढ़े…
सिंचाई की टेंशन खत्म करेगी राजस्थान सरकार की खेत तालाब योजना, किसानों को 90 फीसदी तक मिलेगा अनुदान
35 दिन सूखा झेला, फिर भी हरी रहीं मोठ की चार नई किस्में; राजस्थान में दलहन उत्पादन को मिली नई उम्मीद
