राजस्थान के किसानों के लिए मूंग की नई फसल चिंता लेकर आई है। मंडियों में आवक तेजी से बढ़ी है। लेकिन भाव सरकार के तय MSP से काफी नीचे हैं। किसान संगठन अब जल्द सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
मूंग यानी हरी दाल खरीफ सीजन की खास फसल है। इस सीजन में राजस्थान देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दिए गए मंडी आंकड़ों पर आधारित है।
मंडियों में आवक 10 गुना बढ़ी
राजस्थान की मंडियों में 1 सितंबर से नई फसल की मूंग आ रही है। 1 से 18 सितंबर के बीच करीब 63,000 टन मूंग की आवक हुई। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 10 गुना है। 2025 में इन्हीं तारीखों में 6,451 टन मूंग आई थी। वहीं 2024 में यह आंकड़ा 7,574 टन था।
भाव और MSP का फर्क
किसानों को औसतन 7,452 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिला। MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। यानी किसानों को करीब 15 प्रतिशत कम भाव मिला। MSP वह दाम है जिस पर सरकार फसल खरीदने का भरोसा देती है। इस हिसाब से हर क्विंटल पर औसतन करीब 1,328 रुपए कम मिले।
एगमार्कनेट (Agmarknet) पोर्टल के डेटा में भाव का उतार-चढ़ाव दिखता है। महीने की शुरुआत में मंडियों का औसत भाव करीब 7,000 रुपए था। 17 सितंबर तक यह बढ़कर 7,960 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। फिर भी यह MSP से नीचे बना हुआ है।
MSP में सिर्फ 0.1 प्रतिशत की बढ़त
एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने 2026-27 के लिए मूंग का MSP बढ़ाया है। यह सभी खरीफ फसलों में सबसे कम, यानी 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने इस पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक मूंग के MSP में केवल 12 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। जाट ने खरीद योजना की आलोचना भी की।
किसान महापंचायत की खरीद नीति पर मांग
रामपाल जाट का कहना है कि केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश बदलने चाहिए। नेफेड और NCCF सरकारी खरीद करने वाली एजेंसियां हैं। नेफेड यानी National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India। NCCF यानी National Cooperative Consumers’ Federation of India।
जाट का पहला सुझाव है कि एजेंसियां राज्यों के अनुरोध का इंतजार न करें। दूसरा सुझाव है कि खरीद की तारीख और मात्रा राज्य तय करें। जाट के मुताबिक किसानों को 1,280 से 3,200 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान है। उनके अनुसार खरीद जल्दी शुरू होती तो किसानों की कमाई बढ़ सकती थी।
नेफेड की बिक्री का दबाव
नेफेड पिछले सालों की मूंग 6,500 रुपए प्रति क्विंटल पर बेच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे मौजूदा बाजार भाव MSP से नीचे आ गए हैं। यानी पुराने स्टॉक की बिक्री नई फसल के भाव पर दबाव बना रही है।
किसानों की पुरानी मांग है कि मूंग की खरीद 1 सितंबर से शुरू हो। यह मांग राज्य और केंद्र सरकार दोनों से की जाती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार की अपीलों को माना नहीं गया है।
जाट ने खरीद व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका सवाल है कि फसल जल्दी पक जाए तो क्या किसान इंतजार करें। क्या किसानों को सरकार के खरीद सीजन की घोषणा तक रुकना चाहिए।
उत्पादन और बुवाई के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार 2025 के खरीफ में राजस्थान में 13.89 लाख टन मूंग हुई। यह देश के कुल मूंग उत्पादन का 72 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने इस साल 26.50 लाख हेक्टेयर में मूंग का लक्ष्य रखा था। 2025 में मूंग का रकबा बढ़कर 26.57 लाख हेक्टेयर हो गया था।
इस साल मूंग की बुवाई लक्ष्य से 13 प्रतिशत कम रही। यह रकबा 23.17 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ। स्थानीय किस्म मोठ भी 10 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य नहीं छू सकी। इस साल मोठ का रकबा 9.12 लाख हेक्टेयर रहा। यह 2025 के 8.59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। यानी मोठ का रकबा पिछले साल से बढ़ा है।
जाट की फसल बदलने की सलाह
जाट ने एक और सुझाव दिया है। उनके मुताबिक जहां फायदा हो, वहां किसान दूसरी फसलें उगा सकते हैं। उनका तर्क है कि कम रकबे से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं। यह सुझाव किसान महापंचायत के अध्यक्ष का है।
हर किसान के लिए फसल बदलना आसान नहीं होता। जमीन, पानी और बाजार का ध्यान रखना जरूरी है।
किसानों के लिए क्या मायने
आवक बढ़ने और भाव कम रहने से किसानों की आमदनी पर असर पड़ सकता है। जो किसान अभी बेच रहे हैं, उन्हें MSP से कम भाव मिल रहा है। जो इंतजार कर रहे हैं, उन्हें सरकारी खरीद की घोषणा का इंतजार है। पर इंतजार की भी अपनी कीमत होती है। भंडारण, कर्ज और अगली फसल का खर्च इसी आमदनी पर निर्भर है।
किसान अपने नजदीकी मंडी का ताजा भाव जरूर देखें। साथ ही सरकारी खरीद की घोषणा पर नजर रखें। पंजीकरण या खरीद की शर्तें हों तो उसकी जानकारी कृषि विभाग से लें। यह खबर बाजार की जानकारी है, बिक्री की सलाह नहीं है।
एक नजर आंकड़ों पर
1 से 18 सितंबर में राजस्थान में करीब 63,000 टन मूंग आई। यह पिछले साल से लगभग 10 गुना ज्यादा है। औसत भाव 7,452 रुपए प्रति क्विंटल रहा। MSP 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। औसत भाव MSP से करीब 15 प्रतिशत कम है। 17 सितंबर को एगमार्कनेट पर औसत भाव 7,960 रुपए था। मूंग का MSP इस साल सिर्फ 0.1 प्रतिशत बढ़ा है। बुवाई इस साल लक्ष्य से 13 प्रतिशत कम रही। नेफेड पुरानी मूंग 6,500 रुपए प्रति क्विंटल पर बेच रहा है।
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