किसान की बात,सूत्र के साथ

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने रोका हुबली मार्च, सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया

newz@gmail.com | Oct 20, 2026, 13:00 IST

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने हुबली मार्च फिलहाल रोक दिया है। उन्होंने सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया है। मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 नवंबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के घर का घेराव होगा।

गन्ना किसान

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने हुबली की तरफ प्रस्तावित मार्च फिलहाल रोक दिया है। किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया है। मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 नवंबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के घर का घेराव होगा। दोलन सोमवार 19 अक्टूबर को अस्थायी रूप से रोका गया। यह आंदोलन गन्ने के उचित दाम और एमएसपी जैसी मांगों पर था। यह फैसला रविवार रात हुई बैठक के बाद लिया गया।

रविवार की बैठक में क्या हुआ

रविवार रात जोशी और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। इसमें किसान नेता शशिकांत गुरुजी और चुन्नाप्पा पुजारी शामिल थे। यह बैठक धारवाड़ में हुई। बातचीत के बाद किसान नेताओं ने अलग अलग जिलों के प्रतिनिधियों से राय ली। इसी के बाद हुबली की तरफ बढ़ने वाला प्रस्तावित मार्च रोकने का फैसला हुआ।

यारीकोप्पा क्रॉस पर बात

चुन्नाप्पा पुजारी ने यारीकोप्पा क्रॉस पर प्रदर्शनकारियों से बात की। इसके बाद आंदोलन को फिलहाल थामने की बात सामने आई। यानी किसानों ने आंदोलन खत्म नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ उसे कुछ समय के लिए रोका है। असली फैसला 26 नवंबर की समय सीमा के बाद होगा।

पुजारी ने क्या कहा

पुजारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने किसानों की मांगों पर भरोसा दिलाया। लेकिन उन्होंने गन्ने के एमएसपी के मुद्दे को सुलझाने के लिए और समय मांगा। यह बात किसान नेता के हवाले से सामने आई है। गन्ने के दाम पर अंतिम स्थिति अभी साफ नहीं है।

26 नवंबर तक की मोहलत

किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया है। इस अवधि में उन्हें अपनी मांगों पर कार्रवाई की उम्मीद है। समय सीमा खत्म होने पर आंदोलन फिर तेज हो सकता है। किसान नेताओं ने चेताया है। मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन तेज होगा। यानी अब सरकार के कदम पर सबकी नजर रहेगी।

27 नवंबर को घेराव की चेतावनी

26 नवंबर तक मांगें नहीं मानी गईं, तो किसान जोशी के घर का घेराव करेंगे। यह घेराव 27 नवंबर को होगा। यह चेतावनी किसान नेताओं की तरफ से दी गई है।

किसान नेताओं ने बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की बात कही है। उनका दावा है कि जरूरत पड़ी तो एक करोड़ किसान तक जुड़ सकते हैं। यह दावा किसान नेताओं का है। खबर में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं बताई गई है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों की मांगों में गन्ने के उचित दाम का मुद्दा शामिल है। इसके साथ एमएसपी और कुछ दूसरी मांगें भी हैं। खबर में दाम की कोई तय राशि नहीं दी गई है।

किसानों ने तत्काल कुछ कदमों की भी मांग रखी है। पहली मांग बेलगावी में चीनी मिल मालिकों और किसान नेताओं की बैठक की है। यह बैठक चार से पांच दिन के भीतर चाहिए।

दूसरी मांग मिलों से चीनी की ढुलाई रोकने के कदम उठाने की है। तीसरी मांग बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में जरूरी बैठक की है। इसमें गन्ना किसानों की समस्याओं पर बात होगी।

दो नेताओं के भरोसे का सम्मान

किसानों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के दिए भरोसे का सम्मान करेंगे। उन्होंने बातचीत और सहयोग पर भी जोर दिया। यानी किसान अभी टकराव की जगह बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं।

हालांकि यह भरोसा समय सीमा के साथ जुड़ा है। किसानों ने साफ कहा है कि तय समय में कार्रवाई जरूरी है। नहीं तो आंदोलन का अगला चरण शुरू हो सकता है।

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