राजस्थान में गोवंश को लंपी रोग से बचाने की तैयारी तेज है। पशुपालन विभाग ने इसको लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक की अध्यक्षता विकास सीताराम भाले ने की। उन्होंने रोग की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की भी समीक्षा हुई।
घर-घर सर्वे पर जोर
अधिकारी प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वे करेंगे। इससे बीमार गोवंश की जल्द पहचान हो सकेगी। पशु चिकित्सा अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर निगरानी समितियां सक्रिय रखने को कहा गया। संभाग और राज्य स्तर से भी लगातार निगरानी होगी।
भाले ने अधिकारियों को रोज स्थिति की समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा। उच्च स्तर पर समय पर रिपोर्टिंग के निर्देश भी दिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं करने को कहा।
अप्रभावित जिलों पर भी नजर
जिन जिलों में मामले नहीं आए हैं, वहां सतर्कता बढ़ेगी। विभाग संक्रमण को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकना चाहता है। इसके लिए लगातार निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है। अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश मिले हैं।
इस रणनीति में स्थानीय स्तर की निगरानी अहम होगी। किसी संदिग्ध मामले की तुरंत जानकारी जुटाई जाएगी। बीमार पशु को अलग रखने पर भी जोर रहेगा। इससे दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा घटेगा।
दवाओं की कमी नहीं होगी
सरकार हर जिले में जरूरी दवाओं की व्यवस्था कर रही है। आपातकालीन जरूरतों के लिए विशेष बजट दिया जा रहा है। अधिकारियों को दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। दवाओं की कमी मिलने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव और फॉगिंग भी होगी। साफ-सफाई को संक्रमण नियंत्रण का अहम हिस्सा माना गया है। भाले ने इन व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी के निर्देश दिए।
राजस्थान में कंट्रोल रूम और टीमें सक्रिय
राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पॉन्स टीम बनाई गई हैं। इन टीमों का काम त्वरित उपचार सुनिश्चित करना है। कंट्रोल रूम और टीमों में बेहतर तालमेल पर जोर है।
किसी बीमार पशु की सूचना मिलने पर कार्रवाई होगी। इससे उपचार में देरी रोकने की कोशिश की जाएगी। स्थानीय अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।
पशु मेलों पर अस्थायी रोक
संक्रमण रोकने के लिए पशु मेलों पर रोक लगाई गई है। पशु हाटों के आयोजन पर भी अस्थायी रोक रहेगी। पशुओं के अनावश्यक आवागमन को सीमित किया जाएगा। अन्य माध्यमों से आवागमन पर भी रोक के निर्देश हैं।
आइसोलेशन सेंटर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। संक्रमित पशुओं को अलग रखना बेहद जरूरी बताया गया। सफाई व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। विभाग के अनुसार दोनों उपाय संक्रमण रोकने में अहम हैं।
पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा
सरकार अब जागरूकता अभियान भी तेज करेगी। पशुपालकों को लंपी के लक्षण बताए जाएंगे। बचाव और स्वच्छता की जानकारी भी दी जाएगी। संक्रमित पशु को अलग रखने की सलाह दी जाएगी।
जानकारी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दी जाएगी। स्थानीय माध्यमों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। विभाग ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों तक पहुंचना चाहता है।
पशुपालक तुरंत संपर्क करें
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से घबराने से बचने को कहा। लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र भी मदद कर सकता है। जरूरत पड़ने पर नियंत्रण कक्ष से संपर्क किया जा सकता है।
पशुपालन विभाग के निदेशक सुरेश मीना ने स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि एहतियाती कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। संबंधित कर्मचारियों को तालमेल से काम करने के निर्देश हैं। उनका फोकस बीमारी को फैलने से रोकने पर है।
गोपालन विभाग की निदेशक कश्मी कौर ने भी बात रखी। उन्होंने प्रभावित जिलों तक बीमारी सीमित रखने पर जोर दिया। उन्होंने गौशालाओं से देसी नुस्खों के उपयोग की अपील की। उनका कहना है कि इससे पशुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
केंद्र ने प्रयासों की सराहना की
बैठक में भाले ने केंद्र सरकार से हुई चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने पशुपालन आयुक्त नवीन बी की चर्चा बताई। उनके अनुसार राजस्थान के प्रयासों की सराहना हुई है। विभाग अब रोकथाम की कार्रवाई को और मजबूत करेगा।
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जिला और ब्लॉक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। गौशाला संचालकों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। अब जिला स्तर पर रोजाना स्थिति की निगरानी होगी।
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