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जयपुर में 19-20 सितंबर को राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन, किसान आय और खाद्य सुरक्षा पर होगा मंथन, FPO को मिलेंगे नए बाजार

newz@gmail.com | Sep 10, 2026, 17:15 IST

जयपुर में 19 और 20 सितंबर को राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन 2026 होगा। इसमें किसान आय, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और मसाला निर्यात पर चर्चा होगी। किसान संगठनों को खरीदारों और निर्यातकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

मसाला सम्मेलन

देश का पांचवां राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन जयपुर में आयोजित होगा। यह आयोजन 19 और 20 सितंबर 2026 को होगा। सम्मेलन नोवोटेल जयपुर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। देशभर के किसान और मसाला कारोबारी इसमें शामिल होंगे।

WSO (World Spice Organisation) इस सम्मेलन का आयोजन करेगा। AISEF (All India Spices Exporters Forum) तकनीकी सहयोग देगा। आयोजन में वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। प्रोसेसर, निर्यातक और नीति निर्माता भी अपने विचार साझा करेंगे।

मसाला सम्मेलन की थीम क्या है

इस वर्ष सम्मेलन की थीम किसान और उपभोक्ता केंद्रित रखी गई है। इसका नाम “किसानों को सशक्त बनाना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना” है। आयोजकों का लक्ष्य पूरी मसाला मूल्य श्रृंखला को जोड़ना है। इसके लिए अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधि साझा मंच पर आएंगे। किसानों की आमदनी और ग्राहकों की सुरक्षा मुख्य विषय रहेंगे। मसालों की गुणवत्ता सुधारने के तरीकों पर भी चर्चा होगी।

किसानों की आय पर फोकस

सम्मेलन में मसाला किसानों की आमदनी बढ़ाने के उपाय खोजे जाएंगे। किसानों को बेहतर बाजार दिलाने पर विशेष बातचीत होगी। उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके भी बताए जाएंगे। निर्यात बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाने पर चर्चा होगी।

FPO (Farmer Producer Organisation) को सीधे खरीदारों से जोड़ने की योजना समझाई जाएगी। इससे किसानों की बाजार पर निर्भरता का तरीका बदल सकता है। विशेषज्ञ नए कारोबारी मॉडल पर अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें सीधी बिक्री और संगठित आपूर्ति जैसे मॉडल शामिल होंगे।

फूड सेफ्टी पर जोर

खाद्य सुरक्षा सम्मेलन का दूसरा महत्वपूर्ण विषय रहेगा। जिम्मेदार खरीद और टिकाऊ खेती पर भी बातचीत होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मसालों के नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। अब केवल ज्यादा उत्पादन करना पर्याप्त नहीं माना जाता।

उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा साबित करना भी जरूरी है। इसके लिए उत्पादन से बाजार तक पूरी जानकारी रखनी होती है। इसी व्यवस्था को ट्रैसेबिलिटी कहा जाता है। इससे किसी उत्पाद के मूल स्थान की पहचान होती है। विशेषज्ञ गुणवत्ता जांच और सुरक्षा मानकों की जानकारी देंगे। किसानों को वैश्विक जरूरतों के अनुसार तैयार करने पर जोर रहेगा।

प्रदर्शनी में दिखेगी तकनीक

सम्मेलन में आधुनिक कृषि तकनीकों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मसाला प्रसंस्करण से जुड़े नए उपकरण भी दिखाए जाएंगे। स्वदेशी कृषि उत्पादों को भी प्रदर्शनी में जगह मिलेगी। इससे स्थानीय उत्पादकों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा।

तकनीकी विशेषज्ञ खेती और प्रसंस्करण के नए तरीके समझाएंगे। इनसे उत्पादन खर्च और नुकसान कम हो सकता है। हालांकि, सम्मेलन के बाद इन तकनीकों की पहुंच महत्वपूर्ण रहेगी। छोटे किसानों तक जानकारी पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी।

बायर-सेलर मीट होगी

आयोजन में खरीदार और विक्रेता सम्मेलन भी रखा गया है। इसमें किसानों और व्यापारियों के बीच सीधी बातचीत होगी। निर्यातक अपनी गुणवत्ता और खरीद जरूरतों की जानकारी देंगे। किसान अपने उत्पाद और उत्पादन क्षमता की जानकारी साझा करेंगे।

उत्पादक संगठनों को नए खरीदार खोजने का अवसर मिलेगा। इससे लंबी कारोबारी साझेदारी बनने की उम्मीद है। सीधा संपर्क किसानों की बाजार समझ भी बढ़ा सकता है। उन्हें कीमत, गुणवत्ता और मांग की बेहतर जानकारी मिलेगी।

उद्घाटन में बड़े नाम

उद्घाटन सत्र में WSO के चेयरमैन रामकुमार मेनन शामिल होंगे। कृषि विशेषज्ञ अशोक दलवई भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दलवई कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष हैं। वह किसान आय संबंधी समिति के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं।

स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एमएस मणिवन्नन भी शामिल होंगे। राजस्थान की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल भी सम्मेलन में रहेंगी। बिजनेस कमेटी के चेयरमैन गणपति केडी भी उद्घाटन सत्र में आएंगे। दूसरे दिन कृषि निर्यात पर मुख्य संबोधन होगा। APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) अध्यक्ष अभिषेक देव संबोधन देंगे। वह कृषि निर्यात और मूल्य संवर्धन पर विचार रखेंगे।

चेयरमैन ने बताई जरूरत

WSO चेयरमैन रामकुमार मेनन ने सम्मेलन को महत्वपूर्ण मंच बताया। उनके अनुसार, इससे पूरी मसाला मूल्य श्रृंखला एकजुट होगी। उन्होंने किसान सशक्तिकरण और उपभोक्ता सुरक्षा को बड़ी जरूरत बताया। टिकाऊ उत्पादन और मजबूत बाजार संपर्क भी जरूरी हैं।

मेनन के मुताबिक, किसानों को बदलती मांग समझनी होगी। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुसार उत्पादन भी जरूरी होगा। उनका कहना है कि सम्मेलन साझा समाधान खोजने में मदद करेगा। इससे किसानों और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत बढ़ेगी।

सम्मेलन का बढ़ता दायरा

राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन के चार आयोजन पहले हो चुके हैं। इन आयोजनों को मसाला उद्योग से अच्छा समर्थन मिला। वर्ष 2025 के सम्मेलन में 485 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इस बार भी बड़ी भागीदारी की उम्मीद जताई गई है।

भारतीय मसालों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ गुणवत्ता और सुरक्षा नियम भी सख्त हो रहे हैं। ऐसे में सम्मेलन किसानों को नई बाजार जरूरतें समझा सकता है। उद्योग को भी सुरक्षित और टिकाऊ आपूर्ति बनाने में मदद मिलेगी।

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