मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर बैठक बुलाई। इस बैठक में लंपी स्किन रोग की स्थिति पर चर्चा हुई। पशुओं में इस बीमारी को रोकने के उपायों पर भी बात हुई।
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार गोवंश की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने समयबद्ध तरीके से पूरी तैयारी की है। इसी वजह से रोग की स्थिति अभी नियंत्रण में है। उन्होंने साफ किया कि लंपी रोग के मामले पूरे प्रदेश में नहीं हैं। पूर्वी राजस्थान के कुछ जिलों में ही संक्रमण के केस सामने आए हैं। बाकी हिस्सों में स्थिति सामान्य बनी हुई है।
सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि सावधानी और सतर्कता रोग से बचाव का सबसे असरदार तरीका है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों को लक्षण और बचाव की सही जानकारी मिलनी चाहिए। इससे पशुपालक घबराएंगे नहीं और समय पर जरूरी सावधानी बरत सकेंगे। सही जानकारी से अफवाहों पर भी रोक लगेगी। सीएम ने कहा कि टीकाकरण अभियान को प्रदेशभर में तेज किया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
संक्रमित पशुओं को किया जा रहा आइसोलेट
बैठक में तय हुआ कि गोशालाओं में संक्रमित पशुओं को अलग रखा जाएगा। इससे बीमारी का फैलाव अन्य स्वस्थ पशुओं में रुक सकेगा। अन्य जगहों पर भी यही व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग लगातार जारी रहनी चाहिए। इससे किसी भी नए मामले पर तुरंत कार्रवाई हो सकेगी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में पूरी जानकारी सीएम को दी। उन्होंने बताया कि नियंत्रण के लिए कई स्तर पर काम किया जा रहा है।
राजस्थान में 10 हजार से ज्यादा पशु संक्रमित
पशुपालन विभाग के अनुसार प्रदेश में 10,403 पशु संक्रमित पाए गए। इनमें से 6,905 पशु पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। रिकवरी की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेशभर में 87 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। बचे हुए पशुओं का टीकाकरण भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। यह आंकड़ा सरकार की तैयारियों की गंभीरता को दिखाता है।
नियंत्रण के लिए राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। जिला और ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। यह टीम जरूरत पड़ने पर तुरंत मौके पर पहुंचती है। पशुपालकों को साइपरमेथ्रिन (Cypermethrin) और सोडियम हाईपोक्लोराईट (Sodium Hypochlorite) बांटे जा रहे हैं। इनसे पशुबाड़ों की सफाई और संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है। यह पूरी प्रक्रिया विभाग की निगरानी में चल रही है।
बैठक में कौन कौन रहा मौजूद
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। उन्होंने भी जिलों में चल रहे कामों की जानकारी सीएम को दी। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी मौजूद रहे। अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोडा भी बैठक में शामिल हुए। प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया भी मौजूद रहे।
पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव सीतारामजी भाले भी बैठक में रहे। इसके अलावा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। सभी अधिकारियों ने अपने अपने क्षेत्र की जानकारी सीएम के सामने रखी। बैठक करीब एक घंटे तक चली।
आगे क्या रहेगी सरकार की रणनीति
सरकार ने साफ किया है कि टीकाकरण अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रभावित जिलों में विशेष निगरानी टीमें तैनात रहेंगी। जरूरत पड़ने पर और संसाधन भी बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पशुपालकों से लगातार संपर्क बनाए रखें। किसी भी नए लक्षण की जानकारी तुरंत विभाग तक पहुंचनी चाहिए। इससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि गोवंश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में जागरूकता अभियान और तेज किया जाएगा। इससे पशुपालकों में भरोसा और मजबूत होगा।
पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है यह अपडेट
राजस्थान में लाखों परिवार पशुपालन पर ही निर्भर हैं। गाय और अन्य पशु उनकी आय का बड़ा सहारा हैं। लंपी रोग जैसी बीमारी से पशुओं की जान का खतरा रहता है। समय पर जानकारी मिलने से पशुपालक जल्दी सतर्क हो जाते हैं। वे संक्रमित पशु को तुरंत अलग रख सकते हैं। इससे बाकी पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा कम होता है।
टीकाकरण और सही दवाइयों की जानकारी भी पशुपालकों के लिए फायदेमंद है। समय पर टीका लगवाने से पशु सुरक्षित रह सकते हैं। सरकार की यह पहल पशुपालकों का आर्थिक नुकसान भी रोक सकती है। पूर्वी राजस्थान के किसानों को खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। अपने इलाके में पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क बनाए रखना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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