राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में पानी को लेकर टकराव गहरा गया है। बृसंगपुर क्षेत्र में 40 ट्यूबवेल प्रस्तावित हैं। इनके विरोध में सैकड़ों किसान और ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं। पलासड़ा में करीब 25 गांवों के लोगों ने पंचायत की। उन्होंने प्रस्तावित बोरिंग का विरोध किया। प्रशासन से मांग की कि ये ट्यूबवेल न खोदे जाएं।
धरने की वजह क्या है
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित जगह अरावली की संरक्षित जमीन है। उनकी सबसे बड़ी चिंता भूजल है। उन्हें डर है कि ट्यूबवेल लगे, तो भूजल स्तर नीचे जा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक इसका सीधा असर आसपास के किसानों पर पड़ेगा। खेती के लिए पानी घट सकता है। यही वजह है कि गांव-गांव से लोग इकट्ठा हुए हैं।
एक बात ग्रामीणों ने साफ कही है। वे किसी जरूरतमंद इलाके को पानी देने के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि व्यवस्था से लोगों और भूजल को नुकसान न हो।
40 ट्यूबवेल करने का प्रस्ताव
प्रस्ताव के मुताबिक 40 बोरिंग की जानी हैं। ये सरकारी जमीन पर करीब 3 हेक्टेयर क्षेत्र में होंगी। यह जानकारी जलदाय विभाग के अधिकारी ने दी है। जलदाय विभाग वही विभाग है जो गांवों में पेयजल पहुंचाता है। विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर धर्मवीर यादव ने यह बताया। उनके अनुसार योजना बजट घोषणा में भी शामिल है।
जलदाय विभाग का मकसद पेयजल आपूर्ति
विभाग का कहना है कि इन ट्यूबवेल का मकसद पीने का पानी देना है। आसपास के गांवों में पेयजल की आपूर्ति इनसे की जाएगी। विभाग इसे पीने के पानी की जरूरत बता रहा है। विभाग के मुताबिक फिलहाल इन्हीं ट्यूबवेल से गांवों को पानी दिया जाएगा। इस दावे पर ग्रामीणों की चिंता अलग है। वे भूजल के स्तर को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
चंबल का पानी कब आएगा
विभाग की तरफ से एक और बात कही गई है। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के मुताबिक यह इंतजाम हमेशा के लिए नहीं है। बाद में क्षेत्र में चंबल का पानी पहुंचेगा। तब इन ट्यूबवेल को बंद कर दिया जाएगा। यानी विभाग इन्हें अस्थायी व्यवस्था बता रहा है। हालांकि खबर में यह नहीं बताया गया कि चंबल का पानी कब तक पहुंचेगा।
ग्रामीणों की चिंता क्या है
ग्रामीणों ने पंचायत के बाद जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने अपनी चिंता रखी। क्षेत्र के ज्यादातर लोगों की रोजी-रोटी खेती पर टिकी है। इसलिए उनका मानना है कि पानी घटा, तो सबसे पहले किसान परेशान होंगे। लगातार पानी निकाला गया, तो आगे मुश्किल खड़ी हो सकती है। यह आशंका ग्रामीणों और किसान संगठन ने जताई है।
किसान सभा की मांग
किसान सभा क्षेत्र तिजारा के अध्यक्ष आजम खान ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इलाके के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार पानी निकालना ठीक नहीं है।
आजम खान ने एक विकल्प भी सुझाया। उनके मुताबिक क्षेत्र में तीन-चार बांध मौजूद हैं। इन्हें भरने की जरूरत है। साथ ही स्थायी वाटर रिचार्ज सिस्टम भी बनना चाहिए।
उनका तर्क है कि इससे बारिश का पानी सहेजा जा सकेगा। भूजल का स्तर बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। यानी विरोध के साथ समाधान का सुझाव भी रखा गया है।
16 सितंबर को क्या हुआ
ग्रामीणों का आरोप है कि 16 सितंबर 2026 को जलदाय विभाग की टीम पहुंची। टीम के साथ पुलिस जाप्ता और जेसीबी मशीनें भी थीं। यह आरोप ग्रामीणों की तरफ से है। खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौके पर पहुंच गए। उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। इससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
अरावली पर कानूनी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित जगह संरक्षित अरावली क्षेत्र में आती है। इसलिए वहां खुदाई या निर्माण से पहले कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है। पर्यावरण के नियमों का पालन भी साफ तौर पर होना चाहिए।
इस मुद्दे पर जलदाय विभाग की कोई अलग टिप्पणी खबर में नहीं है। इसलिए जगह की कानूनी स्थिति पर आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी। यह ग्रामीणों का दावा है।
जनवरी से चल रहा विवाद
यह विवाद नया नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार 6 जनवरी 2026 को घाटीका स्टैंड पर बड़ी पंचायत हुई थी। इसमें करीब 20 से 22 गांवों के लोग आए थे। उस पंचायत में 40 ट्यूबवेलों का विरोध करने का फैसला हुआ। आंदोलन जारी रखने की बात भी तय हुई। इसके बाद 19 जनवरी 2026 को एक ज्ञापन दिया गया। यह किशनगढ़बास के एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) को दिया गया। इसमें प्रस्ताव रद्द करने की मांग थी। अब एक बार फिर करीब 25 गांवों के लोग एकजुट हुए हैं। इसी वजह से मामला दोबारा चर्चा में आ गया है।
आगे की राह
फिलहाल दो पक्ष आमने-सामने हैं। ग्रामीण भूजल और अरावली के संरक्षण की बात कर रहे हैं। जलदाय विभाग पीने का पानी देने की जरूरत बता रहा है। मामला पेयजल की जरूरत और भूजल की चिंता के बीच फंसा है। दोनों पक्ष अपनी बात रख चुके हैं। अब नजर इस पर रहेगी कि प्रशासन ग्रामीणों का ज्ञापन कैसे देखता है। साथ ही देखना होगा कि विभाग अपनी योजना पर क्या फैसला लेता है।
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