मध्यप्रदेश में इस साल किसानों को खास तवज्जो मिलने जा रही है। राज्य का स्थापना दिवस अब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि किसान कल्याण का मंच भी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी थीम तय कर दी है। यह थीम है समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश। मुख्यमंत्री ने यह बात मंत्रालय में हुई एक बैठक में कही। यह बैठक मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर बुलाई गई थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी भावना के साथ स्थापना दिवस भी कृषि पर केंद्रित होगा।
क्यों चुनी गई यह थीम
डॉ. यादव के अनुसार एक नवंबर को होने वाला मध्यप्रदेश स्थापना दिवस कृषि विकास और किसान कल्याण पर केंद्रित होना चाहिए। उनके मुताबिक उन्नत कृषि, प्राकृतिक खेती और कृषि में नवाचार पर विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले कृषकों, उद्यमियों और युवाओं को सम्मानित किया जाए।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यह आयोजन सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। उनके निर्देश के मुताबिक जिलों में भी उत्साह और उल्लास के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। सभी शासकीय भवनों पर 1 नवंबर की रात रोशनी की जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश की प्रतिभाओं को अपनी कला और क्षमता दिखाने का मौका भी दिया जाए।
डॉ. यादव ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह प्रदेश का उत्सव है। उनके अनुसार राज्य और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा जनभागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में कौन रहा मौजूद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश आज मंत्रालय में हुई बैठक में दिए। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल मौजूद रहे। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन भी शामिल हुए। संजय कुमार शुक्ला और शिवशेखर शुक्ला भी बैठक का हिस्सा रहे। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना भी बैठक में मौजूद थे। इसके अलावा संस्कृति विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
लाल परेड ग्राउंड में होगा राज्य स्तरीय समारोह
बैठक में बताया गया कि यह मध्यप्रदेश का 71वां स्थापना समारोह है। इसका राज्य स्तरीय आयोजन भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में होगा। यहां कई विषयों पर प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
इनमें विकसित मध्यप्रदेश-2047 का विषय शामिल है। एक जिला-एक उत्पाद योजना पर भी प्रदर्शनी लगेगी। मध्यप्रदेश के जननायकों से जुड़ी प्रदर्शनी भी होगी। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं और मंदिर स्थापत्य पर भी विशेष प्रदर्शनी रहेगी। भारत की ऋषि परंपरा को भी प्रदर्शनी में जगह मिलेगी। इसके साथ प्रदेश में विरासत से विकास की यात्रा भी दिखाई जाएगी। कृषि के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों पर भी खास प्रदर्शनी होगी।
देशज व्यंजनों का मेला
राज्य स्तरीय समारोह में एक खास आकर्षण देशज व्यंजनों का मेला होगा। इसमें प्रदेश के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन देखने और चखने को मिलेंगे। यह मेला समारोह स्थल पर विशेष रूप से आयोजित किया जाएगा।
एक नवंबर की शाम को भव्य स्तर पर सुगम संगीत का कार्यक्रम होगा। इसमें देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इस मौके पर आकर्षक आतिशबाजी भी होगी। यानी समारोह की शाम सांस्कृतिक रंग से भरी रहेगी।
जिलों में क्या होगा
स्थापना दिवस सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा। जिला मुख्यालयों पर भी विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी। हर जिले में वहां के उत्कृष्ट कार्यों और जिला उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला स्तरीय कार्यक्रमों में कई लोगों को खास तौर पर आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और उद्योगपति शामिल हैं। व्यवसायी, धर्मगुरु और स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग भी बुलाए जाएंगे।
स्वतंत्रता सेनानी, लोकतंत्र सेनानी और शहीद सैनिकों के परिजन भी आमंत्रित होंगे। इसके साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने वाले स्व-सहायता समूहों को भी बुलाया जाएगा। स्टार्ट-अप से जुड़े युवाओं को भी न्योता दिया जाएगा।
व्यवस्थाओं पर भी हुई चर्चा
बैठक में राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों पर भी बात हुई। इसमें बैठक व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए। यातायात प्रबंधन के इंतजाम पर भी चर्चा हुई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यानी लाल परेड ग्राउंड में बड़ी भीड़ जुटने की तैयारी है।
किसानों के लिए क्या मायने
इस साल की थीम सीधे किसानों से जुड़ी है। कृषि पर केंद्रित प्रदर्शनियां और सम्मान का मौका किसानों के काम को पहचान दे सकते हैं। जो किसान प्राकृतिक खेती या नवाचार कर रहे हैं, उनके लिए यह मंच अहम हो सकता है। हालांकि सम्मान पाने वालों के चयन की प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है। इच्छुक किसान अपने जिला प्रशासन या कृषि विभाग से जानकारी ले सकते हैं।
आगे क्या देखना होगा
आने वाले दिनों में कुछ बातें साफ होंगी। पहला, कृषि प्रदर्शनियों में किन किसानों और उत्पादों को जगह मिलती है। दूसरा, सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया कैसे तय होती है। तीसरा, जिला स्तर पर आयोजन किस रूप में होते हैं। इन तैयारियों की पूरी जानकारी आने वाले हफ्तों में सामने आएगी।
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