संजय शर्मा@भोपाल/सागर/इंदौर. मध्य प्रदेश में मानसून की बिगड़ी चाल से उड़द और सोयाबीन की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मानसून कमजोर रहने के अनुमान के चलते प्रदेश में बड़े स्तर पर की गई उड़द की बुवाई ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। ज्यादा बारिश होने से उड़द की फसल चौपट होने के कगार पर है।
वहीं, सोयाबीन भी बारिश के बदलते रुख से बीमारियों से घिरा हुआ है। कहीं अफलन, कहीं जड़ सड़न और पीले मोजेक की मार ने सोयाबीन को बर्बाद कर दिया है। खरीफ सीजन की फसल तबाह होने से परेशान किसान अब सड़क पर उतरकर सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वहीं बार- बार हो रही बारिश के कारण प्रशासन और कृषि अमला सर्वे का काम भी पूरा नहीं कर पा रहा है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
मध्य प्रदेश सोया स्टेट का दर्जा रखता है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन के मुताबिक 2026 में प्रदेश में 51.38 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन जबकि 6.72 लाख हैक्टेयर में उड़द की बोवनी हुई है। शुरूआत में मानसून कमजोर रहने के कारण सोयाबीन की फसल का विकास प्रभावित हुआ और फिर ज्यादा बारिश के कारण अफलन, कीट व्याधि और पीला मोजेक की मार से घिरा रहा।
वहीं, फलन की स्थिति में आई उड़द की फसल लगातार बारिश से चौपट हो रही है। प्रदेश के सागर अंचल में ही करीब 2 लाख हैक्टेयर में उड़द की फसल बरसात के कारण सड़ गई है। खेतों में उड़द की फसल की बर्बादी को देखा जा सकता है। बुदेलखंड के किसान अब सड़कों पर उतरकर सर्वे और मुआवजा मांग रहे हैं।
जानिए संभागवार स्थिति
सागर संभाग: संभाग के इलाकों में मानसून की अनिश्चितता और भारी बारिश से फसलों की हालत खराब है। अकेले सागर जिले में ही ढाई लाख एकड़ में बोई गई उड़द की फसल तबाह हो चुकी है। रहली, खुरई, बीना, राहतगढ़ जैसे क्षेत्रों में फसलें काली पड़ गई हैं या पकने से पहले ही सूख गई हैं।
उज्जैन- इंदौर संभाग: सोयाबीन के गढ़ मालवा में पीला मोजेक ने महामारी का रूप ले लिया है। मंदसौर, धार, और इंदौर (पीथमपुर) के बरदरी में रासायनिक प्रदूषण और बीमारी के चलते 35-40 बीघा की खड़ी फसलें सूखकर गिर गईं। मंदसौर के मल्हारगढ़ में किसानों ने फसल पर रोटावेटर चलाकर उसे खुद ही नष्ट कर दिया है।
भोपाल संभाग: सीहोर और राजगढ़ जिलों में सोयाबीन की अगेती किस्में पानी के भराव और अफलन (फलियां न आने) के कारण सड़ चुकी हैं। विदिशा और रायसेन जिलों में भी खेतों में सड़ रही उड़द और बर्बाद हो रहे सोयाबीन को देखकर किसान निराशा में डूबे हुए हैं। किसान अधिकारियों से सर्वे की मांग कर रहे हैं।
किसानों में बढ़ रही नाराजगी
फसलें बर्बाद होने से मध्य प्रदेश के किसानों में भारी निराशा और आक्रोश है। किसानों का कहना है कि महंगे दामों पर सोयाबीन का बीज खरीदकर बोवनी की थी। हकाई-जुताई, कीटनाशकों पर खर्च करने के बाद हाथ में कुछ नहीं बचा। रबी सीजन में खाद-बीज जुटाने का संकट खड़ा हो गया है।
सर्वे और मुआवजे की मांग
फसल नुकसान से नाराज किसान, किसान संगठन और विपक्षी दल कई जिलों कलेक्ट्रेट परिसरों का घेराव कर रहे हैं। सीहोर की दोराहा तहसील के किसान कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी खराब सोयाबीन की फसलें लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। नरसिंहपुर में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान खराब फसलों के बंडल लेकर पीएम और सीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर मुआवजा मांगने पहुंचे थे। सागर के रहली, राहतगढ़, बीना और रासेन के बेगमगंज में किसानों ने विशाल प्रदर्शन किया है। राजगढ़ व रायसेन जिलों में किसानों के साथ कांग्रेस और किसान संगठन धरना दे रहे हैं। विदिशा के नटेरन में किसान संघ ने तहसीलदार से खेतों का मुआयना और सर्वे कराते हुए मुआवजा देने की मांग की है।
सैटेलाइट से नहीं मौके पर हो सर्वे
बीते सालों में सैटेलाइट सर्वे की विसंगतियों से आशंकित परेशान सरकार से भौतिक सर्वे की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है सेटेलाइट सर्वे में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। सरकार को तहसीलदार,आरआई और पटवारियों को खेतों में पहुंचकर सर्वे का आदेश देना चाहिए। जब अधिकारी खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखेंगे तभी वास्तविक सर्वे हो पाएगा। किसान संगठन सोयाबीन और उड़द को हुए नुकसान पर 50 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर की दर से मुआवजा मांग रहे हैं। वहीं फसल बीमा के दावों के पिछले सालों से रुके भुगतान तुरंत कराने और इस क्षति का क्लेम सीधे खातें में जमा कराने पर अड़े हुए हैं।
सरकार के निर्देश फिर भी सर्वे में सुस्ती
फसलों को बड़े स्तर पर हुए नुकसान और किसानों की नाराजगी देख मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने जिला कलेक्टरों को सर्वे के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद कई जिलों राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर सर्वे शुरू कर दिया गया है। सरकार के निर्देश के बाद भी सर्वे की धीमी रफ्तार से किसान संतुष्ट नहीं हैं और उनमें असंतोष बढ़ रहा है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहे हैं।
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