संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश का राज्य सम्मेलन होगा। यह सम्मेलन दो अक्टूबर को इंदौर में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर एक बजे गांधी हॉल में होगा। प्रदेशभर से किसान प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। कई किसान संगठनों के पदाधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के किसान नेता भी आएंगे।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में कई मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें किसानों और मजदूरों से जुड़े सवाल प्रमुख रहेंगे। बैठक में आगे के संघर्ष की रणनीति भी तय होगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन में स्थानीय और राज्य स्तर के मुद्दे उठेंगे। इनमें अहिल्या पथ योजना को रद्द करने की मांग शामिल है। प्रभावित किसानों की जमीनों से रोक हटाने की मांग भी होगी। आयोजकों ने जमीन से जुड़े मुद्दे को अहम बताया है।
सांची दूध संघ से जुड़ी मांग भी उठेगी। किसान संगठन दूध का भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग 12 रुपए प्रति फैट तय करने की है।
सांची समितियों से जुड़े ज्ञापनों पर कार्रवाई की मांग होगी। ये ज्ञापन 150 से अधिक गांवों में दिए गए हैं।
इंदौर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
सम्मेलन में इंदौर जिले में सूखे का मुद्दा भी उठेगा। किसान संगठन इंदौर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग करेंगे। इस मांग को सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में रखा गया है। आयोजकों ने सोयाबीन खरीद का मुद्दा भी उठाया है। उनकी मांग 8,000 रुपए प्रति क्विंटल खरीद की है।
इस मांग पर सम्मेलन में विस्तार से चर्चा होगी। सोयाबीन किसानों की खरीद और भाव अहम विषय रहेगा।
MSP की कानूनी गारंटी की मांग
सम्मेलन में MSP का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी मांगी जाएगी। किसान संगठन लंबे समय से यह मांग उठाते रहे हैं। इस सम्मेलन में भी इसे एजेंडे में शामिल किया गया है।
मंडी व्यवस्था की रक्षा पर भी चर्चा होगी। आयोजक मंडी व्यवस्था को किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। मंडी व्यवस्था में बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए जाएंगे। भूमि अधिग्रहण के विरोध पर भी चर्चा होगी।
सरकार की किसान नीतियों पर मंथन
सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां भी चर्चा में रहेंगी। किसान संगठनों की ओर से नीतियों पर विचार रखा जाएगा। किसानों और मजदूरों की अन्य समस्याएं भी उठाई जाएंगी। इन मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने की बात है।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। बैठक में आगामी संघर्ष और आंदोलनों की दिशा तय होगी। इसमें अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। इसके बाद साझा रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
कौन-कौन से किसान संगठन होंगे शामिल
कई संगठन सम्मेलन में शामिल होंगे। इनमें किसान संघर्ष समिति प्रमुख रूप से शामिल है। अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन भी इसमें रहेगा। भारतीय किसान मजदूर सेना की भागीदारी भी होगी। अखिल भारतीय किसान सभा भी सम्मेलन में शामिल होगी। किसान सभा अजय भवन भी इसमें हिस्सा लेगी। इसके अलावा अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि आएंगे।
प्रदेशभर में चल रही तैयारियां
सम्मेलन को लेकर प्रदेशभर में संपर्क अभियान चल रहा है। किसान प्रतिनिधियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। आयोजक ज्यादा प्रतिनिधियों को सम्मेलन में बुला रहे हैं। उनका कहना है कि भागीदारी से रणनीति तय होगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान प्रतिनिधियों से अपील की है। प्रतिनिधियों से 2 अक्टूबर को गांधी हॉल पहुंचने को कहा गया है। आयोजकों ने इसे किसान हित से जोड़ा है। सम्मेलन में आगामी संघर्ष की दिशा तय होगी। सम्मेलन की जानकारी किसान नेता रामस्वरूप मंत्री , बबलू जाधव और अरुण चौहान, रुद्रपाल यादव, सोनू शर्मा, शैलेंद्र पटेल और चंदन सिंह बड़वाया ने दी।
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