इंदौर में अहिल्या पथ योजना को लेकर किसानों का विरोध बढ़ रहा है। इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के सामने धरना जारी है। शुक्रवार को किसानों ने आंदोलन के तीसरे दिन प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध जताया।
किसानों का कहना है कि जमीन पर लगी रोक से परेशानी बढ़ी है। वे शासन और प्रशासन से तत्काल फैसला चाहते हैं। भारतीय किसान एवं मजदूर सेना आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। अहिल्या पथ योजना संघर्ष समिति भी इसमें शामिल है। किसानों का धरना अनिश्चितकालीन बताया गया है। किसान दिन-रात धरना स्थल पर मौजूद रहने की बात कह रहे हैं।
जमीनों पर रोक हटाने की मांग
किसानों की सबसे बड़ी मांग जमीनों से रोक हटाने की है। वे इसके लिए सरकार से स्पष्ट नोटिफिकेशन चाहते हैं। किसानों के अनुसार, जमीनों के क्रय-विक्रय पर रोक लगी है। विकास और अन्य अनुमतियों को लेकर भी परेशानी है। इससे प्रभावित किसान अपनी जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। किसानों का कहना है कि इससे आर्थिक दिक्कत बढ़ी है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, आठ गांवों की करीब 1,400 हेक्टेयर जमीन प्रभावित है। किसान जमीन पर फिलहाल खेती कर पा रहे हैं, लेकिन खरीदी-बिक्री और विकास पर रोक की शिकायत है।
अहिल्या पथ रद्द करने की मांग
किसान केवल जमीनों से रोक हटाने की मांग नहीं कर रहे। वे पूरी अहिल्या पथ योजना रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि योजना से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि जमीन उनकी आजीविका का आधार है। किसानों ने कहा कि लंबे समय से स्थिति साफ नहीं हुई। इसी वजह से उन्होंने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है।
योजना को लेकर क्या है विवाद
अहिल्या पथ योजना का प्रस्ताव इंदौर विकास प्राधिकरण से जुड़ा है। आईडीए की वेबसाइट पर अहिल्यापथ की अलग-अलग योजनाएं दर्ज हैं। योजना का प्रस्ताव 2024 में तैयार हुआ था। प्रस्ताव में धार रोड क्षेत्र से उज्जैन रोड तक का मार्ग शामिल था।
करीब 15 किलोमीटर लंबी सड़क का प्रस्ताव बताया गया है। इसके साथ पांच अलग-अलग हिस्सों का भी उल्लेख है। प्रस्ताव को शासन ने वापस भी भेजा था। इसके बाद योजना को लेकर स्थिति अटकी रही। किसानों की शिकायत है कि योजना आगे नहीं बढ़ी। इसके बावजूद जमीनों पर लगी पाबंदियां नहीं हटीं।
किसानों को किस बात की परेशानी
किसानों का कहना है कि जमीन पर रोक से विकल्प सीमित हुए हैं। जरूरत पड़ने पर वे जमीन बेच नहीं पा रहे। विकास से जुड़ी अनुमति को लेकर भी परेशानी बताई गई है। इससे जमीन की उपयोगिता और भविष्य को लेकर चिंता है।
किसानों का दावा है कि लंबे समय से यही स्थिति बनी है। उनका कहना है कि इससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार स्थिति पर स्पष्ट फैसला करे। उन्हें लिखित आदेश के जरिए राहत मिलने की मांग है।
किसान नेताओं ने क्या कहा
भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव ने मांग दोहराई। उन्होंने सरकार से किसानों की परेशानी पर फैसला लेने की अपील की। जाधव के अनुसार, किसानों को जमीन पर स्पष्ट अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पहले भी जाधव ने जमीन को किसानों की आजीविका बताया था। उन्होंने योजना रद्द करने की मांग रखी थी। किसान संगठनों का कहना है कि कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना चल रहा है। ठोस फैसला नहीं आने पर प्रदर्शन का तरीका बदला गया।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि धरना मांग पूरी होने तक जारी रहेगा। आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी संकेत दिए गए हैं। किसान आने वाले दिनों में नए तरीके अपना सकते हैं।
यह प्रदर्शन फिलहाल आईडीए कार्यालय के सामने जारी है। किसान सरकार से स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं। 17 सितंबर की रिपोर्ट में किसानों ने अर्धनग्न प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। अब तीसरे दिन उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया।
प्रशासन के सामने क्या सवाल
इस मामले में किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत अहम है। पहले आईडीए अधिकारियों के किसानों से मिलने की जानकारी सामने आई थी। आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े किसानों से मिले थे। अधिकारियों ने समस्या शासन स्तर तक पहुंचाने की बात कही थी।
किसानों ने उस समय धरना खत्म नहीं किया था। अब आंदोलन तीसरे दिन तक पहुंच गया है। किसानों की मांग जमीनों पर लगी पाबंदियां हटाने की है। वहीं योजना को रद्द करने की मांग भी लगातार जारी है। अब आगे सरकार और प्रशासन के फैसले पर नजर रहेगी। किसानों को लिखित राहत मिलने तक आंदोलन जारी रहने की बात है।
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