किसान की बात,सूत्र के साथ

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी में बड़ा बदलाव, 362 नए उपार्जन केंद्र तैयार होंगे, समीक्षा बैठक में पुराने रिकॉर्ड भी जांचे गए

newz@gmail.com | Sep 23, 2026, 19:45 IST

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी की तैयारियां तेज हैं। 362 नए उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। बारदाना, संग्रहण केंद्र और निविदाओं की स्थिति की समीक्षा हुई। अधिकारियों को किसानों की सुविधा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।

छत्तीसगढ़ धान खरीदी

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए काम शुरू है। रायपुर में राज्य सहकारी विपणन संघ की समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी ने की। इस बैठक में जिला विपणन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में पिछले वर्षों की खरीदी की भी समीक्षा हुई। धान के निराकरण और चावल जमा करने की स्थिति देखी गई। एफसीआई (Food Corporation of India) में चावल जमा करने की स्थिति देखी गई। नान में चावल जमा करने की प्रगति भी जांची गई।

362 नए केंद्रों पर फोकस

आगामी सीजन के लिए 362 नए उपार्जन केंद्रों पर विशेष ध्यान है। इन केंद्रों की जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी होंगी। बैठक में इन केंद्रों की तैयारी की जानकारी ली गई। अधिकारियों से केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति पूछी गई। संग्रहण केंद्रों की तैयारी भी बैठक का अहम मुद्दा रही। मुख्यालय और जिला स्तर की निविदाओं पर भी चर्चा हुई।

सरकार की कोशिश खरीदी व्यवस्था को समय पर तैयार करने की है। इससे सीजन शुरू होने पर अचानक दबाव नहीं बनेगा। नए केंद्र बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सकती है। हालांकि केंद्रों की वास्तविक उपयोगिता व्यवस्था पूरी होने पर निर्भर करेगी।

बारदाने की उपलब्धता पर चर्चा

धान खरीदी में बारदाने की अहम भूमिका होती है। इसलिए बैठक में बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा हुई। अधिकारियों से आगामी खरीदी के लिए स्थिति बताने को कहा गया। बारदाना सुरक्षा और रखरखाव पर भी चर्चा हुई।

पिछले तीन वर्षों के भुगतान की जानकारी भी देखी गई। इसमें धान परिवहन से जुड़े भुगतान शामिल रहे। 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के आंकड़े देखे गए। बारदाना सुरक्षा और रखरखाव के भुगतान की भी समीक्षा हुई। इन जानकारियों से आगामी खरीदी की वित्तीय तैयारी समझने में मदद मिलेगी। साथ ही लंबित मामलों को समय पर निपटाने पर जोर है।

पुरानी खरीदी का हिसाब भी देखा

बैठक में सिर्फ आगामी खरीदी पर चर्चा नहीं हुई। पिछले वर्षों की धान खरीदी का रिकॉर्ड भी जांचा गया। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में खरीदे धान का निराकरण देखा गया। चावल जमा करने की स्थिति भी जांची गई। लेखा मिलान की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। खरीफ वर्ष 2024-25 और 2025-26 की सूखत भी देखी गई।

सूखत का मतलब खरीदी गई धान में दर्ज कमी से है। दोनों वर्षों में सामने आई सूखत की स्थिति की समीक्षा हुई। इस समीक्षा का उद्देश्य पुराने मामलों की स्थिति स्पष्ट करना है। इससे आगामी खरीदी व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जा सकते हैं।

किसानों को परेशानी नहीं हो

बैठक में किसानों की सुविधा पर भी जोर दिया गया। प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने को कहा। खरीदी केंद्रों पर किसानों को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने लंबित काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। खरीदी व्यवस्था सुचारू और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया। साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा गया। इसका सीधा संबंध किसानों के धान बेचने के अनुभव से है। खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था बेहतर होने से किसानों को सुविधा मिलेगी। खासकर नए केंद्रों पर तैयारी पूरी करना महत्वपूर्ण होगा।

वित्तीय व्यवस्था पर भी चर्चा

आगामी धान खरीदी के लिए वित्तीय व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों से इससे जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी ली गई। मुख्यालय और जिला स्तर पर निविदाओं की स्थिति देखी गई। इससे खरीदी शुरू होने से पहले जरूरी काम पूरे होंगे।

धान परिवहन की पिछली व्यवस्था का भी रिकॉर्ड देखा गया। भुगतान की जिलेवार स्थिति की समीक्षा की गई। बारदाने की सुरक्षा और रखरखाव पर खर्च भी जांचा गया। इन सभी जानकारियों को आगामी सीजन की तैयारी से जोड़ा गया।

चावल जमा करने की स्थिति

धान खरीदी के बाद चावल जमा करना भी अहम प्रक्रिया है। बैठक में इस प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा हुई। एफसीआई और नान में चावल जमा करने की स्थिति देखी गई। साथ ही पिछले खरीदी वर्ष का हिसाब भी जांचा गया।

लेखा मिलान की स्थिति की जानकारी अधिकारियों से ली गई। इससे पुराने रिकॉर्ड को पूरा करने में मदद मिलेगी। आगामी खरीदी से पहले इन मामलों को व्यवस्थित करना जरूरी है। इससे नई खरीदी के दौरान प्रशासनिक दबाव कम हो सकता है।

किसानों के लिए क्यों अहम

धान खरीदी किसानों के लिए हर साल बड़ा मुद्दा रहती है। खरीदी केंद्रों की संख्या और व्यवस्था सीधे किसानों से जुड़ी है। 362 नए केंद्रों की तैयारी इसलिए महत्वपूर्ण है। नए केंद्र किसानों के लिए खरीदी स्थल बढ़ा सकते हैं। हालांकि केवल केंद्र खोलना पर्याप्त नहीं होगा। वहां बारदाना, संग्रहण और परिवहन की व्यवस्था भी जरूरी है।

सरकार ने समय-सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने को कहा है। किसानों को खरीदी के दौरान परेशानी नहीं होने का निर्देश है। आने वाले खरीफ सीजन में व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है। यह तैयारी पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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