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राजस्थान के अलवर में DAP खाद के लिए भारी भीड़: 600 कट्टे कम पड़े, कई किसान खाली हाथ लौटे

newz@gmail.com | Sep 26, 2026, 15:08 IST

अलवर के रामगढ़ में DAP खाद के लिए किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। सरसों की बुवाई के बीच सुबह 6 बजे से लाइन लगी रही। सिर्फ 600 कट्टे खाद होने से कई किसान खाली हाथ लौटे।

खाद की किल्लत

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में DAP खाद के लिए भीड़ उमड़ी। यह भीड़ काफी ज्यादा थी। यह भीड़ खाद लेने पहुंचे किसानों की थी। सरसों की बुवाई का सीजन शुरू होते ही खाद की मांग बढ़ गई है। शुक्रवार को किसान सुबह करीब 6 बजे से ही लाइन में लगे रहे। बस स्टैंड स्थित सहकारी समिति के बाहर यह भीड़ जुटी थी। समिति का खाद वितरण केंद्र करीब 10 बजे खुला। तब तक किसान चार घंटे से भी ज्यादा समय तक कतार में खड़े रहे।

सुबह से लाइन, भारी भीड़

केंद्र खुलते ही किसानों को DAP खाद बांटना शुरू किया गया। किसानों की संख्या ज्यादा होने से मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की निगरानी में किसानों की कतार लगवाई गई। इसके बाद व्यवस्थित तरीके से खाद का वितरण शुरू हुआ। भीड़ इतनी थी कि बिना पुलिस के हालात संभालना मुश्किल हो गया था।

600 कट्टे, मांग ज्यादा

शुक्रवार को समिति के पास DAP खाद के सिर्फ 600 कट्टे ही उपलब्ध थे। लेकिन खाद लेने पहुंचे किसानों की संख्या इससे कहीं ज्यादा थी। सीमित स्टॉक के चलते किसानों में खाद लेने की होड़ मच गई। कतार में कई बार धक्का-मुक्की और कहासुनी की स्थिति भी बनी। भीड़ को संभालना समिति कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो रहा था। मामले की सूचना मिलते ही एएसआई चंद्रपाल चौधरी मौके पर पहुंचे। उनके साथ कांस्टेबल महमूद खान भी वहां पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने किसानों की लाइन व्यवस्थित कराई। इसके बाद उन्हीं की निगरानी में खाद बांटा गया।

खाली हाथ लौटे किसान

पुलिस की मौजूदगी से दोपहर करीब 2 बजे तक वितरण शांति से चलता रहा। लेकिन तब तक समिति के पास मौजूद सभी 600 कट्टे खत्म हो गए। कई किसान तब भी खाद के इंतजार में लाइन में खड़े थे। स्टॉक खत्म होने से इन किसानों को खाली हाथ ही लौटना पड़ा। सुबह से लाइन में लगे किसानों ने इस पर नाराजगी भी जताई।

एक दिन पहले भी विवाद

यह पहला मौका नहीं था, जब समिति के बाहर ऐसी भीड़ जुटी हो। इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी लंबी कतार लगी थी। उस दिन कुछ कट्टे बांटे जाने के बाद किसानों में विवाद हो गया था। इसके बाद समिति सदस्यों ने रामगढ़ थाने से मदद मांगी थी। उन्होंने पर्ची व्यवस्था लागू कराने की भी कोशिश की थी। लगातार दूसरे दिन ऐसी स्थिति बनने से किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा था।

पुलिस बल की कमी क्यों

हालांकि उस समय थाने में पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। दरअसल पंचायत राज चुनाव के तहत सरपंच पदों की लॉटरी निकाली जा रही थी। यह प्रक्रिया रामगढ़ एसडीएम कार्यालय में चल रही थी। इसी वजह से थाने का ज्यादातर पुलिस बल वहां तैनात था। पुलिसकर्मियों की कमी के चलते किसानों की कतार वापस भेजनी पड़ी। यह फैसला किसानों के लिए भी निराशाजनक साबित हुआ। शुक्रवार को पुलिस मौजूद रही, इसलिए व्यवस्था कुछ हद तक संभल सकी।

किसानों में नाराजगी

बावजूद इसके DAP का सीमित स्टॉक किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना रहा। बड़ी संख्या में किसानों को खाद नहीं मिल सकी। उन्हें मायूस होकर खाली हाथ घर लौटना पड़ा। सरसों की बुवाई के लिए समय पर खाद मिलना बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी से किसानों की चिंता बढ़ जाती है। समय पर बुवाई न हो पाने से उपज पर भी असर पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से खाद की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। कई किसानों ने कहा कि उन्हें दोबारा चक्कर लगाना पड़ सकता है।

सरसों की बुवाई के लिए डीएपी खाद जरूरी

डीएपी यानी डाईअमोनियम फॉस्फेट (Diammonium Phosphate) सरसों की बुवाई में अहम भूमिका निभाता है। यह खाद पौधे की जड़ें मजबूत करने में मदद करता है। शुरुआती दौर में पौधे की बढ़वार के लिए भी यह जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि सीजन शुरू होते ही मांग अचानक बढ़ जाती है। रबी सीजन की शुरुआत में सरसों के लिए भी काफी खाद चाहिए होता है। ऐसे समय में स्टॉक सीमित हो तो भीड़ बढ़ जाती है। इससे अव्यवस्था की स्थिति भी बन जाती है। कृषि विभाग को मांग के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।

किसानों को भी एक सुझाव दिया जा रहा है। वे समय से पहले खाद की उपलब्धता की जानकारी ले लें। इससे बार-बार लाइन में लगने की परेशानी कुछ हद तक कम हो सकती है। समितियों में पर्ची या टोकन व्यवस्था लागू करने से भी फायदा हो सकता है। इससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों के बीच धक्का-मुक्की जैसी घटनाओं पर भी रोक लग सकती है। आने वाले दिनों में भी खाद की मांग बनी रहने की संभावना है। सरसों की बुवाई अभी जारी रहेगी। ऐसे में समय पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। इससे किसानों को बार-बार लाइन में लगने से भी राहत मिल सकती है।

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